मासूम से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को 13 दिन में मिली थी फांसी की सजा, 6 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने बदला फैसला
दुष्कर्म और हत्या के दोषी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया है। ग्वालियर में 2018 में दोषी ने मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी थी। मामले में 13 दिन के अंदर ट्रायल कोर्ट और फिर हाई कोर्ट ने फांसी सजा सुनाई थी। 6 साल बाद सजा में बदलाव किया गया है।
By Neeraj Pandey
Publish Date: Sat, 16 Nov 2024 09:13:40 PM (IST)
Up to date Date: Sat, 16 Nov 2024 09:13:40 PM (IST)

HighLights
- 2018 में मासूम से दुष्कर्म के बाद कर दी थी हत्या
- बच्ची को शादी समारोह से उठा ले गया था युवक
- घटना के 13 दिन में कोर्ट ने दी थी फांसी की सजा
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: शहर मे छह साल पहले हुए 6 वर्ष की मासूम को अगवा कर दुष्कर्म और फिर हत्या के मामले में अपराधी की सजा में सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव किया है। ग्वालियर की ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से फांसी की सजा मिलरने के बाद दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में बदलाव करते हुए हत्या की सजा के स्थान पर दोषी को 20 साल की कैद की सजा देने का निर्णय किया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दोषी का इस सजा के खिलाफ किसी अन्य प्रकार की छूट देने का आवेदन करने का अधिकार भी समाप्त कर दिया है।
बच्ची को शादी समारोह से उठा ले गया था
14 जुलाई 2018 को ग्वालियर के कैसर पहाड़िया क्षेत्र में यह वारदात हुई थी। जहां एक शादी समारोह में अपने परिवार के साथ शामिल होने आई छह वर्ष की मासूम को जितेंद्र कुशवाह बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। शादी समारोह से बाहर ले जाकर उसे कैंसर पहाड़ी के जंगल में ले गया। जहां उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद बच्ची के शव को जंगल में फेंक कर भाग गया।
परिजनों ने अपनी बच्ची को आसपास में ढूंढा, जब वह नहीं मिली तो सीसीटीवी कैमरे चेक किए गए। जिसमें दोषी उस बच्ची को जंगल की तरफ ले जाते हुए नजर आया। पुलिस ने सर्चिंग शुरू की तो झाड़ियाें में बच्ची का शव मिला। ग्वालियर पुलिस ने इस मामले की जांच पड़ताल के बाद शीघ्रता से ही चालान पेश कर दिया।
13 दिन में सुनवाई हुई थी पूरी
न्यायालय पहुंचने के बाद कुल 33 लोगों की गवाही हुई। ट्रायल कोर्ट ने 13 दिन में सुनवाई पूरी कर 27 जुलाई 2018 को आरोपित को फांसी की सजा सुना दी। इस फैसले के खिलाफ आरोपित ने हाईकोर्ट में अपील की जिसका निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फांसी की सजा को पुष्ट कर दिया। दोषी जितेंद्र ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को बदलकर कारावास कर दिया।

