Dhar Information: धार में बीच सड़क पर महिला की बेरहमी से पिटाई, तमाशबीन बनकर खड़े रहे लोग

धार के टांडा क्षेत्र में शुक्रवार को एक महिला को कुछ लोगों ने बेरहमी से पीटा, जिसका वीडियो वायरल हो गया। वीडियो के सामने आने पर पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

By Neeraj Pandey

Publish Date: Sat, 22 Jun 2024 12:52:16 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 22 Jun 2024 12:52:16 AM (IST)

बीच सड़क पर कई लोगों ने महिला को पकड़ रखा था, एक पीट रहा था

HighLights

  1. धार में महिला को कुछ लोगों ने बेरहमी से पीटा
  2. महिला चीख रही थी, लोग मूकदर्शक बने खड़े थे
  3. वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई, एक आरोपित गिरफ्तार

धार। बीच सड़क में कई लोगों ने एक महिला को पकड़ रखा है और एक आदमी डंडे से बेरहमी से महिला की पिटाई कर रहे है। आसपास कई अन्य लोग तमाशबीन बनकर खड़े हैं। महिला की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। पीली साड़ी पहनी हुई महिला चीख रही है चिल्ला रही है लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा और न ही बेरहम लोगों का दिल पसीज रहा है।

naidunia_image

मानवता को शर्मशार करने वाला वीडियो धार जिले के टांडा क्षेत्र का है। यहां शुक्रवार को कुछ लोगों ने महिला की बेरहमी से पिटाई की। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही पुलिस हरकत में आई और वीडियो के आधार पर इसमें शामिल एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

naidunia_image

एक आरोपित गिरफ्तार

मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि महिला के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। जब वीडियो हमारे पास आया तो हमने इसकी छानबीन शुरू की। इसमें पता चला कि यह मामला टांडा क्षेत्र का है। इसमें तत्काल ही टीम का गठन किया और महिला को न्याय मिले इसके लिए आरोपियों की तलाश शुरू की। इसमें एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। साथ ही महिला की रिपोर्ट पर प्रकरण भी दर्ज कर लिया है।

25 से 27 जून को होने वाली CSIR UGC NET परीक्षा स्थगित, NTA ने बताई ये वजह

NTA ने CSIR-UGC-NET परीक्षा जून 2024 को स्थगित करने की जानकारी दी है। इस परीक्षा का आयोजन 25 से 27 जून को होना था। एनटीए ने इसका कारण अपरिहार्य परिस्थिति और लॉजिस्टिक मुद्दों को बताया है।

By Anurag Mishra

Publish Date: Fri, 21 Jun 2024 09:47:32 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 21 Jun 2024 09:47:32 PM (IST)

25 से 27 जून को होने वाली CSIR UGC NET परीक्षा स्थगित, NTA ने बताई ये वजह
NTA ने CSIR-UGC-NET परीक्षा की स्थगित। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पेपर लीक के कारण विवादों में एनटीए।
  2. CSIR UGC NET परीक्षा को स्थगित किया।

एएनआई, नई दिल्ली। देश भर में पेपर लीक को लेकर आलोचना झेल रही एनटीए ने सीएसआईआर-यूजीसी-नेट परीक्षा को स्थगति कर दिया है। यह 25 से 27 जून को होने वाली थी।

एनटीए ने इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि सीएसआईआर-यूजीसी-नेट परीक्षा जून 2024 को स्थगित कर दिया है। यह 25 से 27 जून के बीच आयोजित होने वाली थी। इसे अपरिहार्य परिस्थितियों के साथ-साथ लॉजिस्टिक मुद्दों के कारण स्थगित किया जा रहा है। इस परीक्षा के आयोजन के लिए संशोधित कार्यक्रम बाद में आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से घोषित किया जाएगा।

NTA postponed the Joint CSIR-UGC-NET Examination June 2024 which was scheduled to be held between June 25 to 27. It’s being postponed because of unavoidable circumstances in addition to logistic points. The revised schedule for the conduct of this examination can be introduced later… pic.twitter.com/cJknD7OHBb

