इंदौर लिवर प्रत्‍यारोपण मामला: पिता ने मैदान में दी थी प्रतिद्वंद्वियों को पटकनी तो बेटी सिस्टम से भिड़ गई

पत्नी स्वास्थ्यगत कारणों से लिवर देने में सक्षम नहीं हैं। इस पर नाबालिग बेटी ने अपने पिता की जान बचाने की ठानी, लेकिन उम्र बाधा बन गई।

डाॅक्टरों ने मना कर दिया। इसके बाद उसने हिम्मत नहीं हारी और कानूनी लड़ाई लड़ी और जीती। हारती भी कैसे क्योंकि पिता ने कभी उसे हारना सिखाया ही नहीं था। हाईकोर्ट ने गुरुवार को नाबालिग बेटी को अनुमति दे दी कि वह अपने पिता शिवनारायण बाथम को लिवर दे सकती है।

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पिता ने भी किया मना, लेकिन बेटी नहीं मानी

जब बीमार पिता को पता चला कि उनकी बेटी लिवर दे रही है। तो इस पर उन्होंने उसे बहुत समझाया कि तेरे सामने पूरी उम्र है। लेकिन वह नहीं मानी। क्योंकि वह अपने पिता को खोना नहीं चाहती है।

उसने पिता से कहा है कि आप रहोगे तो ही मैं हमेशा खुश रह सकूंगी। वहीं परिवारवालों ने बेटी को समझाया कि ऐसा नहीं करे, लेकिन वह नहीं मानी।

शिवनारायण नामी पहलवान रहे हैं। राष्ट्रीय कुश्तियां जीत चुके हैं, लेकिन अब लिवर की बीमारी ने उन्हें कमजोर कर दिया है। वे बताते हैं कि जब पहलवानी किया करता थे तो लोगों को अच्छे खाने और ठीक ढंग से रहने की सीख दिया करता थे।

कुछ गलत आदतों ने उन्हें ही बीमार कर दिया। वह धार केसरी भी रह चुके हैं। उस समय वे पहलवानों को तैयार करते थे। करीब पचास लड़कों को यह रोजाना प्रशिक्षण देते थे। यदि वह ठीक हो गए तो फिर से कुश्ती का प्रशिक्षण देंगे। अपने बेटी को भी कुश्ती के गुर सिखाएंगे।

पांच बेटियों में सबसे बड़ी है प्रीति

बता दें कि शिवनारायण की पांच बेटियां हैं। इनमें सबसे बड़ी बेटी प्रीति है। इनका कोई भाई भी नहीं है। शिवनारायण की दो बहनें हैं, जिनके बेटे भी साथ रहते हैं। अस्पताल में भर्ती पिता के लिए बेटियां और उनकी बहनें भगवान से प्रार्थना कर रही हैं। वह एकलौते सदस्य हैं, जिन पर परिवार को चलाने की जिम्मेदारी है।

यह कहता है अधिनियम

प्रत्यारोपण की अनुमति ट्रांसप्लांटेशन आफ ह्यूमन आर्गन एंड टिशू एक्ट-1994 (मानवी अवयव प्रतिरोपण अधिनियम) के प्रविधानों के तहत मिलती है। इसमें स्पष्ट प्रविधान है कि कोई नाबालिग बगैर कोर्ट की अनुमति के अपना कोई अंग या टिशू प्रत्यारोपण के लिए नहीं दे सकता। यही वजह है कि इस मामले में कोर्ट की अनुमति के लिए याचिका दायर करनी पड़ी।

एक माह तीन दिन की वजह से दायर की याचिका

एडवोकेट मनोरे ने बताया कि प्रीति की आयु 17 वर्ष 10 माह और 27 दिन है। उसके बालिग होने में फिलहाल एक माह तीन दिन बाकी हैं। अगर वह बालिग होती तो याचिका दायर करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

इंदौर में अभी 40 लिवर प्रत्यारोपण इंतजार में

बता दें कि इंदौर में अभी लिवर संबंधी बीमारियों से ग्रस्त 40 मरीज हैं, जिन्हें दानदाता का इंतजार है। डाक्टरों ने इन्हें लिवर प्रत्यारोपण करवाने के लिए कहा है। हालांकि शहर में लोगों को अंगदान करने के लिए जागरूक करने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। इसके लिए मेडिकल कालेज के साथ ही कई संस्थाएं भी काम कर रही हैं। मेडिकल कालेज के अधिकारियों का दावा है कि नाबालिग द्वारा लिवर देने का यह प्रदेश का पहला मामला है।

शुरू कर दी प्रक्रिया

हमने प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें 10-12 घंटे लगने की संभावना है। ऑपरेशन के बाद सात दिन मरीज को आइसीयू में रखेंगे। संक्रमण से बचाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

– डाॅ. अमित बरफा, विशेष जुपिटर अस्पताल