आबोहवा रहे स्वच्छ, इसलिए इस बार भोपाल शहर में ठंड से बचाव के लिए नहीं जलेंगे अलाव

नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि बेवजह ठंड में बाहर नहीं रहें। बेघर, निराश्रित लोगों के लिए रैन बसेरों में पर्याप्त कमरे और गर्म रजाई-गद्दे हैं। वह आराम से वहां सोएं।

By Ravindra Soni

Publish Date: Sat, 23 Nov 2024 03:48:20 PM (IST)

Up to date Date: Sat, 23 Nov 2024 03:48:20 PM (IST)

ठंड से बचने अलावा का सहारा (प्रतीकात्मक चित्र)

HighLights

  1. करीब 500 स्थानों पर जलाए थे अलाव।
  2. नगर निगम मुहैया कराता था लकड़ियां।
  3. रैन बसेरों में की जा रही हैं व्यवस्थाएं।

पंकज श्रीवास्तव, नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इस बार शहर में अलाव नहीं जलाए जाएंगे । नगर निगम प्रशासन ने यह निर्णय पहली बार लिया है ताकि वायु प्रदूषण का स्तर कम किया जाए सके। लिहाजा शहर के वह 500 स्थान जहां पर हर साल कड़ाके की ठंड पड़ते ही अलाव जलाए जाते थे, वहां इस बार अलाव नहीं जलाए जाएंगे।

नगर निगम की इस पहल से यकीनन वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी, लेकिन अहम बात यह है कि जो लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते थे। वह किस तरह इस कड़ाके की ठंड से अपना अब बचाव करेंगे।

लोगों से अपील

इसको लेकर भी निगम ने नागरिकों से अपील की है कि बेवजह ठंडे में बाहर नहीं रहें। रैन बसेरों में पर्याप्त कमरे और गर्म रजाई-गद्दे हैं। वह आराम से वहां सोए। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के संग सिर्फ एक अटेंडर परिसर में रुके। बाकी के लोग अपने घरों में रहें। प्राइवेट कॉलोनियों में जो लोग अलाव जलाते रहे हैं, वे हीटर का उपयोग करें। ताकि लोग ठंडे से भी बचे रहें और शहर की हवा भी स्वच्छ हो सके।

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अलाव के लिए नहीं किए आदेश जारी

शहर में अलाव जलाने के लिए नगर निगम द्वारा कड़ाके की ठंड पड़ते ही अलाव के लिए लकड़ियां मुहैया करवाने के आदेश जारी किए जाते थे, लेकिन इस बार निगमायुक्त ने ऐसा कोई आदेश नहीं जारी किया। अलाव जलाने के लिए निगम के स्टोर से लकड़ियां मुहैया करवाई जाती थीं। इन लकड़ियों को निगम के वाहनों से सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचाया जाता था। जिसमें डीजल खर्च के अलावा निगम को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता था, लेकिन इस बार अलाव नहीं जलाए जाएंगे। लिहाजा लाखों रुपये के डीजल खर्च की बचत भी होगी।

इसलिए लिया निर्णय

शहर की हवा की सेहत को सुधारने के लिए निगम प्रशासन ने यह निर्णय लिया है, क्योंकि तमाम प्रयास के बाद भी शहर में बढ़ता वायु प्रदूषण कम नहीं हो रहा। शुक्रवार को भी शहर का एक्यूआई 300 पार हो गया था। शाम सात बजे पर्यावरण परिसर क्षेत्र में एक्यूआई 305, टीटी नगर में 285 और कलेक्ट्रेट में 236 दर्ज किया गया थे। शहर की हवा में अभी भी पीएम 2.5 धूल कण अधिक मात्रा में है, जो कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को बीमार करने के लिए काफी है। इस हवा में सांस लेना बीमारियों को न्योता देने के बराबर है।

सर्दी ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड

हालांकि राजधानी में कड़ाके की ठंड पड़ना शुरू हो चुकी है। भोपाल में सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। नवंबर में सबसे ठंडी शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात रही, जब पारा लुढ़ककर 8.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भोपाल में न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया था। इससे पता चलता है कि सर्दी लगातार जोर पकड़ रही है।

नागरिकों की यह राय

अलाव को जलाने से वायु प्रदूषण ही होता है। निगम की यह एक अच्छी पहल है। इससे वायु प्रदूषण स्तर कम होगा।

– अशोक शर्मा, एडवोकेट

शहर की हवा की सेहत को सुधारने की हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यह निगम प्रशासन अच्छी पहल है।

– भगवानदास ढालिया, समाजसेवी

नगर निगम को कमजोर वर्ग के नागरिकों को अस्थाई रैन बसेरा का इंतजाम करना चाहिए, जहां लोग जहां इस ठंड से बच सकें।

– हरिओम खटीक, व्यवसायी

यह बोलीं महापौर

शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए इस बार अलाव नहीं जलाने का निर्णय लिया है। रैन बसेरा में पर्याप्त जगह है। नागरिक वहां जाएं। वहां गर्म रजाई-गद्दे हैं, वहां सोए। जरूरत पड़ेगी तो अस्थायी रैन बसेरा बनाकर लोगों को ठंड से बचाया जाएगा।

– मालती राय, महापौर, भोपाल