Cricket Satta: उज्जैन में सट्टेबाजारों से रुपये भरे हुए 11 बैग मिले, लातविया भागने की फिराक में था मास्टरमाइंड
उज्जैन में पकड़ी गई सट्टेबाजी के मास्टर माइंड पीयूष चोपड़ा ने इतना पैसा कमा लिया था कि उसने इसमें एक्सपर्ट युवकों को अच्छा पैसा देकर अपने काम के लिए रखा था। पंजाब और राजस्थान से आए ये युवक क्रिकेट और टेनिस पर लाइव सट्टेबाजी करते थे। कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, यूरो, पाउंड, यूएस डालर, हंगरी यूरो सहित कई देशों की करंसी मिली।
By Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 15 Jun 2024 02:38:44 PM (IST)
Up to date Date: Sat, 15 Jun 2024 02:46:48 PM (IST)

HighLights
- एक मैच में करोड़ों रुपयों की हार-जीत की बाजी लगाई जाती थी।
- पुलिस अब इस मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों की कर रही तलाश।
- सटोरियों के इंटरनेशनकल कांटेक्ट की भी जानकारी निकाली जा रही है।
Ujjain Cricket Satta: नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। क्रिकेट व गेमिंग सट्टा का मुख्य आरोपित पीयूष चोपड़ा लंबे समय से 19 ड्रीम्स कालोनी इंदौर रोड स्थित घर पर ही सट्टा संचालित कर रहा था। मुनाफा अधिक होने के कारण वह बीते छह माह से लुधियाना पंजाब, नीमच, निम्बाहेडा राजस्थान से सट्टे के कारोबार में एक्सपर्ट युवकों को अच्छे रुपये देकर उज्जैन लाया था। यहां सारा खेल सभी तकनीकी संसाधन उपलब्ध करवाकर चलाया जा रहा था।
यूरो, पाउंड, यूएस डालर और नेपाली रुपये भी मिले
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मुख्य आरोपित पीयूष अपने मुसद्दीपुरा स्थित घर पर है। जहां पुलिस ने दबिश दी तो उसके घर से 11 बैग में कुल 14.58 करोड़ रुपये नकद, चांदी की सिल्लियां, एपल मेकमिनी सीपीयू, 11 लैपटाप सहित भारी मात्रा में विदेशी करंसी मिली है।
जिसमें कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, यूरो, पाउंड, यूएस डालर, हंगरी यूरो, पालिश मुद्रा, नेपाली रुपये आदि जब्त किए गए हैं। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 109, 120बी भादंवि, 3/4 पब्लिक गेम्बिलंग एक्ट तथा 66 डी आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
आरोपितों के रिकार्ड खंगाल रही पुलिस
आईजी संतोष कुमार सिंह का कहना है कि आरोपितों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा। इसके अलावा गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश की जा रही है। आरोपितों के पुलिस रिकार्ड भी खंगाले जा रहे हैं। इसके अलावा उनके राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी पता किया जा रहा है कि गिरोह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहां-कहा सक्रिय हैं।
अंतरराष्ट्रीय बुकीज से था पीयूष का संपर्क
पीयूष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुकीज से संपर्क कर लिया था। इसके लिए विदेशी वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करवाकर आईडी एवं पासवर्ड सट्टे में माहिर युवकों को देता था। जिसके आधार पर वह वेबसाइट पर लाइव क्रिकेट व टेनिस के मैच के भाव के अनुसार लगाते थे। पूरे मैच के दौरान जूम मीटिंग व सिमटोडो एप्लीकेशन द्वारा लाइव कनेक्टिविटी लेकर लाइन लगातार चलती रहती थी। जिस पर बुकीज व युवक लाइव कम्युनिकेशन में रहते थे।
इसी समय युवकों द्वारा सट्टा लगाया व खेला जाता था। एक बार में एक लाइन पर 50 हजार रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक का धंधा किया जाता था। धंधा कितना किया जाना है यह पीयूष चोपड़ा के द्वारा बताया जाता था। उसके बाद किराए के युवक बुकीज को धंधा के डिटेल देते थे। इस तरह एक मैच में करोड़ों रुपयों की हार-जीत की बाजी लगाई जाती थी।
घर पर भी लगा रखा था सेटअप
आरोपित पीयूष द्वारा हाई स्पीड इंटरनेट डिवाइस का प्रयोग किया जाता था। इसका एक सेटअप पीयूष ने अपने घर पर भी स्थापित कर रखा था। प्रत्येक लैपटाप में सट्टे के खाने व लगाने का तथा लेनदेन का सारा हिसाब होर्स एप्लीकेशन के माध्यम से पेन ड्राइव में सेव कर लिया जाता था। पेन ड्राइव में लेनदेन का हिसाब पीयूष ही मैनेज करता है।
लातविया भागने की फिराक में था मुख्य आरोपित
मुख्य आरोपित पीयूष बिल्डर होने के साथ ही प्रापर्टी का काम भी करता है। उसके घर से पासपोर्ट, क्रेडिट कार्ड डेबिट कार्ड व सटटे के हिसाब-किताब से संबंधित भारी मात्रा में दस्तावेज व नकदी जब्त किए गए हैं। आरोपित पीयूष परिवार के साथ लातविया देश भागने की फिराक में था। जिसके लिए उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कराया जा रहा है।
पुलिस की नाक के नीचे चल रहा था सट्टा, खबर तक नहीं लगी
पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। महीनों से पीयूष ड्रिम्स कालोनी के मकान में आनलाइन सट्टा चला रहा था, जहां छह माह से पंजाब, नीमच निम्बाहेड़ा के नौ लोग आकर रह रहे थे और सट्टे का कारोबार कर रहे थे। पुलिस को इसकी खबर तक नहीं लगी। थाना पुलिस की बड़ी विफलता मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि एसपी प्रदीप शर्मा ने पूरी कार्रवाई से सीएसपी व टीआइ व थाना पुलिस को दूर रखा था। कार्रवाई के लिए खाराकुआं टीआइ मधु राठौर व टीम को बुलाया गया था। टीम में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के मोबाइल तक बंद करवा लिए गए थे। आशंका जताई जा रही है कि लंबे समय से चल रहे कारोबार की जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही थी।













