चीतों को जंगल में छोड़ने की छूटें मिल रही हैं। इसके लिए पूरी तरह से कंपनी की योजना तैयार कर ली गई है और तीन साथियों के शेयरधारकों की बैठक भी होने वाली है। वनविद्या विशेषज्ञ के अनुसार एक चीते को करीब 100 वर्गवर्ग क्षेत्र की आवश्यकता होती है।
द्वारा वरुण शर्मा
प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 08:31:29 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: बुध, 20 नवंबर 2024 01:10:45 पूर्वाह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- इस माह रणथंभौर की बैठक तीन राज्यों में अंतिम रूप में आयोजित की गई
- राज्य में असमंजस न रहे इसलिए तैयारी शुरू हो गई है
- विशेषज्ञ का कहना है कि एक घंटे के लिए 100 वर्गवर्ग क्षेत्र की जरूरत है
वरुण शर्मा. नईदुनिया सूची। चीतों को खुले जंगल में छोड़ने के लिए मानक आपरेशन प्रोसीजर (एसओपी) की तैयारी हो चुकी है। इस फर्म को अंतिम रूप देने के लिए मप्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश वन विभाग के अधिकारी नवंबर के अंतिम सप्ताह में रणथंभौर में शामिल होने वाले हैं। यहां चीट्स के एक दूसरे राज्य की सीमा में आने को लेकर सुरक्षा, भोजन और निगरानी, कैसे की जाएगी, इसमें अंतिम रूप दिया जाएगा। किसी भी राज्य को चीटों को लेकर कोई असमंजस नहीं रह रहा है, इसी के लिए कॉमिक्स तैयार हो गई है।
इसपी को एनटीसीए (नेशनल) ने तैयार किया है। इस बैठक में तय हो जाएगा कूनो के बड़े पैमाने पर चीतों को जंगल में निर्वासित किया जाएगा। बता दें कि चीटों को छोड़ने की तैयारी को लेकर सितंबर के अंतिम सप्ताह में कूनो में बैठक का आयोजन किया जा रहा है। बैठक में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 22 वन मंडल शामिल हुए।

विशेषज्ञ विशेषज्ञ के अनुसार एक चीट के लिए करीब 100 वर्गवर्ग क्षेत्र की आवश्यकता होती है। कूनो के जंगल का क्षेत्रफल करीब 1200 वर्गवर्ग है। इसमें 748 वर्गवर्ग मुख्य जोन में और 487 वर्गवर्ग वर्गवर्ग में है। कूनो में शावकों सहित 24 चीटें हैं इस गुहार से कूनो के जंगल क्षेत्र के चीतों के लिए कम ही होगा।
ऐसी होगी फर्म: चीतों को लेकर प्रदेश के वन अधिकारियों ने सुरक्षित फर्मों के माध्यम से आगामी व्यवस्था का निर्णय लिया है, चीता प्रदेश से राजस्थान या यूपी में प्रवेश है तो वहां से संबंधित वन मंडल चीतों की निगरानी, भोजन और प्रोटोकाॅल फालो करेगा। प्रदेश के कूनो के चीते भले ही हों लेकिन दूसरे राज्य के अधिकारी व अमला भी प्रदेश की तरह की चीतों की झलक देखते हैं। ऐसे सिक्के कोपी जॉब में शामिल है।

माह पहले ही चीतों को छोड़ने पर बनी है सहमति
चीतों को छोड़ने के लिए महाराष्ट्र पहले कंसेंट बनल है, इसके लिए केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव का एंट्रेंसल भी मिल गया है। मप्र राज्य चाहता है कि स्थापित की जा रही एजेंसी के तहत ही चिटों को खत्म किया जाए। यही कारण है कि सभी जगह से हरी मण्डली बैठक के बाद भी चीटों को खुले जंगल में नहीं छोड़ा गया है, क्योंकि एक बार चीट को बाहर छोड़ दिया गया और दूसरे राज्य में छोड़ दिया गया बाद में असमंजस की स्थिति नहीं हो गई।
चीतों को खुले में छोड़े जाने को लेकर सभी कलाकृतियां दी जा चुकी हैं, चीतों को खुले में छोड़ने के बाद वे जहां भी जाते हैं उनका पूरा ध्यान रखा जाए, इसके लिए एनटीसीए ने आर्टिफिशल तैयार की है। राज्य के अधिकारी कार्य करेंगे।
डा. गोपाल,सतीमा,चीता स्टालिन समिति



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