किसानों को धान केन्द्र में किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं हो इसके लिए विशेष रूप से तैयार किये गये हैं। इस साल छोटे किसानों को धान बेचने के लिए केवल दो टोकन बताएं। वहीं बड़े किसानों को तीन निर्देश दिए गए। किसानों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि टोकन केवल एक सप्ताह के लिए ही वैध होगा।
द्वारा कोमल शुक्ला
प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 11:58:18 अपराह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 11:58:18 अपराह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- पांच दिन बाद भी 122 मूर्ति में बोहनी नहीं
- अब तक केवल सात में 360 की संख्या
- यूनिट में कर्मचारी कर रहे किसानों का इंतजार
नईदुनिया प्रतिनिधि, जांजगीर-चांपा : जिले में समर्थन मूल्य में धान की शुरुआत 14 नवंबर से हो गई है, लेकिन पांच दिन बाद भी सागर सात समुच्चय में 360 की लोकप्रियता हो पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि किसानों को धान बेचने के लिए एक सप्ताह बाद बिजली मिल रही है।
ऐसे में चाहकर भी किसान धान धान खरीदी के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं किसानों के आने का कारण यह भी है कि एक किसान के घर में भी ताला लगा हुआ है। सरकार के धान योजना के लिए बनाए गए नियमों से किसानों और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। जिले में 101 समितियों के द्वारा 129 योजनाओं के माध्यम से समर्थन मूल्य में धान की समस्या की जा रही है।
जिले में इस वर्ष धान की बिक्री के लिए एक लाख 26 हजार 918 किसानों ने पंजीयन कराया है। वहीं राज्य सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के कारण भी हर साल जिले में किसानों की संख्या आधी जा रही है। शासन द्वारा इस बार समर्थित मूल्य पर धान समतुल्य 14 नवंबर से शुरू किया गया है। मगर धान योजना के लिए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से किसानों और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है।
ऑर्थोडॉक्स और ऑफलाइन दोनों माध्यम से टोकन कटाने पर किसानों को धान बेचने के लिए एक सप्ताह बाद का समय मिल रहा है। इसका सारा धान असंबद्ध के पांच दिन बाद शुरू हुआ, 122 दिनों में भी दूसरा नाम सामने आया। टोकन कटाने के बाद भी किसान चाहने वाले भी धान लेकर समिति में नहीं जा पा रहे हैं।
पहले किसान समिति में ऑफलाइन टोकन काटे थे तब उन्हें एक दो दिन बाद मिल गया था तब किसान आसानी से धान बेच बैठे थे। इसी तरह के टोकन एप के माध्यम से कोलोराडो टेकन कटाने पर भी वे निर्धारित तिथि में धान लेकर समिति की रजिस्ट्री थे। मैग्रीज और ऑफलाइन दोनों माध्यमों ने किसानों की परेशानी को कम करने के बजाय बढ़ाया है।
धान फैक्ट्री पर लगता है गड़बड़ी का आरोप
समिति के प्रोफेसर का कहना है कि मंडी से आने तक धान में करीब 17 प्रतिशत का सुख होता है। ऐसे में अगर किसान फार्मूला युक्त धान बेचने के लिए लाते हैं तो इसमें करीब एक फायदा शामिल है। एक प्रतिशत सुखत का मतलब होता है कि करीब साढे सात सौ ग्राम धान कम हो जाता है। धान समस्या में सुखत की स्थिति में कई बार गड़बड़ी करने के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में किसानों से केवल खरीदा हुआ धान ही लेगा।
धान में अनेक मण्डलियाँ
कंसल्टेंट प्राइवेट मंच के सह-लेखक संदीप तिवारी का कहना है कि कंपनी और ऑफलाइन दोनों माध्यम से टोकन कटाने पर किसानों को धान बेचने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है। ऐसे में किसान जो अपना प्लांटेशन बनाए रखते हैं उन्हें एक हफ्ते से एक दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
जबकि यूनिट में कर्मचारी कर्मचारी इंतजार करते हुए खाली बैठे हुए हैं। जिन किसानों की फ़सल कटकर तैयार हो गई है। उसकी डिलीवरी होनी चाहिए। धान के मिश्रण को लेकर इस बार कई तरह की व्यवस्थाएं आ रही हैं। सभी समस्याओं को लेकर शीघ्र ही शांतिपूर्ण निजी मंच के द्वारा शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट फर्म पर ध्यान दिया जाएगा और किसानों की मांग की जाएगी।
ऑर्थोडॉक्स और ऑफलाइन दोनों माध्यम से टोकन कटाने पर किसानों को धान बेचने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है। शासन स्तर पर ही यह व्यवस्था बनाई गई है। अब तक सात केंद्रो में 360 पारंपरिक धान की खेती शुरू की गई है। अगले सप्ताह धान में तेजी आएगी। क्योंकि अब तक 80 उर्पाजन आवेदन में धान की सप्लाई के लिए किसानों ने ऑफिस और ऑफलाइन माध्यम से टोकन कटा लिया है।
अमित साहूकार
रिज़र्व अधिकारी, जिला सहयोगी बैंक जांजगीर चांपा





