तीन दिन पहले रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज किए तो अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन ने आक्रामक रुख अपनाया। इस युद्ध के होने से भीषण का खतरा बढ़ गया और 18 नवंबर के बाद कीमती सोने (आज के सोने के भाव) और चांदी (आज के चांदी के भाव) के भाव फिर से उछलने लगे हैं।
द्वारा लोकेश सोलंकी
प्रकाशित तिथि: गुरु, 21 नवंबर 2024 10:55:05 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: गुरु, 21 नवंबर 2024 11:12:24 पूर्वाह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- 20 जनवरी के बाद बिडेन की जगह पर अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे।
- वास्तविक युद्ध पर स्थिर रुख के उलट निर्णय लेकर लड़ाई ख़त्म करवायी जा सकती है।
- उद्योग जगत पर असल की नीति भी सोने और चांदी के दाम अनिष्ट वाली होगी।
लोकेश बाजार, नईदुनिया, इंदौर(सोने के दाम में बढ़ोतरी)। दीपावली आरंभते ही सोना- ब्यावरा के दाम घटने लगे थे। घटते राजस्थान की खुशियाँ उन परिवारों में साफ देखने जा रही थीं जहाँ शादियाँ हो रही हैं। बाजार में भी खुशी थी कि फेस्टिव सीजन में सोना- घाटे के घटे दाम गहनों की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
बाजार की उम्मीद के साथ ईस्टर के सामान के लिए लोगों का बजट रूस- अमेरिका के रुख ने निकाला है। यूक्रेन की वॉर्लैंड से आ रही खबरों ने कीमती सामान को यूटर्न लेने पर मजबूर कर दिया। ऐसे में भारतीय बाजार और निजीकरण दोनों निराश हैं।
अमेरिका के चुनाव नतीजे आते हैं पलटा बाजार
सोने और चांदी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से ही तय होते हैं। दीपावली से पहले सोना (24 कैरेट) इंदौर के बाजार में 81000 रुपये प्रति दस ग्राम के राहत स्तर पर पहुंच गया था। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के चुनावी नतीजे ही बाजार ने पलटी मारी और सोने के साथ चांदी का दाम भी घटने लगे।
बाजार में उम्मीद थी कि दिसंबर और उसके बाद भी दाम यूं ही घटते रहेंगे। अंत में भी खुशियाँ मनाई गईं। लेकिन पिछले तीन दिनों से बाजार में अचानक तेजी आ गई है। घटने की राह पर आगे बढ़ता हुआ सोना- सुला के भाव फिर से तेजी की ओर कुलांचे मंदी दिख रहे हैं।

ऐसे में शादी के लिए खरीद करने वाले नए पोर्टफोलियो से बजट बनाना पड़ता है। कुछ लोग इंतजार कर रहे हैं कि भाव घटे तो उसके बाद बाजार तक पहुंचें।
इसलिए दिशा बदलना
18 नवंबर से इजराइल-हिजाबिस्तान और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव बढ़ गया है। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने रूस के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली अपनी मिसाइलों से जापान को छूट दे दी। बुलियन मैसर्स नीलेश सारड़ा के अनुसार सोने को संकट की स्थिति में सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता है।
जब उद्योग पर संकट या अनिश्चितता दिखती है तो देश-विदेश के निवेशक सोने में निवेश बढ़ा देते हैं। ऐसे में इसकी कीमत में बढ़ोतरी दिख रही है और चांदी पर भी असर दिख रहा है।
अमेरिका में चुनाव परिणाम साक्षात् उभरते ही हैं, बैबाती के बाजार मान रहे थे कि होने वाले राष्ट्रपति पद जो खुद व्यापारी हैं वे कुछ कदम उठाएंगे जो युद्ध खत्म हो जाएगा और स्थिर अमेरिकी सरकार के उलट हो जाएंगे। ऐसे में सोना- सस्ता होना लगा था।

20 जनवरी के बाद राहत
बाजार के नए जानकार कह रहे हैं कि सोने-बेचैनी के बाजारों में राहत की उम्मीद साल में मिल सकती है। 20 जनवरी के बाद बिडेन की जगह अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे। वे युद्ध पर स्थिर रुख के उलट निर्णय लेकर युद्ध समाप्त करवा सकते हैं।
साथ ही इंडस्ट्री पर उनकी नीति भी सोने के दाम पर असंतुलित होगी। एडवरट सराफा बिजनेस एसोसिएशन के मंत्री अविनाश शास्त्री के अनुसार तब तक क्रीड़ा स्मारक का पहला दौर समाप्त हो जाएगा। जनवरी के आखिरी पखवाड़े से होने वाली गहनों की हकीकत में फिर से घटे जंगलों का उत्साह देखा जा सकता है।
दीपावली से अब तक दम का उद्गम- दीपावली
- 24 अक्टूबर (पुष्य नक्षत्र): सोना 80500, चांदी 98300
- 29 अक्टूबर (धनतेरस): सोना 81000, चांदी 98500
- 6 नवंबर (ट्रम्प की): जीत 80300, सिल्वर 95000
- 12 नवंबर: सोना 77100, चांदी 90200
- 14 नवंबर: सोना 75850, चांदी 88900
- 18 नवंबर (युद्ध तनाव बढ़ा): सोना 76750, चांदी 90100
- 19 नवंबर: सोना 77800, चांदी 92250
- 20 नवंबर: सोना 77700, चांदी 91700
(दाम इंदौर बाज़ार में 24 कैरेट सोना प्रति दस ग्राम और चाँदी चौरसा प्रति किलो)



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