हमीदिया में प्रतिदिन करीब 1800 से 2000 मरीजों की आईपीडी होती है, जबकि 850 मरीज ओपीडी में आते हैं। बावजूद इसके यहां भर्ती होने वाले मरीजों को इलाज के दौरान एक से दूसरे विभाग जांच कराने जाने के लिए न समय पर स्ट्रेचर मिलते हैं और न ही व्हील चेयर।
By mukesh vishwakarma
Publish Date: Sat, 16 Nov 2024 12:25:58 PM (IST)
Up to date Date: Sat, 16 Nov 2024 12:25:58 PM (IST)
HighLights
- हमीदिया की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भी होना पड़ता है परेशान।
- बार्ड ब्वाय रहते गायब, स्वजन खुद मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाने को मजबूर।
- इमरजेंसी, कैजुअल्टी में होने चाहिए 50-50, पूरे हमीदिया में करीब 100 स्ट्रेचर।
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सुबह के 11.30 बजे थे। एक बच्चा एंबुलेंस से उतरा लेकिन हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में दो ही स्ट्रेचर रखे हुए थे। जिसमें एक स्ट्रेचर पर मरीज था तो दूसरा स्ट्रेचर खराब था। ऐसे में बच्चे को एंबुलेंस के स्ट्रेचर से ही इमरजेंसी में भेजा गया। जब ये हालात दिन में है तो आप सोच सकते हैं रात को कैसे होंगे। जबकि हमीदिया में लगभग 100 से अधिक मरीज एक ही समय में अलग-अलग विभागों में जाकर अपनी जांच करवाते हैं।
बता दें कि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल कहे जाने वाले हमीदिया में प्रतिदिन करीब 1800 से 2000 मरीजों की आईपीडी होती है, जबकि 850 मरीज ओपीडी में आते हैं। विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए 200 से ज्यादा कंसल्टेंट और 600 जूनियर डॉक्टर मौजूद हैं। बावजूद इसके यहां भर्ती होने वाले मरीजों को इलाज के दौरान एक से दूसरे विभाग जांच कराने जाने के लिए न समय पर स्ट्रेचर मिलते हैं और न ही व्हील चेयर।
यहां की चिकित्सा सेवाओं और पेशेंट केयर सिस्टम को सुधारने की कवायद बीते कई सालों से जारी है, लेकिन हालात जस के तस बने हैं। यह भी बतादें कि मरीज के परिजनों को स्ट्रेचर न खींचना पड़े, इसके लिए गांधी मेडिकल कालेज प्रशासन ने हमीदिया, सुल्तानिया अस्पताल की बिल्डिंग में कंपनी के 142 कर्मचारियों को वार्ड बाय के तौर पर तैनात किया है। इन सभी कर्मचारियों को कंपनी औसतन आठ हजार रुपए प्रतिमाह वेतन देती है, लेकिन इन कर्मचारियों से मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है।
हर दिन अस्पताल में आते हैं सैकड़ों मरीज
विभिन्न वार्डों में भर्ती 750 मरीजों में से औसतन 100 मरीज एक समय में अलग-अलग विभागों में परिजनों के साथ जांच कराने पहुंचते हैं। अटेंडेंट जांच पूरी नहीं होने और मरीज के वार्ड में शिफ्ट नहीं होने तक स्ट्रेचर को संबंधित वार्ड में व्यस्त रखते हैं। इस कारण अक्सर जरूरत पड़ने पर मरीज के लिए उनके परिजनों को स्ट्रेचर नहीं मिलता।
डॉक्टर्स के कैबिन में ड्यूटी कर रहे वार्ड ब्वाय
गांधी मेडिकल कालेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में अधिकांश वार्ड ब्वाय डॉक्टरों के कैबिन में ड्यूटी कर रहे हैं। यहां वार्ड ब्वाय को ओपीडी के दौरान मरीजों को आवाज लगाकर बुलाने का काम सौंपा गया है, जबकि करीब 20 वार्ड ब्वाय की ड्यूटी दवा स्टोर से हमीदिया अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मरीजों की जरूरत की दवाओं की डिलीवरी लेने में लगाई गई है। इसके अलावा वार्ड ब्वाय को अस्पताल के वार्डों में मरीजों को खाना बांटने में ड्यूटी लगाई गई है।
कैजुअल्टी और इमरजेंसी में होने चाहिए पर्याप्त स्ट्रेचर
हमीदिया में भीड़ को देखते हुए कैजुअल्टी और इमरजेंसी में ही 100 स्ट्रेचर की व्यवस्था होनी चाहिए। दोनों ही विभागों के बाहर 50-50 स्ट्रेचर होना चाहिए, क्योंकि जब मरीज आता है तो वह स्ट्रेचर से ही अंदर जाता है क्योंकि उसे बेड ही तीन से चार घंटे के बाद मिलता है। इसके बाद उसकी जांच भी स्ट्रेचर पर होती है। ऐसे में अन्य मरीज आने पर उसे स्ट्रेचर के लिए इंतजार करना पड़ता है। वहीं इस विभाग में दो से तीन वार्ड ब्वाय ही काम कर रहे हैं।
अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं लेकर ध्यान दिया जा रहा है। यहां स्ट्रेचर की कमी नहीं है।
– डॉ. सुनीत टंडन, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल।



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