Indore Information: बारिश में भरेगा इंदौर की सड़कों पर पानी, क्योंकि 127 किमी की स्टार्म वाटर लाइन डाना भूर गया नगर निगम
इंदौर शहर में पिछले दिनों हुई शुरुआती बारिश में सड़कों पर भरे पाने ने नगर निगम के दावों की पोल खोल दी थी। आगे जब लगातार बारिश का दौर शुरू होगा तब शहरवासियों को फिर परेशानी का सामना करना पड़ेगा। शहर में जगह-जगह सड़कें तो चौड़ी कर दी गई, लेकिन इनमें स्टार्म वाटर लाइन ही नहीं डाली गई।
By Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 27 Jun 2024 09:10:53 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 27 Jun 2024 09:27:49 AM (IST)

HighLights
- थोड़ी सी बारिश होते ही शहर कई क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या खड़ी हो जाती है।
- लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है, घरों के अंदर भी पानी घुसने लगता है।
- शहर में जहां स्टार्म वाटर लाइनें बिछी हैं, उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हैं।
Indore Information: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बारिश में जलजमाव की समस्या से निपटने के इंदौर नगर निगम मजबूत दावे कर रहा है। हकीकत यह है कि शहर में 127 किमी लंबी सड़कों पर बारिश का पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम ने इन क्षेत्रों में स्टार्म वाटर लाइन डालने का कभी प्रयास ही नहीं किया।
शहर में इन क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति में पानी की निकासी पूरी तरह से भगवान भरोसे है। यही वजह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही इन क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या खड़ी हो जाती है। लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। जल निकासी नहीं होने से पानी घरों में घुसने लगता है।
हर साल नगर निगम दावा करता है कि शहर में स्टार्म वाटर लाइन डालने के काम में तेजी लाई जाएगी। धरातल पर काम किस तेजी से हो रहा है, इसका अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 2014 में स्टार्म वाटर लाइन डालने के लिए डीपीआर तैयार होने के बाद से अब तक काम ही पूरा नहीं हुआ।
ऐसा नहीं कि स्टार्म वाटर लाइन की समस्या सिर्फ पुराने शहर में है, नए क्षेत्रों में भी कई क्षेत्र हैं, जहां विकास के नाम पर चौड़ी सड़कें तो बना दी गईं, लेकिन स्टार्म वाटर लाइन नहीं डाली गई।
2014 में तैयार हुई थी इसके लिए डीपीआर
इंदौर की 400 किमी लंबी सड़कों पर स्टार्म वाटर लाइन बिछाने के लिए वर्ष 2014 में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की गई थी। योजना के मुताबिक तीन साल में इस काम को पूरा कर लिया जाना था, लेकिन यह काम अब भी अधूरा है।
शहर में 127 किमी लंबी सड़कें ऐसी हैं, जहां स्टार्म वाटर लाइन नहीं बिछाई जा सकी है। जिस गति से शहर में स्टार्म वाटर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। आने वाले पांच वर्षों में भी इससे निजात मिलने के आसार नहीं हैं।
नगर निगम स्टार्म वाटर लाइन डालने का ठेका तो दे देता है, लेकिन गुणवत्ता और काम की गति की निगरानी करने का कोई तंत्र विकसित नहीं किया जा सकता है। यही वजह है कि कई जगह स्टार्म वाटर लाइनों के पाइप इतने संकरे हैं कि कई क्षेत्रों में स्टार्म वाटर लाइन होने के बावजूद जलजमाव की समस्या पैदा हो जाती है।
जहां लाइनें बिछाई, वहां की गुणवत्ता भी संदिग्ध
इंदौर नगर निगम शहर में स्टार्म वाटर लाइनें बिछाने की बात तो करता है लेकिन स्टार्म वाटर लाइन की गुणवत्ता जांचने का कोई पैमाना निगम के पास नहीं है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में स्टार्म वाटर लाइन होने के बावजूद वर्षाकाल में जलजमाव की समस्या खड़ी हो रही है।
कुछ दिन पहले ही नगर निगम ने डीआरपी लाइन्स क्षेत्र में स्टार्म वाटर लाइन बिछाई थी, लेकिन दो दिन पहले हुई 50 मिमी वर्षा में ही यह नाकाफी साबित हुई। क्षेत्र में घुटने-घुटने तक पानी जमा हो गया था। वाहन चालक घंटों तक परेशान होते रहे।
27 किमी प्रतिवर्ष की औसत गति से चल रहा है काम
शहर में स्टार्म वाटर लाइन बिछाने का काम पिछले करीब 10 वर्ष से चल रहा है। औसतन प्रतिवर्ष 27 किमी लाइन बिछाई जा रही है। इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि 127 किमी सड़कों पर स्टार्म वाटर लाइन बिछाने में कितना समय लगेगा।
पुरानी सड़कों के लिए नहीं है कोई योजना
नगर निगम ने शहर में बनने वाली नई सड़कों के लिए तो स्टार्म वाटर लाइन डालने की अनिवार्यता लागू कर दी, लेकिन शहर के पुराने क्षेत्रों में सड़कों पर स्टार्म वाटर लाइन कैसे बिछाई जाएगी, इसे लेकर कोई योजना निगम के पास नहीं है। कुछ पुराने क्षेत्रों में निगम खुद ही पुरानी सड़कों के किनारे स्टार्म वाटर लाइन बिछा रहा है लेकिन इसकी गति भी अत्यंत कम है।
स्टार्म वाटर लाइनों के चैंबरों का रखरखाव नहीं
नई सड़कों पर स्टार्म वाटर लाइन डालने के साथ-साथ चैंबर भी बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनके रखरखाव को लेकर किसी तरह की गंभीरता नहीं बरती जा रही। हालत यह है कि शहर में कई जगह स्टार्म वाटर लाइन चैंबर टूटे-फूटे पड़े हैं तो कहीं इन चैंबरों के आगे गाद जमा है।
ये टूटे-फूटे चैंबर हादसों की वजह भी बन रहे हैं। सप्ताहभर पहले ही चैंबर की वजह से हुई एक दुर्घटना हो चुकी है। नगर निगम ने चैंबरों का रखरखाव देख रही निजी कंपनी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी अधिरोपित किया था।
पुराने शहर में है सबसे ज्यादा समस्या
इंदौर शहर के पुराने हिस्से में स्टार्म वाटर लाइन की समस्या ज्यादा विकट है। पुराने शहर की संकरी सड़कों पर इतनी जगह ही नहीं है कि वहां स्टार्म वाटर लाइन के लिए अलग से खोदाई की जा सके। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में वर्ष 2010 से पहले सड़कें बनी हैं, वहां भी कई जगह स्टार्म वाटर लाइनें नहीं डाली गई हैं।
काम में तेजी लाने के दिए निर्देश
स्टार्म वाटर लाइन बिछाने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाना है। हमने काम की गुणवत्ता जांचने के भी निर्देश दिए हैं। जिन क्षेत्रों से शिकायतें आ रही हैं, वहां जांच भी करवाई जा रही है। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर, इंदौर















