उत्तरप्रदेश, झारखंड व मध्यप्रदेश के बिचौलियों का 2,200 बोरा धान जब्त

राज्य में 3,100 रुपये समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जा रहा है। यह पड़ोसी प्रांतों से 700 से 800 रुपये अधिक है। इसी कारण तस्करों द्वारा छत्तीसगढ़ से लगे प्रदेशों के सीमावर्ती जिलों से धान लाकर बलरामपुर जिले की समितियों में खपाया जाता है।

By Asim Sen Gupta

Publish Date: Tue, 19 Nov 2024 12:13:04 AM (IST)

Up to date Date: Tue, 19 Nov 2024 12:13:04 AM (IST)

HighLights

  1. बलरामपुर जिले में अभी तक दो ट्रक, चार पिकअप की भी हो चुकी जब्ती
  2. समर्थन मूल्य पर धान खपाने के लिए सक्रिय हैं दलाल और बिचौलिए
  3. अंतरराज्यीय सीमाओं पर बेरियर लगाए गए हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : उत्तरप्रदेश, झारखंड और मध्यप्रदेश की सीमा से लगे बलरामपुर जिले में चार दिन में 2,200 बोरा धान, चार पिकअप और दो ट्रक जब्त हो चुके हैं। राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी आरंभ होने के साथ ही बिचौलिए और दलाल सक्रिय हो गए हैं। रात के अंधेरे में पिकअप, ट्रक से पड़ोसी राज्यों से धान लाकर समितियों में खपाने की कोशिश हो रही है। पोल्ट्री फार्म में भी धान छिपाकर रखा जा रहा है।

राज्य में 3,100 रुपये समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जा रहा है। यह पड़ोसी प्रांतों से 700 से 800 रुपये अधिक है। इसी कारण तस्करों द्वारा छत्तीसगढ़ से लगे प्रदेशों के सीमावर्ती जिलों से धान लाकर बलरामपुर जिले की समितियों में खपाया जाता है।इसके लिए समितियों के कर्मचारियों के साथ सेटिंग की जाती है। पंजीकृत किसानों के नाम पर ही दूसरे प्रदेशों का धान बेचा जाता है। इस बार भी अंतरराज्यीय सीमाओं पर बेरियर लगाए गए हैं। कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में मालवाहकों की नियमित रूप से जांच की जा रही है।

सीमावर्ती क्षेत्र की समितियां बदनाम

बलरामपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र की कई सहकारी समितियां समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में गड़बड़ी के लिए बदनाम रही हैं। कुछ पहले भंवरमाल समिति में 40 लाख रुपये का धान गायब मिला था। प्रबंधक के विरुद्ध अपराध भी दर्ज किया गया था। भंवरमाल के साथ त्रिकुंडा और महावीरगंज समिति में धान का रकबा बढ़ाकर गड़बड़ी की गई थी।

लक्ष्य से पांच लाख क्विंटल अधिक की हुई थी खरीदी

खरीफ सीजन 2023-24 में बलरामपुर जिले में 20 लाख 87 हजार 220 क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य था लेकिन 25 लाख 85 हजार 980 क्विंटल धान खरीद लिया गया था। रकबा बढ़ाकर तीन करोड़ 63 लाख रुपये के अधिक की धान खरीदी पर रामानुजगंज के तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार को निलंबित किया गया था।जिन किसानों का रकबा बढ़ाकर खरीदी की गई थी उनका भुगतान भी रोक दिया गया था। जांच के बाद धान की वास्तविक बिक्री के अनुरूप राशि आहरण की अनुमति दे दी गई थी।

ऐसे की जाती है गड़बड़ी

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी आरंभ होने से पहले धान के रकबे का पंजीयन होता है। इसी में गड़बड़ी की जाती है। योजनाबद्ध तरीक़े से धान का रकबा बढ़ा दिया जाता है। इसी अतिरिक्त रकबे के आधार पर बिचौलिए आसानी से किसानों के नाम पर धान की बिक्री कर देते हैं। इसके लिए उपार्जन केंद्रों के कर्मचारियों के साथ भी सेटिंग की जाती है।