सरकार कोर्स अक्रिय अस्पताल में 390 तरह की सलाह उपल पर दावा किया जाता है। लेकिन शहर के दो अस्पतालों में एक हजार बिस्टर अस्पताल और मुरार अस्पताल में मरीज को भर्ती नहीं मिल रही है। जो भी अप्लाई किया गया है, उस पर दवा काउंटर पर बैठे स्टाफ़ का गोला नहीं रखा जा रहा है।
द्वारा -अनूप भार्गव
प्रकाशित तिथि: शुक्र, 22 नवंबर 2024 10:47:06 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: शुक्र, 22 नवंबर 2024 10:47:06 पूर्वाह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- एचएच में 390 प्रकार की जे.ई. का दावा है, लेकिन डायरी को नहीं मिला
- काउंटर पर कर्मचारी बाजार से लेने के लिए रखा रहे पर गोला
- मुरार जिला अस्पताल में बजट के अभाव में मरीजों का टोटा, मरीज हो रहे परेशान
अन्य. अन्य। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जेएच में भले ही 390 तरह की दवा उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन दवा की दुकान पर लिखी दवा पर पूरी दवा नहीं मिल पा रही है। यहां जिला अस्पताल मुरार क्षेत्र में औषधियों की कमी है।
इस कारण डॉक्टरी परामर्शदाता को तीन दिन की सलाह लिखी जा रही है, जबकि इस बार वायरल बुखार के साथ चिकनगुनिया ठीक होने में दो से तीन माह लग रहे हैं। इससे थोक बाजार से थोक व्यापारी खरीदनी पड़ रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी एक हजारी अस्पताल की नाव में आने वाले को हो रही है। उन्हें बाहर से कई दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जबकि जेएच में अन्य जिलों के अलावा अन्य उपचारों से भी रोगी इलाज के लिए आते हैं।

जेईएच प्रबंधन ने ड्रग स्टोर पर दवाओं की जो सूची दी है, उनमें से चार्म, बीपी, विटामिन, सिनोजेनिक एसोसिएटेड दवाएं नहीं हैं। मजबूरी में खरीददारी को व्यवसायिक बाजार से खरीददारी पड़ रही हैं। डॉक्टर मरीज़ के इलाज के लिए पांच से छह प्रकार की उपचार पद्धतियां हैं। लंबी-लंबी वैगन में लीज के बाद काउंटर से गिनती को तीन-चार दवा थमा दी जाती है।
इसके पीछे एक कारण यह भी है कि मरीज़ को कई बार इलाज के लिए ऐसी दवाएँ लिखनी होती हैं, जो दवा स्टोर की सूची में शामिल नहीं होती हैं। इसके पीछे का कारण बाजार में उन्नति उपलब्ध होना बताया जा रहा है, जो जल्दी असर करता है।
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सीएम इंजेक्शन दवा दुकान से लेना पड़ रही दवा
जिले के अस्पताल के लिए सिविल सर्जन कार्यालय को सीएम अछूत कार्यालय के औषधि भंडार से दवा लेने के पद मिल रहे हैं। ऐसे में जैसे-तैसे दवाओं का स्टॉक पूरा किया जा रहा है, लेकिन गरीबों को दी जाने वाली दवाओं में स्टॉक्स की जा रही है। हाल ही में फार्मासिस्ट ऑफिस के ड्रग स्टोर से करीब 24 तरह की दवाओं की मांग की गई है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लंबे समय से बजट की कमी है, इस कारण से दवाओं की कमी हो गई है। इसके पीछे एक कारण अस्पताल का विस्तार होने के बाद 200 पलंग के खाते से भी बजट तय होना है।
ये बोले मरीज…
दो उपाय ही दिए
एक हजार अस्पताल के दवा काउंटर पर लाइन में लीज के बाद दवा वितरण विंडो तक। यहां मुझे दो सलाह दी गई, जबकि साये पर तीन लिखीं थीं। कर्मचारी ने एक दवा बाहर से लेने की बात कहकर लाल गोला दिया।
-नीतू कुशवाह, रोगी।
एक दवा नहीं मिली
चर्म रोग विभाग में चिकित्सक को सोहा पर लिखी दवा लेने की दवा काउंटर पर पहुंचाएं। यहां लाइन में लगकर काफी देर बाद विंडो पर पहुंच तो स्टाफ ने दो यात्राएं एक बाहर से लेने को कहा।
-इकबाल खान, रोगी।
डॉक्टर ने पांच प्रकार की दवा लिखीं
ई एन.टी. विभाग में डॉक्टर ने सोहा पर पांच प्रकार की किताबें लिखी थीं। काउंटर पर चार प्रकार की दवा विक्रेता से एक दवा लेने के बारे में बताया गया है। उस पर स्टाफ ने निशान लगाया।
-आकाश परिहार, मरीज।
दवाइयों की कोई कमी नहीं है। काउंटर से पूरी साहायता रोगी को क्यों नहीं दी जा रही, इसकी जानकारी ली जाएगी। किसी भी स्थिति में चिंता नहीं होने दी जाएगी।
-डा. अवेसिन्सा, कैप्टन, जेईएच।
तीन दिन की सुपरमार्केट में दवाओं का जमावड़ा कहा जाता है। बजट की मांग के लिए दवाओं के पर्याप्त स्टॉक।
-डा. आलोक पुरोहित, प्रभारी, सिविल इंजीनियर।



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