भिंड की ट्रायल कोर्ट में चल रहे एक मामले की क्रिमिनल अपील में हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरी यूनिट को मोहम्मद ने हाईजैक कर लिया है। इसलिए इस मामले की पूरी जानकारी रिपोर्ट एक महीने में भिंड के जिला एवं सत्र सत्र में उनके सामने पेश होंगे।
द्वारा विक्रम सिंह तोमर
प्रकाशित तिथि: शुक्र, 22 नवंबर 2024 09:38:26 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: शुक्र, 22 नवंबर 2024 09:38:26 पूर्वाह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- ट्रायल कोर्ट के जज का पक्ष लेकर एक माह की रिपोर्ट पेश करेंगे भिंड डीजे
- हाई कोर्ट ने फाइनल कोर्ट के बाबू या मोहर्रिर की जांच करने का भी आदेश दिया है
- ट्रायल में हो रही देरी को लेकर आरोप पत्र दाखिल किया गया था
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने हिंद की ट्रायल कोर्ट की एक आपराधिक अपील में सवालिया निशान लगाते हुए चिंता जताई है।
हाई कोर्ट ने भिंड के जिला एवं सत्रह न्यायाधीश को मामले की जांच करने और ट्रायल कोर्ट के जज का पक्ष लेकर एक माह में पेश करने की बात कही है। इसके साथ ही उस ट्रायल कोर्ट के बाबू या मोहर्रिर की जांच करने का भी आदेश दिया गया है।
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कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोहर्रिर ने कहा है कि केस में सम्मन जारी नहीं किया जा सकता है, ऐसी कार्रवाई का विवरण नहीं दिया जा सकता है। हाई कोर्ट में रजिस्ट्रार क्रिमिनल अपील में चल रही सुनवाई के दौरान दो गवाहों के समन से जुड़ी कुछ बातें सामने आईं।
जहां क्रेटेशियस मामले में अजय कुमार निरंकारी ने कोर्ट का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि उक्त कथन में समन भेजे जाने की कोई भी जानकारी नहीं है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं है कि गवाहों को समान मिले थे या नहीं। यदि गवाह उपस्थित नहीं हुए तो इस पर पूर्व कार्रवाई क्या की गई, यह भी नहीं बताया गया है।
मामला ऐसे
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वास्तविक, उच्च न्यायालय में हत्या के चौथे अपराधी की याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय में हत्याकांड के चौथे अपराधी ने तर्क-वितर्क अपना रखा। उन्होंने कहा कि आरोपी चार साल से जेल में है, इस मामले की सुनवाई में अब तक कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
ट्रायल कोर्ट की ओर से कोर्ट की ओर से पैरवी करने वाले ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की ओर से अनमोल की मुहर जारी करने वाले को देखकर ऐसा लग रहा है कि कोर्ट की ओर से कोर्ट की ओर से पैरवी करने वाले ही नहीं जा रहे हैं।
इस मामले में 30 जनवरी को समन भेजकर दो गवाहों को बुलाया गया था, लेकिन अगली तारीख आठ फरवरी को वह नहीं आई, साथ ही यह भी संकेत नहीं दिया गया कि गवाहों का समन मिला या नहीं। इसके बाद मामले की आठ सुनवायियों में भी यही स्थिति रही। इन तथ्यों को देखकर हाई कोर्ट ने हिंद के आमादा से जजशन को निर्देश दिए, एक माह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए।



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