दमोह के बांसा तिहरा हत्याकांड के तीन आरोपित गिरफ्तार, कई पहेलियां अभी भी अनसुलझीं
Damoh Crime : पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि 24 जून को सामने आई इस घटना में फरियादी राहुल विश्वकर्मा द्वारा रिपोर्ट लेख कराई कि उसके मामा रमेश का पुत्र उमेश विश्वकर्मा एवं ममेरे भाई विकास विश्वकर्मा को आरोपित गोलू उर्फ विजय विश्वकर्मा, राजाबाबू विश्वकर्मा, सजल विश्वकर्मा एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा पिस्टल से गोली मारकर दोनों की हत्या कर दी व फरार हो गए थे।
By Sunil Gautam
Publish Date: Thu, 27 Jun 2024 07:38:50 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 27 Jun 2024 07:38:50 AM (IST)

HighLights
- न्यायालय से आरोपितों की डिमांड पुलिस मांग सकती है।
- चौथे आरोपित की तलाश थी पुलिस लगातार कर रही है।
- स्वजनों के प्रदर्शन के बाद लगातार मामले में कार्रवाई जारी है।
Damoh Crime : नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। देहात थाना क्षेत्र के ग्राम बांसा में सोमवार को सामने आये तिहरे हत्याकांड और मंगलवार को स्वजनों के प्रदर्शन के बाद पुलिस लगातार मामले में कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने मामले में दो एफआईआर दर्ज करते हुए प्रारंभिक रूप से बनाए गए चार आरोपितों में से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों को पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश किया जाएगा जहां से आरोपितों की डिमांड पुलिस मांग सकती है, चौथे आरोपित की तलाश थी पुलिस लगातार कर रही है।
पिस्टल से गोली मारकर दोनों की हत्या कर दी व फरार हो गए थे
पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि 24 जून को सामने आई इस घटना में फरियादी राहुल विश्वकर्मा द्वारा रिपोर्ट लेख कराई कि उसके मामा रमेश का पुत्र उमेश विश्वकर्मा एवं ममेरे भाई विकास विश्वकर्मा को आरोपित गोलू उर्फ विजय विश्वकर्मा, राजाबाबू विश्वकर्मा, सजल विश्वकर्मा एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा पिस्टल से गोली मारकर दोनों की हत्या कर दी व फरार हो गए थे।
पुलिस दमोह देहात ने आर्म्स एक्ट का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया
देहात थाना में अपराध धारा 307, 302, 341, 34 ताहि एवं 25/27 आर्म्स एक्ट का प्रकरण पंजीबद्ध किया और फरियादी रवि विश्वकर्मा पुत्र रास गोपाल विश्वकर्मा 54 साल की रिपोर्ट कि उसके भाई रमेश विश्वकर्मा को आरोपित सजल विश्वकर्मा, राजा विश्वकर्मा, राजेन्द्र विश्वकर्मा एवं अन्य द्वारा तलवार से गले व हाथ में कई वार कर एवं गोली मार कर हत्या करते हुए फरार हो हैं। पुलिस दमोह देहात में धारा 307, 302, 341, 34 आईपीसी एवं 25/27 आर्म्स एक्ट का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
दोनों मामलों में पुलिस ने किया तीन को गिरफ्तार
दोनों मामलों में पुलिस ने चार लोगों राजाबाबू पुत्र लखन विश्वकर्मा 28 साल निवासी बांसा तारखेड़ा, गोलू उर्फ विजय विश्वकर्मा पिता नंद किशोर 43 वर्ष निवासी बांसा तारखेड़ा, राजेन्द्र पिता रामलाल विश्वकर्मा 56 साल निवासी बांसा तारखेड़ा व सजल पिता लखनलाल विश्वकर्मा 22 साल निवासी बांसा तारखेड़ा को आरोपित बनाते हुए पुलिस की टीम गठित कर उनकी पतासाजी में लगाई थी।
आरोपितों के नाम एफआईआर में शामिल किए जाएंगे
पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी के निर्देशन एएसपी संदीप मिश्रा के नेतृत्व में टीमों का नगर पुलिस अधीक्षक दमोह अभिषेक तिवारी द्वारा गठित टीम आरोपितों के मिलने के संभावित स्थानो पर रवाना किया गया। मुखबिर की सूचना एवं तकनीकी साक्ष्य व सायबर सेल टीम की मदद से आरोपितों में से तीन राजाबाबू, विजय और राजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया और चौथे आरोपित की तलाश अभी जारी है। पुलिस द्वारा आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और पूछताछ व जांच में जो भी तथ्य निकाल कर सामने आएंगे उसके आधार पर और भी आरोपितों के नाम एफआईआर में शामिल किए जाएंगे।
अभी भी कई गुत्थियां अनसुलझींं
ंपुलिस द्वारा आरोपितों की गिरफ्तारी उपरांत उनसे पूछताछ की जा रही है, लेकिन मामले में अभी भी कई अनसुलझे पहलु बाकी है। पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि आरोपितों के पास हत्या में प्रयुक्त किए गए हथियार कहां से आए थे। इसके अलावा मौके की सीसीटीवी फुटेज, मौके पर मिला एक कट्टा, आरोपितों के भागने की जगह, उन्हें छिपने में मदद करने वाले लोग, घटना के पूर्व और बाद में वह किसके संपर्क में रहे सहित कई ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु है जो फिलहाल अनसुलझे है। माना जा रहा है कि पुलिस जांच के बाद उपरोक्त बिंदुओं के आधार पर संबंधित मामले में अन्य आरोपित बनाए जा सकते है।
32 राउंड से अधिक फायर
दिनदहाड़े जिस तरह से आरोपितों द्वारा तीन हत्याएं की गई उससे यह प्रतीत हो रहा है कि आरोपित इससे भी बड़ी घटना को अंजाम देने के फिराक में थे। पुलिस की माने तो आरोपितों द्वारा 32 राउंड से अधिक फायर पिस्टल से किए गए थे, जिसकी पुष्टि भी मौके पर मिले चले हुए कारतूस, बगैर चले करतूस सहित फायर के निशान से हो रही है। यदि पीड़ित परिवार के दूसरे लोग भागने में सफल नहीं होते तो हो सकता था की और भी कई हत्यायें आरोपितो द्वारा कर दी जाती।
पुलिस समझाइश नहीं आई काम
पुलिस अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया की घटना की जो वजह निकलकर सामने आ रही है, वह एक माह पूर्व बछड़े पर गाड़ी चलाने को लेकर हुआ विवाद ही है और कोई भी जमीनी विवाद दोनों पक्षों के बीच होना सामने नहीं आया है। एक माह पूर्व हुए विवाद में दोनों पक्षों की एफआईआर और पुलिस प्रशासन को दिए गए आवेदन के बाद दोनों पक्षों पर निषेधात्मक कार्रवाई की गई थी और दोनों पक्षों के आरोपों को लेकर उनको समझाइस और सुलह कराए जाने के प्रयास भी किए जा रहे थे। आरोपित और पीड़ित पक्ष एक ही समाज और परिवार के थे और उनका कोई भी पुराना क्रिमिनल रिकार्ड नहीं था जिसके चलते पुलिस होने वाली घटना का अंदेशा नहीं लगा सकी। बताया यह भी जा रहा है कि घटना में मृत होमगार्ड सैनिक द्वारा सलाह का प्रयास किया जा रहा था और उसके लिए दोनो पक्षों के कुछ लोगों के बीच बात भी हुई लेकिन उसके पहले ही आरोपितों ने बड़ी घटना को अंजाम देने का मन बना लिया था।
कैसे हुई पिस्टल की उपलब्धता
मामले में जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू है वह यह है कि आरोपितों के पास हथियारों की उपलब्धता को लेकर है। पुलिस भी यह स्वीकार कर रही है की घटना में प्रयुक्त हथियार सामान्य नहीं थे जिसके चलते ही आरोपित इतनी ज्यादा राउंड फायर कर सके। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व कोतवाली थाना क्षेत्र में भी कलू रैकवार नामक व्यक्ति की इसी तरह दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जिसमें भी आरोपितों के पास इसी तरह के हथियार होना सामने आया था। ऐसे में अब यह जांच का विषय है कि आखिरकार आरोपितों के पास इस तरह की हथियार कहां से और कौन मुहैया करा रहा है।

