पीएम आवास योजना की पहली किस्त पाने भटक रहे हितग्राही, 84 वर्षीय बुजुर्ग को गोद में उठा लाया बेटा

ग्रामीण हितग्राहियों को पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत (PMAY-G) आवास दिया जाना है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण बेघर नागरिकों को पक्का मकान प्रदान करना है। ऐसे में जनपद व ग्राम पंचायतों के द्वारा यह कार्य किया जा रहा। कच्चे मकानों में रहने वाले या बिना छत वाले परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें पहली किस्त पाने भटक रहे हितग्राही।

By Manoj Kumar Tiwari

Publish Date: Wed, 20 Nov 2024 09:03:25 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 20 Nov 2024 09:03:25 AM (IST)

जनपद पंचायत मस्तूरी पहुंची महिला हितग्राही कमला बाई

HighLights

  1. हितग्राहियों का कहना महीनों से काट रहे चक्कर।
  2. बुजुर्ग हितग्राही को बेटा गोद मेंं उठा लाया जनपद।
  3. हितग्राहियों सभी नियमों की जानकारी भी नहीं क्या करें।

नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। पीएम आवास योजना में नाम आने के बाद भी हितग्राहियों को पहली किस्त पाने के लिए जनपद व ग्राम पंचायतों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। महिला हितग्राही के बेटे का कहना है कि वह अपनी मां को लेकर महिनों से बैंक व जनपद के चक्कर लगा रहा है।

बावजूद इसके अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। वही कई हितग्राही ऐसे है जो किस्त को लेकर जनपद का चक्कर काट रहे है। मस्तूरी जनपद पंचायत पर पीएम आवास की पहली किस्त पाने के लिए पहुंची 84 वर्षीय कमला बाई तिवारी को उनका बेटा धमेंद्र तिवारी अपनी गोद में बैठा कर जनपद पंचायत पहुंचा।

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हितग्राही का कहना है

उनको पीएम आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हो चुका है लेकिन मकान बनाने के लिए अब तक खाते में रुपए नहीं आए है।

ग्राम पंचायत में ग्राम सहायिका जनपद पंचायत से लिखवा कर लाओ तब रूपए दूंगी कह कर चलता कर देती है, जनपद आने पर अधिकारी कल आना परसो आना कह कर लगातार भटका रहे है।

बहुत से हितग्राही काट रहे चक्कर

कमला बाई ही सिर्फ प्रार्थी नहीं है जो अधिकारियों के चक्कर काट रही है। मंगलवार को ग्राम दर्राभाठा से 15 किलोमीटर साइकिल चलाकर जोगी राम और ग्राम बूढ़ीखार से रामकुमार सहित अन्य हितग्राही भी अधूरे मकानों की किस्त पाने के लिए जनपद पंचायत मस्तूरी के चक्कर काटनेे को मजबूर है।

हितग्राहियों के लिए यह भी समस्याा

हितग्राहियों का कहना है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति तो कभी कर्मचारियों की उदासीनता के चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। कार्यालय का कामकाज पूरी तरह कंप्यूटर आपरेटर और दलालों के भरोसे चल रहा है, जिससे हितग्राहियों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

केवाईसी का खाते में अपडेट न होना एक कारण

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अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश हितग्राहियों की परेशानी का कारण उनका अकाउंट नम्बर उनके आधार से लिंक नहीं है। तो कई हितग्राही ऐसे है जिनकी केवाईसी अपडेट न होने की वजह खाते में रुपए जाने की प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। ऐसे हितग्राहियों की केवाईसी अपडेट कर जल्द ही किस्त जारी करने का निर्देश जारी करने का हवाला दिया जा रहा है।

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