Asaduddin Owaisi के खिलाफ राष्ट्रपति को शिकायत, संसद में शपथ लेते वक्त कहा था- ‘जय फलस्तीन’, क्या जा सकती है सदस्यता
18वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत सांसदों के शपथ ग्रहण के साथ हुई। इस दौरान कई सदस्यों ने संसदीय मर्यादाओं को आघात पहुंचाने वाली ‘हरकतें’ कीं। हैदराबाद से निर्वाचित सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तो सारी हदें पार कर दीं।
By Arvind Dubey
Publish Date: Wed, 26 Jun 2024 10:30:26 AM (IST)
Up to date Date: Wed, 26 Jun 2024 10:34:34 AM (IST)

HighLights
- हैदराबाद से सांसद चुने गए हैं असदुद्दीन ओवैसी
- मंगलवार को ली थी लोकसभा सांसद के रूप में शपथ
- वकील विष्णु शंकर जैन ने की राष्ट्रपति से शिकायत
एजेंसी, नई दिल्ली। हैदराबाद से सांसद और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ राष्ट्रपति को शिकायत की गई है। ओवैसी ने मंगलवार को लोकसभा में सांसद के रूप में शपथ लेते समय ‘जय फलस्तीन’ का नारा लगाया था।
अब सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने राष्ट्रपति को शिकायत कर ओवैसी की संसद सदस्यता खत्म करने की मांग की है। भाजपा नेता भी ओवैसी पर निशाना साध रहे हैं।
शपथ के दौरान क्या कहा था ओवैसी ने
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शपथ से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ा और उर्दू में शपथ ली, लेकिन शपथ के बाद जिस तरह से उन्होंने ‘जय भीम, जय मीम, जय तेलंगाना और जय फलस्तीन’ का नारा लगाया, वह सभी को हैरान कर देने वाला था। हालांकि, उस समय अध्यक्ष के रूप में मौजूद राधा मोहन सिंह ने कहा कि शपथ के अलावा रिकॉर्ड में कुछ नहीं जाएगा।

ओवैसी के नारे पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, शपथ लेते समय दूसरे देश की प्रशंसा करना या नारा लगाना अनुचित है। फलस्तीन या किसी अन्य देश से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। मुद्दा यह है कि शपथ लेते समय क्या किसी सदस्य के लिए दूसरे देश की प्रशंसा में नारा लगाना उचित है।
संसद में असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दिया गया ‘जय फलस्तीन’ का नारा गलत है। यह सदन के नियमों के खिलाफ है। वह भारत में रहते हुए भी ‘भारत माता की जय’ नहीं कहते हैं। लोगों को समझना चाहिए कि वह देश में रहकर असंवैधानिक काम करते हैं। – केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी
आगे क्या होगा, क्या कहते हैं नियम
- रिजिजू कह चुके हैं कि हमें इसे लेकर नियमों की जांच करनी होगी। उन्होंने बताया कि सरकार को शिकायत मिली है।
- संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 में संसद सदस्यता को अयोग्य ठहराने के आधार और प्रक्रियाओं के बारे में लिखा गया है।
- भाजपा नेता अमित मालवीय के अनुसार, किसी विदेशी देश के प्रति निष्ठा या समर्थन दिखाना संसद सदस्य की अयोग्यता का कारण बन सकता है।

