Gwalior air pollution: इंडस्ट्री है नहीं, वाहन भी कम, फिर भी डीडी नगर की हवा सबसे खराब
शहर में सबसे अधिक प्रदूषण डीडी नगर में है। पास में ही प्रदूषण बोर्ड का कार्यालय भी है। खासबात है कि यहां पर न तो इंडस्ट्रीज है और न ही वाहन। फिर भी यहां पर प्रदूषण अधिक है। प्रदूषण की वजह यहां पर उखडी सडकों से उडती धूल और कचरा जलाना है।
By Vikash Pandey
Publish Date: Solar, 17 Nov 2024 11:32:10 AM (IST)
Up to date Date: Solar, 17 Nov 2024 11:34:02 AM (IST)

HighLights
- पीएम-10 का स्तर 200 और 2.5 का लेवल 60 से अधिक
- कच्ची सड़कें व चलते कचरे से फैल बढ़ रहा है प्रदूषण
- 26 अक्टूबर के बाद से ही यहां पर एक्यूआई लगातार बढ़ा हुआ है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दीनदयाल नगर रिहायशी एरिया है। यहां आसपास न तो फैक्ट्रियां हैं, न ही अधिक वाहनों का आवागमन होता है। इसके बाद भी यहां पर पीएम-10 का स्तर लगातार 200 से अधिक बना हुआ है। पीएम 2.5 का लेवल भी 60 से अधिक है। खास बात ये है कि इसी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण विभाग का दफ्तर भी है, फिर भी यह स्थिति है। यहां प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण आसपास की कच्ची या उखड़ी सड़कें और आसपास जलाया जाने वाला कचरा है।
दरअसल दीनदयाल नगर को हाउसिंग बोर्ड ने बसाया था। यहां दैनिक उपयोग में आने वाली सामग्री के अलावा कोई उद्योग स्थापित नहीं है। सार्वजनिक परिवहन के नाम पर भी वाहनों का आवागमन अधिक नहीं होता है। ऐसे में वाहनों की संख्या भी सीमित ही रहती है। जबकि हालत ये है कि 26 अक्टूबर के बाद से ही यहां पर एक्यूआई लगातार बढ़ा हुआ है।

शनिवार को भी डीडी नगर में पीएम 10 का लेवल 223.41 और पीएम 2.5 का स्तर 92.80 रहा है। जबकि सिटी सेंटर जो व्यावसायिक क्षेत्र है, यहां पर पीएम 10 का स्तर 168.15 और पीएम 2.5 का स्तर 74.13 है। इसी प्रकार शहर के ह्दय स्थल महाराज बाड़े की हवा भी बेहतर नहीं कही जा सकती है, लेकिन प्रदूषण के आंकड़े पहले से कुछ कम जरुर हुए हैं। यहां पीएम 10 का लेवल 186.36 और पीएम 2.5 का लेवल 76.55 एक्यूआई है।
सात दिन का औसत एक्यूआई भी अधिक

केवल प्रतिदिन का ही नहीं 7 दिन का औसत एक्यूआई भी डीडी नगर का अधिक है। सिटी सेंटर का 159, महाराज बाड़े का 195 है तो वहीं डीडी नगर का एक्यूआई 202 है।
तापमान में गिरावट भी कर रही हवा खराब
- कच्ची और उखड़ी सड़कें:- डीडी नगर के अंदर कई इलाकों में बदहाल सड़कें हैं। साथ ही आसपास भी कच्चे मार्ग हैं, जिन पर धूल उड़ती रहती है। इसके अलावा डिवाइडर में पौधे लगाने के लिए डाली गई मिट्टी भी इन दिनों प्रदूषण बढ़ा रही है।
- कचरा:- डीडी नगर के आसपास काफी खुली भूमि है। ऐसे में सफाई के बाद कचरे को यहीं खाली भूमि पर जमा कर दिया जाता है। ढेर लगने के बाद इस कचरे को उठाने की जगह, इसमें आग लगा दी जाती है।
- तापमान में कमी:- डीडी नगर शहर की सीमा पर स्थित है। यहां शहर के मुकाबले ठंडक अधिक रहती है। सर्दियों के मौसम में भी एयरपोर्ट एरिया और शहर के तापमान में करीब एक डिसे का अंतर रहता है। तापमान में गिरावट भी यहां की हवा के खराब होने का कारण है।
अधिक ट्रैफिक, फिर भी कम हुआ ग्राफ
महाराज बाड़े पर शहर का मुख्य बाजार है। ऐसे में यहां वाहनों का आवागमन भी अधिक होता है। साथ ही आसपास इमारतें बनी हुई हैं। यहां प्रति घंटे करीब 1500-2000 वाहनों की आवाजाही होती है। इसके बाद भी यहां पर प्रदूषण में आंशिक कमी आई है। सिटी सेंटर में भी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है, लेकिन यहां भी धीरे-धीरे प्रदूषण का ग्राफ कम होने लगा है। जबकि डीडी नगर की हवा अब तक सबसे खराब बनी हुई है।
धूल, मिट्टी या जलता कचरा ये सोर्स हैं, लेकिन एक्यूआई बढ़ने का मुख्य कारण केवल मौसम है। हालांकि जैसे ही हवा तेज गति से चलेगी तो प्रदूषण कम होने लगेगा। अब सर्दी में तापमान में गिरावट आने से यह दिक्कत रहेगी, इसलिए जरुरी है कि आमजन जागरुक हों और अपने आसपास कहीं भी कचरा या कूलर की टटिया आदि नहीं जलाएं।
आरएस सेंगर, कार्यपालन यंत्री, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

