NEET Consequence 2024: पहली बार नीट पर सवाल… एक से।टर से इतने सारे टापर आना, यह सिर्फ संयोग नहीं
छात्रों की आंखों में बसा डाक्टर बनने का सपना नीट परीक्षा के परिणामों ने पल भर में तोड़ दिया है। जिससे नीट परीक्षाओं के परिणामों पर लगा गड़बड़ी का आरोप अब आक्रोश में बदल गया है।
By anil tomar
Publish Date: Solar, 09 Jun 2024 09:43:00 AM (IST)
Up to date Date: Solar, 09 Jun 2024 09:43:00 AM (IST)
HighLights
- नीट के रिजल्ट में गड़बड़ी से ग्वालियर का छात्र नाराज-परिजन परेशान,
- उठ रहे परीक्षा के सिस्टम पर सवाल
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। छात्रों की आंखों में बसा डाक्टर बनने का सपना नीट परीक्षा के परिणामों ने पल भर में तोड़ दिया है। जिससे नीट परीक्षाओं के परिणामों पर लगा गड़बड़ी का आरोप अब आक्रोश में बदल गया है। छात्रों और उनके परिजनों में ग्रेस मार्किंग कर नंबर बढ़ाने से लेकर हर उस निर्णय के लिए नाराजगी है जिससे छात्रों का परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ है। जिसका असर शहर के 13 परीक्षा केंद्रो पर परीक्षा दे चुके नीट छात्रों और उनके स्वजनों पर भी बड़ी आसानी से देखने मिल रहा है। इस सब से छात्रों का मनोबल तो टूटा ही है साथ ही उन्हें परेशान देखकर उन छात्रों के परिवारी जनों के मन में चिंता बैठी हुई है। छात्रों के स्वजन उनका हौसला बढ़ाने से लेकर उनका मन बहलाने तक का हर संभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन फिर भी छात्रों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही। लगातार सिस्टम पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी दस्तक दे चुका है। इस पर क्या निर्णय होगा वह भी जल्द ही सामने आएगा।
टापर्स के उपनाम नहीं, सीरियल नंबर भी एक जैसे
परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद बहुप्रसारित हुई नीट की परीक्षा के रिजल्ट की पीड़ीएफ इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुई थी । जिसमें दावा किया गया कि टापर लिस्ट के सीरियल नंबर एक जैसे हैं । ये हरियाणा के किसी एक परीक्षा केंद्र के अभियार्थियों के नंबर थे । जितने भी सीरियल नंबर एक जैसे थे उनमें सभी छात्रों के सिर्फ नाम थे किसी का भी उपनाम नहीं था। इस सूची में 6 विद्यार्थियों को 720 में से 720 नंबर मिले है। जिसमें परीक्षा केंद्र पर भी उसी तरह की गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं जैसे ग्वालियर में पटवारी परीक्षा के दौरान एक निजि कालेज से सभी छात्रों के चयनित होने पर लगाए गए थे।
718 और 719 अंक आना संभव नहीं
परीक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नीट की परीक्षा में एक अभ्यर्थी को 719 और एक को 718 अंक मिले हैं जो कि तार्किक रूप से संभव नहीं है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हर सवाल चार नंबर का होता है और इसमें निगेटिव मार्किंग भी होती है। इसमें एक सवाल का गलत उत्तर देने पर एक अंक कटता है। अब अगर कोई छात्र सभी सवालों के सही जवाब देता तो उसे 720 में से 720 अंक मिलेंगे वहीं अगर एक सवाल छोड़ देता है तो 716 अंक मिलेंगे और एक सवाल गलत हुआ तो उसे 715 अंक मिलेंगे। यानि किसी भी स्थिति में 718 या 719 अंक नहीं मिल सकते हैं।
