प्रदेश की पहली ब्लड इरिडिएटर मशीन इंदौर साइडर, के लिए एअरबी से लाइसेंस मिला

प्रदेश की पहली ब्लड इरिडिएटर मशीन इंदौर साइडर, के लिए एअरबी से लाइसेंस मिला

टीलेडी बेज़ के आने के बाद गंभीर कैंसर और बोनमैरो के मरीज़ को सुविधा मिले। अभी कोबाल्ट से प्रक्रिया करने में एक घंटे तक का समय लगता है। जल्द ही और सुरक्षित इलाज होने के लिए कई वर्षों से मरीज इस मशीन के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।

द्वारा शशांक शेखर बाजपेयी

द्वारा संपादित: शशांक शेखर बाजपेयी

प्रकाशित तिथि: गुरु, 21 नवंबर 2024 02:24:03 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: गुरु, 21 नवंबर 2024 02:24:03 अपराह्न (IST)

पर प्रकाश डाला गया

  1. कैंसर और बोनमैरो की बीमारी को जल्द ही मिलने की सुविधा।
  2. ब्लड में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक कण्ट्रोल को नष्ट करने की मशीन।
  3. इस मशीन की शुरुआत 15 मिनट में पूरी हो जाएगी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, प्रतिनिधि। एमवाय अस्पताल में भाभा एटॉमिक रिसर्च मुंबई द्वारा तैयार की गई प्रदेश की पहली ब्लड इरेडिएटर मशीन आई है। एटोमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एटोमिक एनर्जी रेग्युलेटरी बोर्ड) के लिए एडवर्टाइज़मेंट का लाइसेंस मिल गया है।

अब नींद को जल्द ही मिलेगी इसकी सुविधा। मशीन टी को संचालित करने के लिए कर्मचारियों को एल्डी (थर्मोल्यूमिनसेंट डोसीमीटर) का उपयोग किया जाता है। इसके लिए भी ऑर्डर करें, यह रायपुर से आएगा।

कैंसर और बोनमेरो के कैंसर के दौरान ब्लड चडने का खतरा रहता है। इरेडीएटर मशीन से ग्रैफ्ट वर्सेज होस्ट डिसीज यानी रक्त में मौजूद नकारात्मक कणिकाएं नष्ट हो जाती हैं। इस संक्रमण का ख़तरा दूर हो जाता है।

अभी यह प्रक्रिया कैंसर अस्पताल में कोबाल्ट मशीन से की जा रही है, जिसमें मरीज के स्वजन को घंटों इंतजार करना पड़ता है। मगर, इस मशीन के शुरू होने से अब तक घंटों का काम मिनटों में हो गया है। यह ब्लड इरेडीएटर मशीन का BI-2000 मैडल है। इसकी कीमत 45 लाख रुपये है।

ऐसा होता है टीलेडी बेज़

विशेषज्ञ के अनुसार, जो भी रेड एजुकेशन क्षेत्र में काम करता है, अगर उसे रेड एजुकेशन का एक्सपोजर मिला हो, तो तुरंत पता नहीं चलता। इसलिए बेज लेबल होता है, बेज को हर तीन माह की लैब में भेजा जाता है, जिससे पता चलता है कि किस तरह का रेड लेबल लगा है।

बता दें कि यह मशीन भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर मुंबई द्वारा तैयार की जा रही है। यह मशीन ब्लड में पाए जाने वाले वेटलिफ्ट वर्सेस होस्ट डिसीज को नष्ट कर देती है, ताकि किसी भी प्रकार के रिएक्शन का खतरा न रहे।

इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कि बोन मैरो, कैंसर, थैलेसिमिया की बीमारी को जब ब्लड की जरूरत होती है, तो पहले ब्लड से ब्लड वर्सेज़ होस्ट डिजीज को नष्ट करना होता है।

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प्रधान सचिव पद पर नियुक्ति को मिलेगा फायदा

बताएं कि एमवाय अस्पताल में प्रभारी के मरीज के इलाज के लिए आएं। यहां कैंसर, बोनमैरो, थैलेसीमिया के मरीजों को ब्लड इरेडीएटर मशीन की सुविधा मिलती है। कैंसर अस्पताल में रोजाना कई मरीजों को खून की जरूरत होती है।

ऐसे में अब उन्हें ब्लड मीटिंग के बाद ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि ब्लड से ब्लड से ब्लड भी जल्दी खराब हो जाता है। साथ ही एमजीएम कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी, एमआईएच, चाचा नेहरू अस्पताल, मनोरमा टीबी अस्पताल में मरीज़ की रक्त की आवश्यकता को एमवाय ब्लड बैंक पूरी तरह से प्रदान करता है। ऐसे में इस मशीन के आ जाने से यहां भर्ती किसानों को भी फायदा होगा।

ऐसा काम करता है मशीन

कारखानेदार ऐसी विचित्रताएं हैं, जो हमारे शरीर में होती हैं और हमें स्थिरता से बचने में मदद करती हैं और ये ग्राफ्ट को ठीक करती हैं। उन सेल को यह मशीन नष्ट करके बेच दी जाती है, जिससे ग्राफ्ट की उत्पादकता बढ़ जाती है।

होस्ट आइजी जिसे ब्लड या ब्लड का उत्पाद माना जाता है और ग्राफ्ट आइजी जिसे दिया जाता है। रक्त और रक्त के उत्पादों में एक-दूसरे के संबंध में जानकारी दी गई है। इस कारण जो बोनमैरो को नुकसान पहुंचाता है, उसे बचाया जा सकता है।