Burhanpur Textile: बदलाव की कहानियां; उद्यम और नवाचार के जरिए बदलाव के दौर से गुजर रहा बुरहानपुर
बुरहानपुर में कपड़ा उद्योग उद्यम और नवाचार के माध्यम से बदल रहा है। कुछ साल पहले तक किसी तरह गुजर बसर करने वाले बुनकरों की आय और उनके जीवन स्तर में भी सुधार आया है। अब बुरहानपुर में गली-गली में बुनकरों के घरों में कपड़ा उत्पादन होते नजर आ जाएगा।
By Sandeep Paroha
Publish Date: Solar, 23 Jun 2024 12:48:07 AM (IST)
Up to date Date: Solar, 23 Jun 2024 12:48:07 AM (IST)
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HighLights
- पांच साल में शहर के कपड़ा उद्योग में बड़ा बदलाव।
- बुरहानपुर में पावरलूमों की संख्या 45 हजार के पार
- बदलाव उद्यम और नवाचार से बदल रहा बुरहानपुर
संदीप परोहा, नईदुनिया. बुरहानपुर : उद्योग और रोजगार के साधन के तौर पर भले ही महाराष्ट्र की सीमा पर बसे मप्र के इस छोटे से जिले बुरहानपुर में कपड़ा उद्योग और केले की खेती ही है, लेकिन युवाओं ने इसी को अपनी व क्षेत्र की आर्थिकी सुधारने का माध्यम बना लिया है। धागा और उससे कपड़ा तैयार करने वाले पुराने संसाधनों की जगह युवा उद्यमियों ने आधुनिक प्लांट लगाने के साथ ही पावरलूमों की संख्या भी बढ़ा कर 45 हजार के पार पहुंचा दी है। इनके माध्यम से सीधे तौर पर करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।
उद्यम और नवाचार से बदल रहा बुरहानपुर
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फैली इन औद्योगिक इकाइयों को करीब से देखने का मौका मिला। यहां पहुंचकर देखा कि उद्यम और नवाचार के माध्यम से कैसे बुरहानपुर बदल रहा है। 400 साल पुराने कपड़ा उत्पादन के इतिहास को युवाओं ने वर्तमान में न सिर्फ जीवित रखा है बल्कि तकनीक की मदद से इसे अपनी आर्थिकी बदलने का बेहतर माध्यम बना लिया है।
शहर के लोहारमंडी क्षेत्र में पावरलूम चलाने वाले मोह. अयूब बताते हैं कि निश्चित ही बीते पांच-सात साल में काफी बदलाव आया है। पहले वे दो पावरलूम चला कर किसी तरह परिवार का भरण पोषण करते थे। कुछ साल में हमने प्रयास किए और इनकी संख्या बढ़ा कर पांच कर ली। जिससे अब सालाना अच्छी खासी बचत भी हो जाती है।
पांच साल में शहर के कपड़ा उद्योग में बड़ा बदलाव
यार्न बनाने की फैक्ट्री लगाने वाले काशीनाथ महाजन बताते हैं कि बीते पांच साल में शहर के कपड़ा उद्योग में बड़ा बदलाव आया है। कपड़े का काम जानने वाले युवाओं ने मजदूरी करने के बजाय अपना स्टार्टअप शुरू करने पर अधिक जोर दिया है। यही वजह है कि अब बुरहानपुर में गली-गली में बुनकरों के घरों में कपड़ा उत्पादन होते नजर आ जाएगा। कुछ साल पहले तक किसी तरह गुजर बसर करने वाले बुनकरों की आय और उनके जीवन स्तर में भी सुधार आया है।
उच्च कोटि का काटन व होजरी कपड़ा हो रहा तैयार
देश के 47 प्रमुख कपड़ा उत्पादक शहरों में बुरहानपुर अग्रणी माना जाता है। पहले यहां केवल सामान्य उपयोग वाला कपड़ा ही बुनकर बनाते थे। जिससे उन्हें सीमित आय होती थी। अब यहां के बुनकर खास किस्म का महीन काटन वाले कपड़े के साथ ब्रांडेड कंपनियों द्वारा बनाए जाने वाले अंडर गारमेंट्स का कपड़ा भी बना रहे हैं।
इसकी मांग देश और विदेश में होने से उनकी आय में खासी बढ़ोत्तरी हुई है। टैक्सटाइल वेलफेयर एसोसिएशन के दामोदर तोदी बताते हैं कि हर माह बुरहानपुर से करीब 200 टन कपड़े का निर्यात, श्रीलंका, बांग्लादेश सहित अन्य देशों में होता है।
बनाना फाइबर भी चमका रहा किस्मत
पांच साल पहले तक बुरहानपुर केवल केला उत्पादन के लिए जाना जाता था। युवाओं ने इसे अब उद्योग का स्वरूप दे दिया है। परिणाम स्वरूप अब यहां केले के चिप्स, केला पाउडर, केले के तने से रेशे निकाल कर उनसे चटाई, पूजा का आसन, सजावटी सामान, पर्स और राखियों के साथ कई तरह का सामान बनना शुरू हो गया है, जो युवाओं को उद्यमी बना उनकी आर्थिकी में बड़ा बदलाव ला रहा है।
खाड़ी देशों जैसे ईरान, ईराक, दुबई आदि में भी केला एक्सपोर्ट के जरिए भी युवा हर माह लाखों रुपये कमा रहे हैं। सरकार के सहयोग से सुखपुरी मार्ग पर मंगलम कल्पतरू इंडस्ट्रीज शुरू करने वाले मेहुल श्राफ बताते हैं कि इस इकाई में बनाना फाइबर तैयार किया जाता है। इसका उपयोग पेपर और टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज में होता है।
इसके अलावा हैंडीक्राफ्ट भी तैयार किए जा रहे हैं। यह मप्र की पहली बनाना फायबर फैक्ट्री होने से अच्छी खासी आय हो रही है। इससे क्षेत्र में खासी संख्या में रोजगार भी सृजित हो रहे हैं। हम युवाओं को इसके लिए प्रेरित भी करते हैं कि वे बनाना फायबर से जुड़े रोजगार को शुरू कर आत्मनिर्भर बनें।