इस पर एनटीए का कहना है
इंटरनेट मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट डाल कर एनटीए की ओर से बताया गया कि कई परीक्षार्थियों ने शिकायत की थी कि उन्हें परीक्षा केंद्र में अन्य परीक्षार्थियों की तुलना में कम समय मिला। उनके परीक्षा पत्र की भाषा भी अलग थी। ऐसे विद्यार्थियों ने न्यायालय की शरण ली, जिसके बाद एनटीए ने उच्चतम न्यायालय से 13 जून 2018 को जारी किए गए निर्णय के आधार पर उक्त अभ्यर्थियों को नार्मलाइज्ड या ग्रेस मार्क्स दिए हैं। इसी मार्क्स के कारण ही इन विद्यार्थियों को 720 में से 718 व 719 अंक प्राप्त हुए हैं।
पिछले पांच साल में टापर्स का स्कोर:
- परीक्षा का साल टाप स्कोर नाम
- 2019 701 नवीन खंड़ेलवाल
- 2020 720 शोएब आफताब
- 2021 720 मृणाल,तन्मय, कार्तिका
- 2022 715 तनिष्का
- 2023 720 प्रभंजन, बोरा वरुण चक्रवति
विशेषज्ञों का कहना है
जितने टापर हैं उतनी तो एम्स में सीट नहीं हैं
निश्चित तौर पर कहीं न कहीं कुछ तो हुआ है ,संभव है कि ग्रेस मार्किंग के बाद छात्रों के नंबर बढ़ाए गए हों। अन्यथा संभव ही नहीं है कि बच्चों ने 718 और 719 नंबर आएं। जितने बच्चों को टापर बना दिया है उतनी तो एम्स में सीटे भी नहीं है , जाने कैसे इस समस्या से निपटा जाएगा। ऐसा सब होता है तो छात्रों की मानसिकता पर भी काफी असर आता है जो चिंताजनक होता है।
-कमलेश कुर्मी , नीट परीक्षा विशेषज्ञ
बडे संस्थानों को जरूरी है साख पर बट्टा न लगे
एनटीए द्वारा चूक हुई है। ग्रेस मार्क में गड़बड़ी हुई है। नियम बदल दिए , बोनस अंक दे दिए , हिंदी के स्थान पर अंग्रेजी भाषा का पेपर , अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी भाषा का पेपर दे दिया , चूक तो काफी हुई हैं। इतने बड़े संस्थान को जरूरी है कि वह अपनी साख पर बट्टा न लगने दे। छात्रों के मन में भी अब कई सवाल हैं, उनमें एनटीए को लेकर काफी नाराजगी भी है।
-भरत खंड़ेलवाल, नीट परीक्षा विशेषज्ञ
परिजन भी नाराज छात्र भी परेशान
– गड़बड़ी हुई है, बेटा परेशान होता है:
परीक्षा के परिणाम में भारी गड़बड़ी हुई है। मेरे बेटे ने पहली बार में 593 अंक प्राप्त किए । इतना अच्छा स्कोर करने के बाद भी बच्चे के हाथ निराशा लगेगी तो सिस्टम पर सवाल तो उठेंगे। मेरा बच्चा कहीं न कहीं परेशान है इसलिए समय निकाल कर उसे खुश रखने के लिए उसके साथ घूमता फिरता हूं जिससे उसका मन बहला सकूं , लेकिन उससे भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता, बच्चा चिंता में ही रहता है।
-संजीव त्रिपाठी , नीट परीक्षार्थी के पिता
– एक सेंटर से टापर, यह सिर्फ संयोग नहीं:
ग्रेस मार्कस देने का कोई नियम नहीं था, न अभी तक कभी किसी परीक्षा के दौरान दिए गए हैं । अन्य परीक्षाओं के नियम अचानक से लागू कर देना भी सही नहीं है। इसके अलावा एक ही सेंटर से इतने सारे टापर्स आना, पेपर लीक होने का आरोप लगना यह सभी सिर्फ संयोग तो नहीं हो सकता । इस सब से मेहनत करने वाले छात्रों के साथ धोखा हो रहा है।
-रुद्रांश , नीट परीक्षार्थी

