इंदौर का एक और नवाचार, रिचार्ज शाफ्ट के जरिए 50 करोड़ लीटर पानी जमीन में सहेजेगा शहर
इंदौर प्रदेश का पहला ऐसा शहर है जहां मुहिम चलाकर इतनी बड़ी संख्या में रिचार्ज शाफ्ट बनाए जा रहे हैं। सामान्य बोरिंग में जहां जमीन से पानी निकाला जाता है।
By Kushagra Valuskar
Publish Date: Sat, 01 Jun 2024 12:57:06 AM (IST)
Up to date Date: Sat, 01 Jun 2024 01:00:21 AM (IST)

कुलदीप भावसार, इंदौर। नवाचार और इंदौर एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं। नवाचारों के जरिए देशभर में पहचान बनाने वाला इंदौर अब एक और नवाचार लेकर आया है। इस बार यह शहर वर्षाजल को सहेजकर भविष्य होने वाले जलसंकट की आशंका को जड़ से समाप्त करने जा रहा है। शहर ने इसके लिए प्रयास शुरू कर भी दिए हैं। इंदौर नगर निगम शहरभर में 100 रिचार्ज शाफ्ट बनाने जा रहा है। इसके लिए ऐसे स्थानों को चिह्नित किया गया है जहां वर्षाकाल में हर साल जबरदस्त जलजमाव होता है। इन रिचार्ज शाफ्ट के जरिए वर्षाकाल में करीब 50 करोड़ लीटर पानी जमीन में सहेजा जाएगा। निगम ने 32 रिचार्ज शाफ्ट तैयार कर भी लिए हैं।
बड़ी संख्या में रिचार्ज शाफ्ट बनाए जा रहे हैं
इंदौर प्रदेश का पहला ऐसा शहर है जहां मुहिम चलाकर इतनी बड़ी संख्या में रिचार्ज शाफ्ट बनाए जा रहे हैं। सामान्य बोरिंग में जहां जमीन से पानी निकाला जाता है। वहीं रिचार्ज शाफ्ट में जमीन में पानी उडेला जाता है। सामान्य भाषा में इसे उल्टा बोरिंग भी कहा जाता है। यह उन स्थानों पर किया जाता है जहां जलजमाव की समस्या रहती है। इससे दो फायदे होते हैं। पहला तो यह कि वर्षाजल भारी मात्रा में जमीन में उतरने से आसपास के क्षेत्र के बोरिंग का जीवन बढ़ जाता है दूसरा वर्षाकाल में जलजमाव की समस्या से निजात मिलती है।
संस्था नगर निगम के साथ मिलकर इस अभियान में जुटी
जल संरक्षण विशेषज्ञ सुरेश एमजी के मुताबिक सामान्यत: एक रिचार्ज शाफ्ट के जरिए 25 हजार वर्गमीटर क्षेत्र के वर्षाजल को आसानी से जमीन में सहेजा जा सकता है। यह जल 40 से 50 लाख लीटर होता है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर शहर में 100 रिचार्ज शाफ्ट तैयार कर ली जाएं तो करीब 50 करोड़ लीटर वर्षाजल जमीन में सहेजा जा सकेगा।एक हजार रिचार्ज शाफ्ट तैयार करने का लक्ष्यइंदौर में वंदेजलम अभियान के तहत एक वर्ष में एक हजार रिचार्ज शाफ्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। संस्था नगर निगम के साथ मिलकर इस अभियान में जुट भी गई है। पहले चरण में 100 रिचार्ज शाफ्ट तैयार की जाना हैं। इनके लिए स्थान चिह्नित किए जा चुके हैं। इनमें से 32 स्थानों पर रिचार्ज शाफ्ट का काम पूरा हो गया है। निगम की टीम तय करती है स्थानरिचार्ज शाफ्ट के लिए ऐसे स्थान को चिह्नित किया जाता है जहां ज्यादा से ज्यादा वर्षाजल सहेजा जा सके। नगर निगम की टीम स्थान चिह्नित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति का विश्लेषण करती है। इस बात का विशेष ध्यान रखना होता है कि जिस जगह रिचार्ज शिफ्ट बनाई जाना है उसके आसपास कोई ऐसा उद्योग या व्यवसाय न हो जिससे जमीन में उतारा जाने वाला जल दूषित होने की आशंका रहे। वर्षाजल को उपचारित करने के बाद ही जमीन में उतारा जाता है। रिचार्ज शाफ्ट की गहराई कितनी होगी यह तय करने के लिए भूमि परीक्षण भी किया जाता है।
इसकी गहराई 100 फीट के आसपास रहती है
तीन मीटर गोलाई वाले स्थान की जरूरत पड़ती हैएक रिचार्ज शाफ्ट तैयार करने में एक से डेढ लाख रुपये का खर्च आता है। इसके लिए तीन मीटर गोलाई वाले स्थान की जरूरत पड़ती है। स्थान चिह्नित करने के बाद भूतल से एक मीटर गहराई और एक मीटर लंबाई और इतनी ही चौड़ाई का बाक्स बनाया जाता है। इसके केंद्र पर सर्वेक्षण अनुसार 30 से 40 मीटर (100 से 130 फीट ) गहराई की शाफ्ट का निर्माण किया जाता है। इसे इस तरह से बनाया जाता है कि गुरुत्वीय बल के कारण पानी तेजी से जमीन में उतरता है। चिह्नित स्थान के अनुसार बाक्स की साइज और रिचार्ज शाफ्ट की संख्या बढ़ाई जा सकती है। रिचार्ज शाफ्ट के बाक्स में चिकने पत्थर भरे जाते हैं। शाफ्ट में भी पाइल विधि के अनुसार फिल्टर मटेरियल डाला जाता है ताकि जमीन में उतारा जाने वाला पानी पूरी तरह से शुद्ध रहे। पहली बार किसी निगम ने चलाया अभियानरिचार्ज शाफ्ट के जरिए वर्षाजल को जमीन में उतारने का नवाचार करने वाला इंदौर पहला नगर निगम है। हमारा लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा रिचार्ज शाफ्ट तैयार करने का है। कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत कुछ कोर्पोरेट ग्रुप आगे आगे हैं। वर्षाकाल से पहले शहर में 100 रिचार्ज शाफ्ट तैयार कर ली जाएंगी। सिद्धार्थ जैन, अपर आयुक्त इंदौर नगर निगम


