Bhopal Information: शास्त्रीय गायन, वादन एवं नृत्य में झलकी परम्पराएं, तालीम और साधना, प्रणति समारोह का रंगारंग शुभारंभ

रवींद्र भवन में हो रहा है पांच दिवसीय प्रणति समारोह का आयोजन। पहले दिन प्रख्यात सरोद-वादक बंधु अमान-अयान अली बंगश ने प्रस्तुति दी। विनायक तोरवी ने कर्नाटक का शास्त्रीय गायन पेश किया। विश्वविख्यात सितार-वादक निलाद्रि कुमार ने अपनी प्रस्तुति से समां बांधा। इसके अलावा प्रेरणा श्रीमाली ने मनमोहक कथक नृत्य प्रस्तुत किया।

By Sushil Pandey

Publish Date: Wed, 26 Jun 2024 09:32:56 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 26 Jun 2024 09:32:56 AM (IST)

रवींद्र भवन में सरोद वादन की प्रस्तुति देते अमान-अयान अली बंगश।

HighLights

  1. प्रदेश के संस्कृति व पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र लोधी ने किया प्रणति समारोह का शुभारंभ।
  2. उद्घाटन कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन संध्या पुरेचा रहीं मौजूद।
  3. संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने भी दर्ज कराई अपनी उपस्थिति।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। संस्कृति विभाग तथा संगीत नाटक अकादमी के द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रणति समारोह का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। गायन, वादन एवं नृत्य से सजे समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में राज्यमंत्री संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने किया। इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन संध्या पुरेचा एवं संचालक संस्कृति एनपी नामदेव विशेष रूप से मौजूद रहे। राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि गायन, वादन एवं नृत्य का यह अनूठा ताना-बाना भारतीय सांस्कृतिक विरासत का दर्पण है। मप्र की धरती पर प्राचीन काल से ही संगीत के रंग बिखरे हैं। इस अवसर पर संध्या पुरेचा ने कहा कि संस्कृति आस है, इसके बिना सर्वनाश है, इसलिए हमें अपनी संस्कृति को जानना और पहचानना चाहिये।

लोकधुन एकला चलो रे… पर सरोद वादन

समारोह की शुरुआत सरोद वादक अमान अली-अयान अली बंगश ने की। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत में लोक धुन एकला चलो रे… को सरोद पर छेड़ा। तबले पर सत्यजीत तलवलकर की संगत के साथ सरोद के तारों से निकली धुन ने सभागार में जादू सा कर दिया। इसके बाद उन्होंने राग देश को प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने झपताल और तीन ताल में रचनाएं प्रस्तुत की। साथ ही अपने पिता उस्ताद अमजद अली खां एवं दादा उस्ताद हाफिज अली की रचनाएं पेश की। अद्भुत तालमेल और तबले की थाप के साथ इस राग का अनुराग सुधिजनों की आत्मा तक पहुंचा।

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राग मियां मल्हार सुनाया

सरोद वादन के बाद गायक विनायक तोरवी ने प्रस्तुति दी। उन्होंने राग मियां मल्हार का चयन करते प्रस्तुति की शुरुआत की। इसमें उन्होंने करीम नाम तेरी…. विलंबित एकताल में, अता धूमरे…. द्रुत एकताल एवं महमद शारंगी… द्रुत एकताल में प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने राग बसंत में पगवा ब्रज देखना…. द्रुत एकताल में और एक तराना द्रुत तीन ताल में प्रस्तुत किया। उनके साथ हारमोनियम पर निरन्जना हेगडे, रूपक काल्लूरकर एवं तानपुरे पर सिद्धार्थ बेलामन्नू और अंकित गजरे ने संगत दी।

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मप्र संगीत का मक्का

सितार वादक निलाद्रि कुमार की सितार वादन की सभा सजी। उन्होंने प्रस्तुति से पहले कहा कि मप्र संगीत का मक्का है और यहां प्रस्तुति देना बहुत विशिष्ट अनुभव होता है। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के लिए राग तिलक कामोद का चयन किया। तबले पर सत्यजीत तलवलकर की संगत के साथ उन्होंने सितार के तारों से जो तिलिस्म किया, उसे संगीत प्रेमी झूमते नजर आए।

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कथक में शिव स्तुति

अंतिम प्रस्तुति जयपुर की नृत्यांगना प्रेरणा श्रीमाली ने कथक नृत्य की दी। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत शिव स्तुति के साथ की, जिसमें राजस्थानी संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए राग पीलू में नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद तीन ताल में जयपुर घराने की चुनिंदा नृत्य संरचनाएं पेश की। अंत में उन्होंने कबीर पद पर नृत्य कर प्रस्तुति को विराम दिया।