पुलिस कंट्रोल रूम में साइबर अपराधी नियंत्रण और उसके हथियारबंद सहयोगियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लाइब्रेरी में साइबर डेस्क बनने के बाद न केवल ऑनलाइन रिजर्व के शिकार लोगों को शिकायत दर्ज करने में मदद मिलेगी, बल्कि क्राइम सेल का भार भी कम होगा।
द्वारा प्रशांत व्यास
प्रकाशित तिथि: शुक्र, 22 नवंबर 2024 02:06:32 अपराह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: शुक्र, 22 नवंबर 2024 02:06:32 अपराह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- हर स्टेशन से दस कर्मचारियों को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।
- एक दिसंबर से सभी दस्तावेज़ों में साइबर डेस्क शुरू होगी।
- पांच लाख रुपये तक की अचल संपत्ति की याचिका में होगी प्रविष्टि।
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी की पुलिस साइबर हमलों को रोकने के लिए लोगों की मदद के लिए उनका शिकार करने के लिए एक और नवीनता ला रही है। अब राजधानी के हर स्टेशन, साइबर में हेल्प डेस्क बनाया जाएगा। एक दिसंबर से सभी लाइब्रेरी में हेल्प डेस्क का संचालन शुरू हो जाएगा। यहां पर पांच लाख रुपये तक के साइबर शेयर धारकों के नाम दर्ज हैं।
इससे फायदा होगा
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि साइबर सेल का भार भी कम होगा। साथ ही जल्द ही याचिका से समर्थकों की संख्या भी बढ़ जाएगी, साइबर पुलिस तत्काल कार्रवाई कर देगी, जिससे समर्थकों की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
लाइब्रेरी की साइबर पत्रिका में साइबर क्राइम की इस चुनौती से पद के लिए शहर के हर स्टेशन से पुलिस अकादमी का अध्ययन किया जा रहा है। पुलिस कंट्रोल रूम में गुरुवार से छह दिव्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत अपराधियों से जुड़ी साइबर अपराधियों की जानकारी दी जा रही है।
साइबर विशेषज्ञ अधिकारी दे रहे प्रशिक्षण
यूट्यूब क्राइम अखिल पटेल ने बताया कि डेस्क साइबर ऑपरेशन के लिए तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता है। प्रदेश के 20 साइबर विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी प्रशिक्षण में शामिल किया जा रहा है। जिसमें सिपाहियों को नेशनल पोर्टल एनसीसी अप्रैल, एमटी एमएस एवं सीएआईआर पर अध्ययन के बारे में डेटा अपलोड किया जा रहा है। साथ ही मशाल कंपनी और अन्य तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रम प्रशिक्षण निरंतरता जारी रखें।
बड़ा मामला स्टेट साइबर पुलिस ही सपोर्टेगी
साइबर अपराध को रोकने और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले यह किया जा रहा है कि अब तक 5 लाख रुपये तक ऑनलाइन गरीबों की याचिका दाखिल की जाएगी। हालाँकि पांच लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की जांच राज्य साइबर पुलिस ही करेगी। यानी बड़े साइबर गिरोह के शिकार लोगों को भदभदा स्थित राज्य पुलिस कार्यालय में ही शिकायत दर्ज करानी होगी।



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