— ANI (@ANI) June 21, 2024

यूजीसी नेट 2024 पेपर को केंद्र सरकार ने किया रद्द

बता दें कि केंद्र सरकार ने मंगलवार (18 जून) को हुए यूजीसी नेट 2024 पेपर को बुधवार (19 जून) को रद्द कर दिया था। इस एग्जाम को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ही कराता है। सरकार ने परीक्षा में गड़बड़ी के कारण मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। यूजीसी नेट परीक्षा देशभर के विश्वविद्यालयों में पीएचडी, जूनियर रिचर्स फेलोशिप और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए की जाती है।

आरोपों में घिरी NTA

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की नीट यूजी 2024 परीक्षा को लेकर हर तरफ आलोचना हो रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को दो सप्ताह का नोटिस जारी कर दिया। 1 जून को छात्रा शिवांगी मिश्रा और नौ अन्य स्टूडेंट्स की एनटीए के खिलाफ दायर याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई 11 जून को हुई थी। अब इसकी सुनवाई 8 जुलाई को होगी।

Amrish Puri Attention-grabbing Info; Vardhan Puri | Resort Supervisor Invoice – Youngster Artist | अमरीश पुरी ने टॉम एंड जेरी देखकर सीखी एक्टिंग: इनकी एक्टिंग देख राज कपूर ने कहा था- तुम एक दिन इंडस्ट्री की शान बनोगे

26 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

  • कॉपी लिंक

इंडियन सिनेमा के आइकॉनिक और खतरनाक विलेन्स की बात होती है तो जेहन में सबसे पहले अमरीश पुरी का नाम आता है। 22 जून 1932 को नवांशहर जालंधर, पंजाब में जन्मे अमरीश पुरी की आज 92वीं बर्थ एनिवर्सरी है। एक्टर के बर्थ एनिवर्सरी पर उनके ग्रैंडसन वर्धन पुरी मुंबई के दैनिक भास्कर के ऑफिस में आए और अपने दादू को यादकर करके भावुक हो गए।

अमरीश पुरी को वर्धन पुरी प्यार से दादू कहते हैं। बातचीत के दौरान वर्धन ने बताया कि दादू के नाटकों की इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियां फैन थी। एक बार राज कपूर साहब प्ले देखने आए तो ऑडिटोरियम लोगों से भरा हुआ था। जमीन पर बैठकर उन्होंने प्ले देखा। प्ले खत्म होने के बाद स्टेज पर जाकर दादू को गले लगाकर बोले थे कि अमरीश एक दिन इंडस्ट्री की शान बनोगे।

वर्धन अपने दादू को अपना बेस्ट मानते थे। वह कहते हैं- दादू मेरे बेस्टफ्रेंड थे और हमेशा रहेंगे। जब भी उनका जिक्र होता है तो चेहरे पर मुस्कान और आंखों में नमी होती है। घर पर मिडल क्लास फैमिली जैसा माहौल रहता था। दादू की जो छवि रही है, उससे स्कूल के बच्चे घर आने से डरते थे। दादू को टॉम एण्ड जेरी बहुत पसंद था।

आज अमरीश पुरी की बर्थ एनिवर्सरी पर उनके ग्रैंडसन वर्धन पुरी से जानते हैं कुछ दिलचस्प किस्से, उन्हीं की जुबानी …..

हमें पता ही नहीं चला कि दादू बड़े स्टार हैं

हमें दादू की शूटिंग पर जाने की अनुमति नहीं थी। दादा और दादी का मानना था कि अगर हम सेट पर जाएंगे तो हमारा दिमाग खराब हो जाएगा। ऐसा लगने लगेगा कि हम दूसरों बच्चों से अलग या फिर स्पेशल हैं। घर का माहौल भी बहुत ही साधारण था। मुझे और मेरी बहन को मिडिल क्लास फैमिली की परवरिश दी गई। हमें कभी पता ही नहीं चला कि दादू बड़े स्टार हैं। हमें लगता था कि हमारे दादा दूसरे के दादाओ की तरह हैं, जो सुबह ऑफिस जाते हैं और रात को घर आ जाते हैं।

होटल के मैनेजर ने बिल नहीं लिया

जब हम बाहर डिनर पर या किसी के घर जाते थे। लोगों का जमावड़ा देखकर, उनका नाम लेकर चिल्लाते देखकर, एहसास हो गया था कि दादू कोई बड़ी हस्ती हैं। एक बार ताज होटल में डिनर के लिए गए थे। मैनेजर और होटल के बाकी स्टाफ आकार हमारे आस पास खड़े हो गए। मैं सोच रहा है कि बाकी टेबल पर इस तरह की खातिरदारी नहीं हो रही है। मैनेजर ने दादू से बिल नहीं लिया। हमें केक पैक करके दिए। मैं रास्ते भर सोचता रहा कि दादू जरूर कोई बड़ी हस्ती हैं।

