एलएनआईपीई ग्वालियर: 14 साल में नहीं बना कोई नया हास्टल, शिक्षक भी कम, कैसे दें 200 छात्रों को प्रवेश

एलएनआईपीई ग्वालियर: 14 साल में नहीं बना कोई नया हास्टल, शिक्षक भी कम, कैसे दें 200 छात्रों को प्रवेश

वाट्सएप के लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय खेल एवं शिक्षण संस्थान में हो सकता है आर्टाल के साथ साइंटिफिक की भी कमी। ऐसे में यहां पर केवल सौ छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है। जबकि इस संस्थान में प्रवेश के लिए छात्र परेशान रहते हैं।

द्वारा विकाश पांडे

प्रकाशित तिथि: शुक्र, 22 नवंबर 2024 11:53:45 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: शुक्र, 22 नवंबर 2024 11:53:45 पूर्वाह्न (IST)

लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय खेल एवं शिक्षण संस्थान सिटिजनवालियर

पर प्रकाश डाला गया

  1. एक हास्टल बनाया गया, लेकिन वह एक्सीलेंस के लिए केंद्र से बाहर था
  2. एलएनआईपी में 100 प्रवेश द्वार पर ही छात्रों को प्रवेश की जानकारी दी गई है
  3. एलएनआईपी में छात्रों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है

नईदुनिया प्रतिनिधि, स्थान। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय खेल एवं शिक्षण संस्थान में बैचलर ऑफ चिली एज्यूकेशन में 200 सीटें हैं, लेकिन कभी भी आटा पूरा नहीं भर पाता है। अमूमन 100 में केवल छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है, क्योंकि संस्थान में केवल छात्रों को ही प्रवेश के लिए व्यवस्था आवास व्यवस्था और टीचिंग स्टाफ की भी अनुमति नहीं है।

वर्तमान में जो हास्टल हैं, सभी फुल हैं। 2010-11 के बाद विद्यार्थियों के लिए कोई नया हास्टल नहीं बना, जबकि वंचित विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। हाल ही में कोल इंडिया लिमिटेड से मिले ग्रांट से हास्टल तैयार भी हुआ, लेकिन वह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए हैं। इसका उपयोग एलएनआईपीई के छात्र नहीं कर सकते।

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इससे जो छात्र एलएनआईपीई में प्रवेश लेते हैं उनके लिए भारी संकट उत्पन्न हो जाता है, निराशा होती है। परिसर में 12 हास्टल हैं, जिनमें आठ ब्वॉयज और चार लड़कियां शामिल हैं। इसमें भी एक हास्टल प्लाजा के लिए प्रवेश लेने वाले छात्र या सहायक के लिए नियुक्ति पर असेंबल के लिए रहते हैं, जबकि दो हास्टल प्लाजा और सहायक इन स्पोर्ट्स कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए रहते हैं।

इस प्रकार छात्रों के लिए कुल नौ हास्टल हैं। इसमें करीब एक हजार छात्र रहते हैं। आवास के साथ ही मानक के अनुसार 25 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। इस कारण से भी अधिकतर 100 पद पर ही विद्यार्थियों को प्रवेश मिलता है।

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11 करोड़ रुपये किराये के मिले

  • सात हास्टल करीब 1960 के आसपास बने हैं, जबकि पांच का निर्माण 2010-11 में हुआ था। अब इन हास्टलों के मेंटेनेंस की जरूरत है। मुश्किल यह है कि सभी हास्टल फुल थे और समर वैकेशन के स्थान पर माह मेंटेनेंस पूरा होना मुश्किल था। इस कारण सेटेनेंस में भी परेशानियां आती थीं।
  • इस बार मेंटेनेंस के लिए 11 करोड़ की राशि बदली गई है। संस्थान की योजना है कि सेंटल ऑफ एक्सिलेंस के लिए बनाए गए हास्टल में एक हास्टल के छात्रों को शिफ्ट किया जाएगा। जब टेनेंस पूरा हो जाएगा तो छात्रों को वापस अपने हास्टल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इसी प्रकार के सभी हास्टल का मेंटेनेंस की रचनाएँ की गई हैं।

विशेष कोर्स के लिए

संस्थान में डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स कोचिंग का सैमी कोर्स भी शुरू किया गया है। इसमें प्रिंसीपल, सेना के ऐसे पार्टिकल्स को प्रवेश दिया जाता है जो प्रॉडक्ट गेम में प्रतिभागिता रही हैं। इस कोर्स को करने के बाद रिटायर होने के बाद भी वह कहीं भी आराम करके कोच की नौकरी कर सकता है। वर्तमान में इसमें 60 सीटें हैं, जिसमें 40 छात्रों ने प्रवेश लिया है।

छात्रों के लिए आवास व्यवस्था के लिए हमारे पास 200 प्री-कम प्रिवेंशन के खाते में प्रवेश नहीं हो रहा है।

-इंदु बोरा, प्रभारी संरक्षक, एलएनआईपीई।