Funding Ideas: नए फंड में मिलेगा अच्छा रिटर्न और एसआईपी भी सुरक्षित, पढ़ें ये टिप्स

आज निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं। कुछ में बिना जोखिम के ठीकठाक रिटर्न मिल सकता है। SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है। इसमें थोड़ा जोखिम रहता है, क्योंकि मार्केट में उतार-चढ़ाव के हिसाब से रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। स्टॉक मार्केट की ज्यादा समझ नहीं है, तो म्यूचुअल फंड में पैसे लगा सकते हैं।

By Ekta Sharma

Publish Date: Sat, 29 Jun 2024 02:28:17 PM (IST)

Up to date Date: Sat, 29 Jun 2024 02:28:17 PM (IST)

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान टिप्स (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. एस्टेट फंड का कांसेप्ट अब तक विदेश में था।
  2. इसमें निवेश के लिए मोटी पूंजी नहीं लगानी पड़ती।
  3. कम रुपया लगाकर आप फंड में निवेश कर सकते हैं।

बिजनेस डेस्क, इंदौर। Funding Ideas: चार्टर्ड अकाउंटेंट मंगेश केकरे के मुताबिक, बदलते दौर के साथ निवेश के नए माध्यम भी आ रहे हैं। लोगों को इनकी जानकारी और इन पर भी ध्यान देना चाहिए। बीते दिनों गोल्ड ईटीफ तो प्रकाश में आ चुका है। कई और रियल स्टेट फंड भी आ चुके हैं। इस तरह के रियल एस्टेट फंड का कांसेप्ट अब तक विदेश में था। खास बात ये है कि गोल्ड फंड में सरकार की गारंटी मिलती है। सोना संभालने का जोखिम नहीं रहता। दूसरी तरफ रियल एस्टेट फंड की खासियत है कि इसमें आपको संपत्ति में निवेश के लिए मोटी पूंजी नहीं लगानी पड़ती।

भविष्य का लक्ष्य तय करें

चरणबद्ध और कम रुपया लगाकर आप इस फंड में निवेश कर सकते हैं। स्टॉक की तरह आपको संपत्ति के लाभ का अंश मिलता है। निवेश में एक सही संतुलन बनाकर अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें। निवेश को लेकर यह सूत्र हमेशा लागू होता है। निवेश की रणनीति तय करने से पहले हर व्यक्ति को अपने भविष्य का लक्ष्य तय करना चाहिए। उसी आधार पर अवधि चुनें और विशेषज्ञ से निवेश प्लान तैयार करवाएं। इनमें इन बातों का ध्यान रखें कि निवेशक की उम्र क्या और उस पर जिम्मेदारियां कितनी है।

एसआईपी जैसे माध्यम बेहतर

इस आधार पर निवेश की राशि तय होती ही है, साथ ही किन माध्यमों में कितना धन लगाना है, यह भी तय किया जाता है। युवा और कम जिम्मेदारी वाले निवेशक अपेक्षाकृत जोखिम वाले माध्यमों को चुन सकते हैं। सुरक्षित निवेश चुनने के साथ अच्छे रिटर्न के लिए सीधे इक्विटी में पैसा लगाने के बजाय एसआईपी जैसे माध्यम बेहतर साबित होते हैं। टैक्स की बचत भी प्लान करें। साथ ही बीमा और निवेश दोनों को एक साथ टारगेट न करें। बीमा अलग रखें। निवेश के लिए अलग योजना चुनें।