स्कूल के बच्चों के पेरेंट्स उन्हें मेरे घर आने से मना करते थे

फिल्मों में दादू की विलेन की जो छवि रही है। उसे देखते हुए स्कूल के बच्चों के पेरेंट्स कहते थे कि वर्धन से दोस्ती करना,लेकिन उनके घर मत जाना। पता नहीं घर में कैसा माहौल होगा? दादू की फिल्मों वाली इमेज के बारे में ही लोग सोचते थे कि घर में बहुत बड़ा स्वीमिंग होगा। चेयर पर बैठकर सिगार और वाइन की चुस्की ले रहे होंगे।

कभी शराब और सिगरेट नहीं पी

दादू ने कभी भी शराब और सिगरेट को हाथ नहीं लगाया। बहुत ही अनुशासन में रहते थे।लेकिन फिल्मों को देखकर लोगों ने उनके बारे में एक अलग ही धारणा पाल रखी थी। इस वजह से स्कूल के बच्चे बहुत डरते थे। मेरे घर आने से पहले पूछते थे कि अमरीश जी तो घर पर नहीं होंगे? वो कहते थे कि दादू घर पर नहीं होंगे तब आएंगे।

एक बार यह बात दादू को पता चल गई। दादू घर पर ही थे। हम खेल रहे थे। दादू अंदर आए और उन्हें देखकर सब बच्चे जोर-जोर से चिल्लाकर रोने लगे। लेकिन दादू बच्चों से ऐसे घुलमिल गए कि बच्चों को उनके साथ खेलने में बहुत मजा आया। बच्चें खुद अपने पेरेंट्स से बोलने लगे कि मुझे अमरीश पुरी अंकल के घर जाना है।

सेट पर जाने के लिए पाबंदी लगा दी थी

एक बार फिल्म ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ के सेट पर बहन और बुआ के बच्चों के साथ गया था। असिस्टेंट्स डायरेक्टर और प्रोडक्शन वाले बहुत खुश हुए कि अमरीश पुरी जी की फैमिली आई है। किसी ने आकार पूछा कि क्या खाएंगे? मैंने बोल दिया कि सैंडविज खाऊंगा और बहन ने बोला कि कॉफी पीऊंगी।

ताज होटल से सैंडविज और कॉफी आ रहा है और हमें चांदी के प्लेट में खिलाया जा रहा है। उन्हें लग रहा था कि यह सब देखकर दादू खुश हो जाएंगे। लेकिन जब दादू को पता चला तो बहुत नाराज हुए। वो बोले कि बच्चों के साथ ऐसा क्यों ट्रीट कर रहे हो? इनका तो दिमाग खराब हो जाएगा। अगर कुछ मांगा है तो चॉकलेट दे दो,उसी में खुश हो जाएंगे। उसके बाद दादू ने सेट पर जाने के लिए हमेशा के लिए पाबंदी लगा दी थी।

चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम नहीं करने दिया

मुझे चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर एक दादू के साथ सुभाष घई साहब की फिल्म ‘परदेस’ में काम करने का मौका मिला था। मैं बहुत ही एक्साइटेड था कि दादू के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। मैं अपनी इस खुशी को सेलिब्रेट कर रहा था। लेकिन दादू ने मना कर दिया। वे बोले कि इससे पढ़ाई पर असर पड़ेगा। मैं बहुत उदास हो गया। दादू से नाराज भी हुआ।

ऐसा नहीं था कि दादू मेरे एक्टिंग करियर के खिलाफ थे। उनका यह मानना था कि कोई भी काम समय से होना चाहिए। पहले उस काबिल हो जाओं की अपने बारे में खुद कोई निर्णय ले सको। उस रोल को बाद में आदित्य नारायण ने किया। दादी ने समझाया कि दादू तुम्हारे भले के लिए ऐसा कर रहे हैं। उनकी बात तुम्हें तब समझ आएगी, जब बड़ा होंगे। जब मैं 15-16 साल का हुआ तभी समझ गया था कि दादू ने सही कहा था।

