Indore Ujjain Metro Rail: सिंहस्थ के पहले इंदौर और उज्जैन के बीच चलने लगेगी वंदे मेट्रो, 55 मिनट का होगा सफर

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ होने वाला है। इसमें देश-विदेश से करीब 14 करोड़ श्रद्धालु पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में इनके सफर को आसान बनाने के लिए इंदौर और उज्जैन के बीच वंदे मेट्रो रेल चलाई जाएगी। एक घंटे के अंदर ही यात्री इंदौर से उज्जैन पहुंच सकेंगे।

By Udaypratap Singh

Publish Date: Solar, 23 Jun 2024 08:21:28 AM (IST)

Up to date Date: Solar, 23 Jun 2024 08:36:29 AM (IST)

Indore Ujjain Metro Rail: सिंहस्थ के पहले इंदौर और उज्जैन के बीच चलने लगेगी वंदे मेट्रो, 55 मिनट का होगा सफर

HighLights

  1. सीएम और रेल मंत्री के बीच वंदे मेट्रो पर बनी सहमति
  2. इंदौर से उज्जैन के बीच वंदे मेट्रो रेल के कई फेरे होंगे।
  3. इससे सड़क मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा।

Indore Ujjain Vande Metro Rail: उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया इंदौर। सिंहस्थ-2028 में इंदौर शहरवासी ‘वंदे मेट्रो’ में बैठ महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन जा सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हाल ही में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से हुई चर्चा में इस प्रोजेक्ट पर सहमति भी बन गई है।

यदि सिंहस्थ तक यह प्रोजेक्ट धरातल पर आकार ले सका तो वंदे मेट्रो ट्रेन में इंदौर से उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए 55 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। अभी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से इंदौर से उज्जैन बीच के किसी स्टेशन पर रुके बिना 40 मिनट में यात्री पहुंच रहे हैं।

इसका दिन में एक फेरा होता है जबकि वंदे मेट्रो ट्रेन के कई फेरे होंगे। शनिवार को भोपाल में सीएम डा. यादव ने मौजूदा मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान इंदौर-उज्जैन मेट्रो प्रोजेक्ट के संबंध में भी अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने को कहा। पिछले साल सांसद शंकर लालवानी ने भी रेलमंत्री से इसकी मांग की थी।

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कम खर्च में तैयार हो जाएगा यह मेट्रो रेल प्रोजेक्ट

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने उज्जैन से इंदौर होते हुए पीथमपुर तक 80 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो चलाने के लिए फिजिब्लिटी सर्वे किया है। शनिवार को यह रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। इसमें इंदौर से उज्जैन तक तक 45 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है।

इसके तहत इंदौर में मेट्रो के मौजूदा नेटवर्क से लवकुश चौराहे पर उज्जैन से आने वाले मेट्रो के एलिवेटेड हिस्से को जोड़ने का प्रविधान था। यदि लवकुश चौराहे से उज्जैन महाकाल मंदिर तक मेट्रो का एलिवेटेड कारिडोर तैयार करते तो इस पर करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का खर्च आता।

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इंदौर से उज्जैन के बीच वंदे मेट्रो ट्रेन चलाने पर रेलवे के मौजूदा रेल नेटवर्क का उपयोग हो सकेगा। मेट्रो प्रबंधन को सिर्फ 500-700 करोड़ रुपये कोच लाने पर ही खर्च करना होते। रेलवे रूट के साथ प्लेटफार्म सहित अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च नहीं होता।

सड़क मार्ग का यातायात दबाव कम करेगी वंदे मेट्रो

सिंहस्थ में उज्जैन करीब 14 करोड़ श्रद्धालु पहुंचेगे। ऐसे में इंदौर से उज्जैन जाने वाले लोगों की संख्या में भी काफी इजाफा होगा। ऐसे में वंदे मेट्रो ट्रेन इंदौर से उज्जैन जाने वालों के लिए बेहतर विकल्प होगी।

महाकाल लोक बनने के बाद बाद भी उज्जैन व इंदौर जाने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। अभी कई लोग इंदौर- उज्जैन सड़क मार्ग से उज्जैन जाते है। ऐसे में वंदे मेट्रो शुरू होने से सड़क मार्ग का यातायात दबाव भी कम होगा।

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रोप-वे, केबल कार जैसे मुद्दे भी शामिल

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में मेट्रो के साथ वंदे मेट्रो, रोप-वे, इलेक्ट्रिक-बस और केबल-कार जैसे साधनों का उपयोग के मुद्दे भी शामिल हैं।