Jyotiraditya Scindia Profile: राष्ट्रीय राजनीति में दादी-पिता की विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया

Jyotiraditya Scindia Profile: राष्ट्रीय राजनीति में दादी-पिता की विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया

वर्ष 2001 में पिता माधवराव के आकस्मिक निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीति में रखा था कदम। 2007 में पहली बार बने थे केंद्रीय मंत्री।

By Ravindra Soni

Publish Date: Solar, 09 Jun 2024 11:41:03 AM (IST)

Up to date Date: Solar, 09 Jun 2024 11:32:00 PM (IST)

HighLights

  1. गुना से पांचवीं बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया।
  2. बैंकर के रूप में की थी करियर की शुरुआत।
  3. वर्ष 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे ज्योतिरादित्य सिंधिया।

भोपाल। ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के वंशज ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं। आजाद भारत में राजमाता विजयाराजे सिंधिया, उनके बेटे माधव राव सिंधिया, बेटियां वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया और पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीति में दबदबा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हार्वर्ड कालेज, हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक किया। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ग्रेजुएट स्कूल आफ बिजनेस से एमबीए डिग्री हासिल की। इसके उपरांत उन्होंने एक बैंकर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि 30 सितम्बर 2001 को पिता माधवराव सिंधिया की एक विमान हादसे में आकस्मिक निधन के बाद परिस्थितियों ने कुछ ऐसा मोड़ लिया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राजनीति में आ गए और उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करते हुए अपने पिता की सीट गुना से चुनाव लड़ा और पहली बार संसद पहुंचे।

2007 में पहली बार बने केंद्रीय मंत्री

ज्योतिरादित्य सिंधिया को मई 2004 में फिर से इसी सीट से चुना गया और 2007 में केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्री परिषद में शामिल किया गया। इसके बाद 2009 में हुए चुनाव में वह लगातार तीसरी बार गुना सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे और इस बार उन्हें वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बनाया गया। 2014 में, सिंधिया गुना से फिर चुने गए थे। लेकिन 2019 में उन्हें भाजपा के डा. कृष्णपाल सिंह यादव के मुकाबले हार झेलनी पड़ी। इसके बाद कांग्रेस पार्टी में ही एक गुट लगातार साइनलाइन करने की साजिश रचते रहा। आखिरकार 2020 में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ भाजपा ज्वाइन कर ली और भाजपा के टिकट पर राज्यसभा में पहुंच गए। इसके बाद 2021 में हुए मोदी कैबिनेट के विस्तार में उन्हें जगह मिली और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। वर्ष 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में वह सिंधिया राजघराने की परंपरागत सीट से भारी बहुमत से विजयी रहे और पांचवीं बार लोकसभा में पहुंचे। केंद्र में आज मोदी सरकार की नई पारी शुरू होने जा रही है और केंद्रीय मंत्रिमंडल में मध्य प्रदेश के संभावित नामों से विदिशा सांसद शिवराज सिंह के साथ गुना-शिवपुरी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सबसे ऊपर है।