फिल्मी पॉलिटिक्स और गॉसिप का कल्चर घर पर नहीं था

हमारे घर पर फिल्मों की बात होती थी, लेकिन फिल्मी बात नहीं होती थी। गॉसिप और फिल्मी पॉलिटिक्स के बारे में बात नहीं होती थी। घर पर कहानियों और टेक्निक को लेकर बात होती थी। दिग्गजों के फिल्म प्रोसेस को लेकर बात होती थी। राजकपूर,यश चोपड़ा और सुभाष घई के फिल्म मेकिंग के प्रोसेस पर बात होती थी। घर का वातावरण बहुत ही पॉजिटिव है। दादू के पिताजी यानि के मेरे परदादा निहाल चंद पुरी ने डिसाइड किया था कि गॉसिप का कल्चर हमारी फैमिली में नहीं चलेगा। जिसकों भी इन सब बातों में इंट्रेस्ट हो,वो घर से बाहर जाकर बात करेगा।

यश चोपड़ा ने कहा था कि ‘फूल और कांटे’ सुपर हिट कर दी

यश चोपड़ा साहब की ‘लम्हे’ और अजय देवगन की डेब्यू फिल्म ‘फूल और कांटे’ एक साथ ही रिलीज हुई थी। ‘लम्हे’ में सभी बड़े दिग्गज लोग थे। ‘फूल और कांटे’ में दादू के अलावा सभी नए थे। उस समय फूल और कांटे के बारे में कोई बात नहीं कर रहा था। सबको यकीन था कि ‘लम्हे’ सुपरहिट होगी। यह बहुत कमाल की फिल्म थी, लेकिन नहीं चली। ‘फूल और कांटे’ सुपरहिट हो गई। यश चोपड़ा जी ने दादू को फोन करके बोला था, ‘अमरीश पुरी साहब आपने तो कमाल कर दिया, हमारी इतनी बड़ी फिल्म थी, वह नहीं चल रही है। आपने ‘फूल और कांटे’ सुपर हिट कर दी। सब कह रहे हैं कि आप फिल्म के सेलिंग पॉइंट हैं। दिस इज कॉल्ड अमरीश पूरी मैजिक।’

राज कपूर ने जमीन पर बैठकर देखा था प्ले

इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियां दादू के नाटकों के बहुत बड़े फैन थे। दादू ने मुझे बताया था कि एक दिन बहुत जबरदस्त बारिश हो रही थी। सड़कों पर पानी भरा हुआ था। राजकपूर साहब प्ले देखने आए। ऑडिटोरियम लोगों से भरा हुआ था। जमीन पर बैठकर राज कपूर साहब ने प्ले देखा। प्ले खत्म होने के बाद स्टेज पर जाकर दादू को गले लगा लिया। कान में किस करते हुए बोले थे- अमरीश एक दिन इंडस्ट्री की शान बनोगे, वो वक्त आने वाला है।

कपूर परिवार के साथ बहुत खास रिश्ता है

कपूर परिवार के साथ हमारा बहुत खास रिश्ता है। माटुंगा में हमारे परिवार का पहला घर अभी भी है। उसके बगल में कपूर परिवार का घर है। राज कपूर, शम्मी कपूर,शशि कपूर, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, राजीव कपूर वहीं पले बढ़े हैं। जब मेरी दादी प्रेग्नेंट थीं, उसी समय शशि कपूर जी की वाइफ भी प्रेग्नेंट थीं। साथ में ही वॉक करते थे। तब से हमारे परिवार का कपूर परिवार के साथ रिश्ता है। राज कपूर साहब ने ऋषि कपूर अंकल से दादू के बारे में कहा था कि एक दिन यह बम फटने वाला है। जब फटेगा पूरी दुनिया को इसकी गूंज सुनाई देगी।

सुभाष घई को अमरीश पूरी के बारे में मदन पूरी ने बताया था

दादू का सुभाष घई साहब के साथ बहुत ही प्यारा रिश्ता था। अपनी पहली फिल्म में उन्होंने दादू की सिर्फ आवाज यूज की थी। घई साहब, मदन दादू (मदन पुरी) के साथ काम करते थे। मदन दादू ने सुभाष घई साहब को दादू के बारे में बताया था कि मेरा एक छोटा भाई है। जो मुझसे भी कमाल का एक्टर है। अगर आपकी मुलाकात उनसे हो गई तो जितने भी विलेन हैं, उन सबको भूल जाएंगे, उनसे एक बार मिलो।

