सबसे बड़ी परेशानी मोतियाबिंद के प्रेमी को होती है। विशेष रूप से गरीब तबके के गरीबों को, क्योंकि आयुष्मान कार्ड से भी मोतियाबिंद आपरेशन केवल सरकारी अस्पताल में होते हैं। निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से मोतियाबिंद आपरेशन को हटा दिया गया है। ऐसे सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराधान है तो बिलासपुर-रायपुर में जाकर या फिर निजी तौर पर गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया जाएगा।
द्वारा कोमल शुक्ला
प्रकाशित तिथि: शनिवार, 23 नवंबर 2024 12:09:45 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: शनिवार, 23 नवंबर 2024 12:09:45 पूर्वाह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- मोतियाबिंद आपरेशन के लिए निजी शेयरधारकों का सहारा
- डॉक्टरों की कमी से आंखों से संबंधित बीमारी का इलाज नहीं
- हॉस्पिटल केनेत्र रोग विभाग में एक बार फिर से अँधेरा छा गया है
नईदुनिया न्यूज, जांजगीर-चांपा : जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में अब विजन जांच और चश्मा नंबर जांच बस हो रही है। आपरेशन और आंखों से संबंधित बीमारी होने पर पीड़ित को मजबूर होना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन के सामने भी बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। ऐसे में डॉक्टर से न देखें आंखों से जुड़ी बीमारी और मोतियाबिंद के लिए आप प्राइवेट पर्सनलाइजेशन का सहारा लेना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के उत्सव रोग विभाग में एक बार फिर से अँधेरा छाया हुआ है। नेत्र विभाग डा. निशांत पटेल के बाद अब दो साल की बैंड अवधि में डीए। निकिता खेस की भी सेवा अवधि पूरी हो गई। उनके जाने के बाद जिला अस्पताल के आई वार्ड के सर्जन विकसन हो गए और उनकी आंखों से संबंधित बीमारी के इलाज पर ब्रेक लग गया। हालाँकि डॉ. निकिता खेस को यहां स्थायी रूप से वापस आम अस्पताल ने जिला प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को भी भेजा है। परन्तु अब यह शासन के हाथ में है कि उनका उपदेश यहां है या नहीं।
क्योंकि इससे पहले जिला अस्पताल में उत्सव के पदाधिकारी डा. निशात पटेल भी दो साल के बैंड में यहां आई थीं, जो कि प्रोफार्मा सेवा अवधि में पूरी होने वाली थीं। लेकिन वापसी नहीं हुई. ऐसे में जब तक उत्सव उत्सव नहीं आएगा तब तक जिला अस्पताल के दर्शन विभाग से अंधेरा दूर नहीं होगा।
जो खोजे के लिए बड़ी परेशानी की बात है। हालाँकि बी.डी.एम. चांपा में मोतियाबिंद में आपको व्यापार की सुविधा तो है लेकिन आपको बड़ी राहत नहीं मिलती। क्योंकि वहां सप्ताह में एक दिन गुरुवार को आप ऑपरेशन हो रहे हैं। इसमें डॉक्टर कोरबा से भी शामिल हैं। रविवार को डुप्लिकेट में जांच कर भर्ती की भर्ती होती है और दूसरे दिन आपरेशन होता है। बाकी दिन यहां भी आंखों से जुड़ी समस्या की जांच नहीं होती। ऐसे में जिले के अस्पतालों में भी बी बिजनेस और वहां पर दबाव का अभाव है। जब तक जिला अस्पताल में उत्सव में शामिल नहीं हो जाते, तब तक राहत मिलती रहती है।
नेत्र विभाग डॉ. निकिता खेस की यहां पद स्थापना के लिए माध्यम से शासन को पदस्थापित किया गया है। यदि भिन्नता है तो यहां उत्सव उत्सव सहभागी मिल जाएंगे। मोतियाबिंद के आप ऑपरेशन की सुविधा बी.डी.एम. चांपा में भी है। सप्ताह में एक दिन आपके यहां काम होने से इतनी परेशानी होगी।
डा. एके जगत
सिविल संस्था
आपरेशन केस पर एक नजर
महा आपरेशन ऑपरेटर
19 फरवरी 617
29 मार्च 486
अप्रैल 50 538
मई 56 535
जून 34 522
जुलाई 61 566
18 अगस्त 475
10 सितम्बर 470
अक्टूबर 43 558



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