Jabalpur Information : जिन स्कूलों में 500 से ज्यादा बच्चे, उनकी जांच शुरू, फीस से किताबों का होगा ऑडिट

प्रत्यक्ष तौर पर स्कूलों को खुद ही ऑडिट करने कहा गया है और इसके लिए उन्हें 30 दिन का समय दिया है

By Atul Shukla

Publish Date: Wed, 29 Could 2024 06:48:18 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 29 Could 2024 07:15:28 AM (IST)

HighLights

  1. निजी स्कूलों के खिलाफ जांच और कार्रवाई में शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। निजी स्कूलों की फीस वृद्धि से लेकर पुस्तक विक्रेता की मनमानी और प्रकाशक द्वारा किया गया फर्जीवाड़े सबके सामने आ गया है। कलेक्टर दीपक सक्सेना के निगरानी में हुई जांच में फीस, काॅपी, किताब और यूनिफार्म के नाम पर अभिभावकों की जेब काटने वाले निजी स्कूल संचालकों समेत प्राचायों और बुक सेलरों पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

अब कलेक्टर ने जबलपुर के दूसरे निजी स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है। पहली चरण की जांच सामने आने के बाद दूसरे चरण में प्रशासन ने ऐसे निजी स्कूलों को लिया है, जिनमें पांच सौ या इससे अधिक बच्चे पढ़ते हैं।

इन स्कूलों की लिस्ट तैयार कर ली गई है और अब इनका ऑडिट किया जाना है। हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर स्कूलों को खुद ही आडिट करने कहा गया है और इसके लिए उन्हें 30 दिन का समय दिया है, लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर स्कूलों की आय-व्यय से लेकर पुस्तक विक्रेता और प्रकाशक के साथ सांठगांठ करने वाले स्कूल के संचालक और प्राचार्य की कुंडली तैयार करने की जिम्मेदारी जांच टीम को सौंप दी गई है।

40 से ज्यादा स्कूलों पर एक साथ कार्रवाई

सूत्रों की मानें तो जिला प्रशासन ने अगले चरण की कार्रवाई में लगभग 40 से ज्यादा निजी स्कूलों को लिया है। अभिभावकों से मिली शिकायत के बाद जांच में कई ऐसे निजी स्कूलों की हकीकत सामने आई है । हालांकि इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा विभाग और शिक्षा अधिकारी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल के बाद सूत्र बताते हैं कि उनकी भी जांच को लेकर प्रशासन तैयारी कर रहा है।

कलेक्टर ने मीडिया इन्फ्लूएंसर के साथ की बैठक

कलेक्टर दीपक सक्सेना और उप सचिव जनसंपर्क कैलाश बुंदेला ने सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर की बैठक लेकर निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वसूलने यूनिफार्म व शैक्षणिक सामग्री दुकान विशेष से ही खरीदने के लिए बाध्य करने की कार्रवाई के बारे में बताया।

कलेक्टर ने कहा कि इस मामले पर 11 स्कूलों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराए, इसमें 80 आरोपियों में 20 को गिरफ्तार किया जा चुका है। निजी स्कूलों की मनमानी के संबंध में लगातार अभिभावकों द्वारा आ रही शिकायत और एक अप्रैल को मुख्यमंत्री के ट्वीट व स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश में कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि कमीशनखोरी के इस षड्यंयंत्र में अनावश्यक पुस्तकों के अतिरिक्त भार, फर्जी व डुप्लीकेट पुस्तकें आदि से सात लाख विद्यार्थियों से 240 करोड़ रूपए की अवैधानिक फीस वसूली की गई।

जांच में निजी स्कूल को दी हरी झंडी

निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ कलेक्टर की कार्रवाई में शिक्षा विभाग और शिक्षा अधिकारी दोनों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कलेक्टर दीपक सक्सेना ने एक निजी स्कूल की जांच का जिम्मा जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी को दिया। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी अपने एक प्राचार्य को सौंपी, लेकिन प्राचार्य ने इस निजी स्कूल को अपनी जांच में क्लीन चिट दे दी। यह बात जब कलेक्टर को पता लगी तो उन्होंने प्राचार्य की जांच में की गई लीपापोती पर नाराजगी व्यक्त की और दोबारा जांच करने के निर्देश दिए। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग की जांच में शामिल होने की भूमिका की भी जांच की तैयारी की जा रही है।

इनका कहना है

11 निजी स्कूलों की जांच के बाद अब हमने उन स्कूलों की जांच को प्राथमिकता से लिया है, जहां पर 500 या इससे अधिक बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे लगभग 274 स्कूल हैं। इनकी जांच में यह देखा जाएगा कि इन्होंने अपना ऑडिट कराया है या नहीं। 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस वृद्धि की है तो इसकी जानकारी प्रशासन को दी है या नहीं।

दीपक सक्सेना, कलेक्टर, जबलपुर

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    प्रिंट मीडिया में कार्य का 33 वर्ष का अनुभव। डिजिटल मीडिया में पिछले 9 वर्ष से कार्यरत। पूर्व में नवभारत इंदौर और दैनिक जागरण इंदौर में खेल संपादक और नईदुनिया इंदौर में संपादकीय विभाग में अहम जिम्‍मेदारियों का