सुभाष घई ने पहली ही नजर में दादू को अपने माइंड में बैठा लिया था

दादू ईएसआईसी में जॉब के अलावा थिएटर भी करते थे। एक दिन मदन दादू के सेट पर गए और पैर छू कर प्रणाम किए। घई साहब की उन पर नजर पड़ी। उन्होंने कहा कि ऐसा रोमन फेस कभी नहीं देखा है। तभी से उन्होंने दादू को अपने माइंड में बैठा लिया था। जब भी कोई स्क्रिप्ट लिखते हैं, तो दादू की इमेज को ध्यान में रखकर लिखते थे। ‘हीरो’ में दादू का इंट्रोडक्शन सीन जिस तरह से घई साहब ने शूट किया है। किसी और फिल्म में वैसा इंट्रोडक्शन सीन किसी किरदार का नहीं देखा।

टॉम एंड जेरी फेवरेट प्रोग्राम था

दादू के साथ टॉम एंड जेरी बैठकर देखता था। दादू मुझसे कहा करते थे कि उन्होंने टॉम एंड जेरी देखकर एक्टिंग सीखी है। टॉम एंड जेरी की जो अदाकारी थी, उनके बीच की जो कमेस्ट्री थी, वह दादू को बहुत कमाल की लगती थी। वो हमेशा कहते थे कि अगर एक्टिंग सीखनी हैं, तो टॉम एंड जेरी देखो। इससे ज्यादा इंटरटेनिंग कोई भी शो नहीं है।

इस शो का मनोरंजन का जो लेवल है, उसे कोई बीट ही नहीं कर सकता है। इसके अलावा चार्लीन चैपलिन की फिल्में बहुत देखते थे। किशोर कुमार को बहुत मानते थे। वो कहते थे कि उनके जैसा फनकार कोई पैदा ही नहीं हुआ है और न होगा। किशोर दा की सारी फिल्में देखते थे।

मुगल- ए- आजम 300 बार देखी

किशोर कुमार की सारी फिल्मों के अलावा दादू, राज कपूर की फिल्में देखते थे। हमने अपने होम थिएटर में ‘मुगल- ए- आजम’ दादू के साथ 300 बार देखी होगी। दो बीघा जमीन, प्यासा, आवारा,बॉबी, मिस्टर इंडिया दादू की फेवरेट फिल्में रही हैं। हर फिल्म को बार-बार देखते थे। दादू कहते थे- पहली बार स्टोरी के लिए फिल्म देखता हूं। फिर परफार्मेंस,टेक्निक,बैकग्राउन्ड म्यूजिक,सिनेमेटोग्राफी के लिए अलग- अलग देखता हूं। इस तरह से दादू हर फिल्म को 20-25 बार देखते थे।

थिएटर करने का बहुत मन करता था

दादू का थिएटर करने का बहुत मन करता था। लेकिन फिल्मों में ज्यादा बिजी रहने की वजह से थिएटर नहीं कर पा रहे थे। लेकिन गुजरने के तीन साल पहले उन्होंने एक प्ले ‘कनुप्रिया’ पूना में किया था, जिसे सत्यदेव दुबे ने डायरेक्ट किया था। मैं तो नहीं जा पाया था। लेकिन अमोल पालेकर साहब ने बहुत ही कमाल का किस्सा बताया था। जब दादू परफार्म कर रहे थे, तो उनके रोंगटे खड़े हो गए थे। क्योंकि कई सालों के बाद वो परफार्म कर रहे थे।

जैसे ही परफार्मेंस खत्म हुआ और कर्टन बंद हुआ। जमीन पर गिरकर रोने लगे। सब परेशान हो गए कि क्या हो गया। 10 मिनट तक रोते ही रहे। जब उठे तो एक ही चीज बोले कि हर एक कलाकार इसी लम्हे के लिए जिंदा रहता है। जब डायरेक्ट आडियन्स से कनेक्ट होता है। जो सिनेमा में नहीं मिलता है।

निधन पर दो दिन बंद रही इंडस्ट्री

12 जनवरी 2004 में अमरीश पुरी का निधन हो गया। वर्धन ने कहा-फिल्म इंडस्ट्री में कभी छुट्टी नहीं होती है। जब दादू का देहांत हुआ था तो दो दिन तक कोई शूटिंग नहीं हुई थी। सब घर पर मातम मना रहे थे, रो रहे थे, सब उदास थे। सब यही कह रहे थे कि इंडस्ट्री में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी ने काम नहीं किया। फिल्म इंडस्ट्री ने दादू को जो यह सम्मान दिया है, इससे बड़ा कोई सम्मान नहीं हो सकता है।

