गठबंधन में भी मजबूत निर्णय लेगी मोदी सरकार, ऐसी रहेगी विकास रफ्तार, जानें क्‍या है फिच और मूडीज का अनुमान

रेटिंग एजेंसी फिच का अनुमान है कि गठबंधन के बावजूद मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मजबूत निर्णय लेगी।

By Bharat Mandhanya

Publish Date: Fri, 07 Jun 2024 02:11:35 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 07 Jun 2024 02:11:35 PM (IST)

तीसरी बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में एनडीए सरकार काम करेगी

HighLights

  1. भारत में एनडीए सरकार करेगी काम
  2. रेटिंग एजेंसी फिच का अनुमान
  3. जारी रहेगी भारत की विकास रफ्तार

Modi Authorities 3.0 बिजनेस डेस्क, इंदौर। लोकसभा चुनाव के परिणाम में भाजपा बहुमत से दूर रह गई है। ऐसे में भाजपा ने इस बार अन्य दलों के साथ मिलकर एनडीए सरकार बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुना गया है। यानी अब आगामी 5 वर्षों तक देश में गठबंधन सरकार काम करेगी।

वहीं गठबंधन सरकार (NDA Authorities) को लेकर संभावना जताई जा रही थी कि जिस तरह से मोदी सरकार बीते 10 वर्षों से मजबूती के साथ कम कर रही थी, अब अन्य दलों के गठबंधन के कारण सरकार को कठोर निर्णय लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इन सभी के बावजूद अर्थशास्त्रियों ने भारत में भूमि और श्रम कानून में बड़े सुधार की संभावना जताई है। साथ ही भारत की विकास रफ्तार भी तेजी से जारी रहने का अनुमान जताया है।

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फिच का ऐसा है अनुमान (Fitch’s estimate)

रेटिंग एजेंसी फिच के अनुसार भाजपा (BJP) को भले ही बहुमत नहीं मिला है, लेकिन बावजूद इसके 2027-28 तक भारत का विकास प्रदर्शन तक 6.02 प्रतिशत के आसपास बना रहेगा। इसके अलावा भारत में कठिन माने जाने वाले भूमि एवं श्रम कानूनों को लेकर फिच ने अनुमान जताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सहयोगी दलों का सहयोग मिलता रहेगा।

ऐसा रहेगा बजट (Full Funds 2024-2025)

रेटिंग एजेंसी फिच का अनुमान है कि सरकार द्वारा जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट में भी अधिक स्पष्टता आएगी। फिच का मानना है कि सरकार को पूर्ण बजट में आर्थिक सुधार की प्राथमिकताओं और राजकोषीय योजनाओं पर अधिक फोकस करना चाहिए।

मूडीज का ऐसा है अनुमान

वहीं मूडीज ने भी तीसरे कार्यकाल में मोदी सरकार के कमजोर प्रदर्शन की संभावनाओं को हाशिए पर धकेल दिया है। मूडीज का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की विकास रफ्तार जारी रहेगी। अक्षय ऊर्जा और बिजली ट्रांसमिशन में भारत निवेश को बढ़ावा देगा। साथ ही बिजली की मांग में भी 5-6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।