भोपाल में नगर निगम के अनाधिकृत परियोजना पर अनैच्छिक, अनैच्छिक मकानों को लेकर हितग्राहियों ने प्रदर्शन किया
2017 में आवास योजना के तहत 12 नंबर बस स्टॉप शुरू होने वाले प्रोजेक्ट में टाटाजी, एलीजी और ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट की लागत 247 करोड़ रुपये है और इसे पूरे दो साल हो गए। लेकिन सात साल बाद भी यह अधूरा है।
द्वारा पंकज श्रीवास्तव
प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 04:11:45 अपराह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 04:11:45 अपराह्न (IST)

पर प्रकाश डाला गया
- हितग्राहियों ने नगर निगम मुख्यालय का संकेत दिया।
- एक हितग्राही निगम निगम के स्टेप्स में ग्रुप रो बनाया गया।
- निगम कर्मचारी के नियुक्ति के बाद शांत हुआ मामला।
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नगर निगम के अन्य प्रोजेक्ट में हो रही देरी से नाराज गंगानगर के हितग्राहियों ने सोमवार को एमएस बीटी निगम कार्यालय का अचानक अंत कर दिया। प्रोजेक्ट और हाउस न मीटिंग की वजह से परेशान लोग साज-सज्जा पर बैठे।
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पोस्ट को भी अपने हाथों में लेकर प्रशासन से अपनी नाराजगी को तुरंत पूरा करने की अपील की। भोपाल में घर का सपना देख रहे हैं हजारों हितग्राही, इस परेशानी से परेशान हैं। हालाँकि, निगम द्वारा बताए गए अवचेतन ने अपने मन में फिर से उम्मीद जगाई है। अब देखिए यह है कि प्रशासन अपने वादे पर कितना खरा उतरता है और प्रॉजेक्ट प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर पाता है या नहीं।
अन्वेषक ने निगम निगम को घेरा
विरोध-प्रदर्शन के दौरान हितग्राहियों ने निगमायुक्त हरेंद्र नारायण और महापौर मालती राय को एनजीओ की मांग पर रोक लगा दी। गुस्साए लोगों ने निगम कर्मचारियों का अपमान कर अपनी सहमति जताई। पुलिस ने भीड़ को रॉकेट की कोशिश की, लेकिन राक्षस अपनी दादी को पूरा करने पर अड़े रहे। प्रदर्शन के दौरान एक हितग्राही कॉर्पोरेशन के कलाकारों ने ग्रुप स्टेप्स में काम किया। वह पुरातात्विक मित्रता से भटक रहा हूं, मुझे मकान दे दो। इस भावनात्मक अपील से स्थिति और गंभीर हो गई। निगमायुक्त ने लोगों को दिया रोजगार। इसके बाद घटना शांत हुई।
हितग्राहियों का दर्द
हितग्राहियों ने निगम पर लगाया वादा खिलाफी का आरोप। एक हितग्राही का कहना था कि उन्होंने छह साल पहले 12 नंबर बस स्टॉप प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था। नगर निगम ने मकान मालिक के पट्टे का वादा किया था, लेकिन अब तक न तो मकान बना है और न ही बिजली या पानी की व्यवस्था की गई है। मेरे वेतन का अधिकांश हिस्सा भाड़ा और लोन की किस्त में चला जाता है।
परियोजना की स्थिति और देरी का कारण
2017 में आवास योजना के तहत 12 नंबर बस स्टॉप शुरू होने वाले प्रोजेक्ट में टाटाजी, एलीजी और ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट की लागत 247 करोड़ रुपये है और इसे पूरे दो साल हो गए। लेकिन सात साल बाद भी यह अधूरा है। निगम के गंगानगर और भानपुर समेत अन्य जिलों में भी ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं, जो देरी का शिकार हैं।
जल्द ही समाधान का लैपटॉप
परफॉर्मेंस के बाद कॉर्पोरेशन के एक्टर हरेंद्र नारायण ने कहा कि सभी प्रोजेक्ट जल्द ही खत्म हो जाएंगे। निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने हितग्राहियों को विश्वास दिलाया कि मकानों का पेज जल्द ही शुरू हो जाएगा।