अब खाएं तो क्या खाएं…टमाटर और प्याज हुए महंगे, दालों के भी भाव बढ़े, पूरे मानसून रहेगा संकट

हर बार मानसून में आवक कम होने से सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। बारिश का ही असर है कि मई माह की तुलना में जून में सब्जियों और दालों की कीमतों में खासी बढ़ोतरी हुई है। मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने ताजा आंकड़े जारी किए हैं।

By Bharat Mandhanya

Publish Date: Fri, 21 Jun 2024 12:51:14 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 21 Jun 2024 12:51:14 PM (IST)

आलू, टमाटर और प्‍याज महंगा

HighLights

  1. जून माह में बढ़ी रिटेल महंगाई
  2. प्याज की दामों ने छुआ आसमां
  3. आलू और टमाटर भी हुए महंगे

Retail Inflation बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही के अंतिम माह यानी जून में लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक तरफ सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, तो वहीं दालों की कीमत में 11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही प्याज के दाम 67 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। टमाटर की कीमत भी लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि मानसून के दौरान सब्जियों की आवक कम हो जाती है, जिससे इसकी कीमत बढ़ने लगती है। ऐसे में आशंका है कि पूरे मानसून महंगाई का संकट बना रह सकता है।

ऐसे हैं दाल के दाम

मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर ने हाल ही में दालों के दाम जारी किए हैं। जिसके अनुसार दाल की कीमत में बढ़ोतरी हुई है।

दाल 31 मई को कीमत 19 जून को कीमत
चना 86.12 रुपये 87.96 रुपये
तुअर (अरहर) 157.2 रुपये 161.27 रुपये
मूंग 118.32 रुपये 119.04 रुपये
उड़द 125.79 रुपये 126.69 रुपये
मसूर 93.9 रुपये 94.12 रुपये

आलू के दाम भी बढ़े

आंकड़ों के अनुसार, आलू के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। 31 मई तक इसकी कीमत 29.82 रुपये प्रति किलो थी, तो वहीं अब 8 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ जून में इसके दाम 32.23 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

naidunia_image

प्याज ने भी रुलाया

दिल्ली में प्याज की कीमत 67 प्रतिशत, जबकि अन्‍य राज्‍यों में इसके दाम 18 प्रतिशत तक बढ़े हैं। 31 मई तक प्याज 31 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा था, वहीं 19 को इसके दाम 50 रुपये प्रति किलो और देश में औसतन कीमत 37.83 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

टमाटर भी महंगा

अधिकतर सब्जियों में उपयोग होने वाला टमाटर भी महंगा हो गया है। 31 मई को टमाटर 34.15 रुपये किलो था, जो अब बढ़कर 44.9 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया। दिल्ली में टमाटर की कीमत 28 रुपये से बढ़कर 33 रुपये प्रति किलो हो गई है।

Morena Information: घर में काट रहे थे गाय, बोरों में भरा मिला मांस व हड्डी, मुरैना में गोसेवकों ने हाईवे किया जाम

नूराबाद गांव में गोवंश काटने का मामला सामने आया है। इस घटना से नूराबाद में हंगामा मच गया। गोसेवक व सैकड़ों ग्रामीणों ने थाने के बाहर जमकर नारेबाजी की, आरोपितों के मकान तोड़ने व सख्त कार्रवाई करने की मांग लेकर हाईवे पर चक्काजाम तक कर दिया। पुलिस ने इस मामले में नौ लोगों पर केस दर्ज किया है।

By Neeraj Pandey

Publish Date: Sat, 22 Jun 2024 01:36:57 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 22 Jun 2024 01:36:57 AM (IST)

गोसेवक व सैकड़ों ग्रामीणों ने थाने के बाहर जमकर नारेबाजी की

HighLights

  1. घर में काट रहे थे गोवंश, मचा हंगामा
  2. बोरे में भरा मिला मांस और हड्डियां
  3. पुलिस ने नौ पर केस किया दर्ज

नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना : जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर नूराबाद गांव में गोवंश काटने का मामला सामने आया है। एक कच्चे घर में गोकशी की जा रही थी, जिसे एक स्थानीय युवक ने देख लिया। आरोपितों ने युवक को मारने के लिए उस भी हमला कर दिया, लेकिन वह जान बचाकर भाग निकला और सीधे थाने पहुंचा। मौके से पुलिस को बोरों में भरा गाय का मांस व हड्डियां मिली हैं। इस घटना से नूराबाद में हंगामा मच गया। गोसेवक व सैकड़ों ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम तक कर दिया। पुलिस ने इस मामले में नौ लोगों पर केस दर्ज किया है।

खिड़की के अंजरा झांका तो…

नूराबाद की बंगाली कालोनी में कुछ परिवार कच्चे मकान, टिनशेड बनाकर रह रहे हैं, जो चार से पांच साल पहले आकर बसे हैं। शुक्रवार की शाम गांव का ही रहने वाला अनीपाल सिंह गुर्जर नाम का युवक इन घरों के पास से गुजर रहा था। इस दौरान उसने एक कच्चे घर की नाली से खून की धार बहते हुए देखी और अंदर से कुछ काटे जाने की आवाजें आ रही थीं। अनीपाल ने अंदर झांककर देखा तो तीन-चार लोग गाय की बछिया को काट रहे थे।

मामले की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी उक्त कच्चे घर के अंदर पत्थरों के नींचे दाबकर रखे गए दो बोरों में गाय का मांस व हड्डियां भरी मिलीं। पास में ही गाय की चमड़ी मिली। पुलिस ने मौके से असगर खान, शमी खान, रेतुआ खान व दो महिलाओं को भी पकड़ा है।

सात लोगों पर मामला दर्ज

नूराबाद पुलिस ने इस मामले में अनीपाल के भाई दिलीप गुर्जर की शिकायत पर असगर खां, शम्मी खां, अफसर खां, रेतुआ खां, जफ्फार खान, विश्नोई, मौसम खां, इकरार खान, शारू खां के खिलाफ मप्र गोवंश वंश प्रतिषेध अधिनियम, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के अलावा बलवा, मारपीट, धमकाने सहित कुल 11 धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

आसपास के गांवों के लोग जुटे

गाय को काटे जाने की खबर पर सिंधिया समर्थक भाजपा नेता एंदल मावई भी अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए और आरोपितों के मकान तोड़ने व सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। कुछ ही देर में थाने के बाहर नारेबाजी शुरू हो गई और गुस्साई भीड़ थाने से निकलकर नेशनल हाईवे, नूराबाद चौराहा पर आ गई, जहां चक्काजाम कर दिया। हालात बिगड़ते देख मुरैना शहर से लेकर बानमोर, सुमावली, रिठौरा आदि थानों का पुलिस बल नूराबाद में तैनात किया गया।

Kamal Nath: छिंदवाड़ा मॉडल से ऊपर नहीं उठ पाना बना कमल नाथ की मप्र की राजनीति में पतन का कारण

छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। यह उपचुनाव कमल नाथ के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है वजह सबके सबके सामने है। एक तो विधानसभा चुनावों में करारी हार और दूसरी लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा सीट गवां देना। इन दोनो घटनाक्रम के बाद कमल नाथ की राजनीति हासिए पर चली गई है।

By Dhananajay Pratap Singh

Publish Date: Sat, 22 Jun 2024 02:12:09 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 22 Jun 2024 02:12:09 AM (IST)

Kamal Nath: छिंदवाड़ा मॉडल से ऊपर नहीं उठ पाना बना कमल नाथ की मप्र की राजनीति में पतन का कारण
कांग्रेस में भी हाशिए पर कमल नाथ

HighLights

  1. केंद्रीय राजनीति में 40 वर्ष तक चला कमल नाथ का सिक्का
  2. मप्र में पदार्पण के बाद असफल होते चले गए कमल नाथ
  3. कमल नाथ के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न अमरवाड़ा उपचुनाव

धनंजय प्रताप सिंह, नईदुनिया : भोपाल : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ का छिंदवाड़ा मॉडल से ऊपर नहीं उठ पाना ही राज्य की राजनीति में विफलता का कारण बना। देश की राजनीति में कांग्रेस नेता कमल नाथ ने 40 वर्ष तक अपना सिक्का जरूर चलाया लेकिन मध्य प्रदेश की राजनीति में पदार्पण के साथ ही वह असफल होते चले गए। यह सवाल छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान फिर खड़ा होने लगा है।

दरअसल, कमल नाथ ने हमेशा छिंदवाड़ा के विकास मॉडल को सर्वोपरि बताया और वह इससे ऊपर नहीं उठ पाए। यही वजह है कि वह मध्य प्रदेश में वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार बनने पर भी पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और वर्ष 2023 में भी सरकार बनाने का आत्मविश्वास तो दिखाते रहे लेकिन चुनाव आते-आते आपसी झगड़ों के चलते कांग्रेस प्रदेश में बुरी तरह हार गई।

कमल नाथ के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न अमरवाड़ा उपचुनाव

लोकसभा चुनाव में भी छिंदवाड़ा में उनकी जमीन खिसकने का यही कारण रहा। इन दिनों अमरवाड़ा विधानसभा सीट का उपचुनाव कमल नाथ के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न भी है, क्योंकि संसदीय क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटें कांग्रेस ने पिछले दो चुनाव में जीतीं पर लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर वह हार गई। अब उनके लिए दमखम दिखाकर वापसी का एकमात्र जरिया उपचुनाव ही बचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कमल नाथ ने समय के साथ स्वयं और कांग्रेस संगठन में बदलाव नहीं किया, जो उनके पराभव का कारण बना।

कांग्रेस में भी हाशिए पर कमल नाथ

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमल नाथ को लगातार दो हार के बाद चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे उनका राजनीतिक भविष्य भी डगमगा रहा है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद पार्टी ने कमलनाथ को मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया था।

इस चुनाव में कमलनाथ का सियासी गढ़ कहा जाने वाला छिंदवाड़ा भी दूर चला गया। अब उनके ही क्षेत्र में हो रहे अमरवाड़ा उपचुनाव में भी कमल नाथ की परीक्षा होनी है। इन सियासी पराजयों ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस पर कमल नाथ के नियंत्रण को कमजोर कर दिया है। कमलनाथ के खेमे से कई नेता बीजेपी में शामिल हो गए।

कमल नाथ की कार्पोरेट शैली, बड़े राज्य में सफल नहीं हो सकती

कमल नाथ की विफलता के दो बड़े कारण हैं। पहला उनका न तो समाज से जुड़ाव कभी रहा है और न ही कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद। जबकि, चाहे अर्जुन सिंह, श्यामाचरण शुक्ल, दिग्विजय सिंह, सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी या फिर शिवराज सिंह चौहान… प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे ये सभी दिग्गज नेता लोगों से घुलते-मिलते थे। कार्यकर्ताओं को नाम से जानते थे। सुख-दुख में शामिल होते थे।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विजय दत्त श्रीधर का मानना है कि, कमल नाथ ने इसके विपरीत कार्पोरेट शैली अपनाई, जो छोटी जगह तो चल सकती है पर मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कभी सफल नहीं हो सकती। छिंदवाड़ा में अपनी पसंद के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों को पदस्थ कराना माडल मान लिया गया, जब ऐसा होता ही नहीं है। –

छिंदवाड़ा प्रेम के कारण लोगों में पैदा हुई कांग्रेस के प्रति प्रतिकूल भावना

छिंदवाड़ा मॉडल तब तक प्रासंगिक था, जब तक कमल नाथ मुख्यमंत्री नहीं बने थे। उन्हें सरकार में पर्याप्त समय भी मिला। एक सीएम के रूप में जब वह छिंदवाड़ा तक सीमित रहे तो बाकी मध्य प्रदेश में इसका संदेश गलत गया। मप्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि थोड़ी दूरी पर बोली भाषा और खानपान सब बदल जाता है, कमल नाथ के छिंदवाड़ा प्रेम के कारण लोगों में कांग्रेस के प्रति प्रतिकूल भावना पैदा हुई।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई का मानना है कि, सफल राजनेता नरेन्द्र मोदी या शिवराज सिंह चौहान की तरह होते हैं। मोदी ने 2014 के बाद कभी गुजरात मॉडल का जिक्र नहीं किया। शिवराज ने बुधनी में काफी काम किया लेकिन वह बाहर इसकी चर्चा भी नहीं करते हैं। कमल नाथ को आज की बात करना चाहिए थी लेकिन वह छिंदवाड़ा से उबर नहीं पाए। यही कारण है कि कमल नाथ के साथ कांग्रेस को भी भारी नुकसान हुआ।