Courtroom Information: जज ने डीजीपी तक को लिखे थे पत्र, तब भी रिकार्ड छिपा गए अफसर, आपराधिक प्रकरण में सभी आरोपित बरी
100 करोड़ रूपये से ज्यादा की जिस केदारपुर की जमीन के मामले में शासन क्रिमिनल केस हार गया और साक्ष्य तक पेश नहीं किए गए, इसी मामले में तत्कालीन न्यायाधीश डीजीपी तक को पत्र लिख चुके थे।
By anil tomar
Publish Date: Sat, 25 Might 2024 09:54:20 AM (IST)
Up to date Date: Sat, 25 Might 2024 09:54:20 AM (IST)

HighLights
- केदारपुर की बेशकीमती जमीन के मामले में क्रिमिनल केस में साक्ष्य पेश न करने का मामला
- शासकीय अधिवक्ता ने कलेक्टर को लिखे थे कई पत्र
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। 100 करोड़ रूपये से ज्यादा की जिस केदारपुर की जमीन के मामले में शासन क्रिमिनल केस हार गया और साक्ष्य तक पेश नहीं किए गए, इसी मामले में तत्कालीन न्यायाधीश डीजीपी तक को पत्र लिख चुके थे। न्यायाधीश ने रिकार्ड पेश करने के लिए एक नहीं कई पत्र लिखे थे लेकिन सिस्टम ऐसा कि हर अधिकारी रिकार्ड को छिपाता रहा।
खुद शासकीय अधिवक्ता घनश्याम दास मंगल ने 30 अप्रैल और 6 मई 2024 को कलेक्टर रुचिका चौहान को पत्र लिखकर दस्तावेज प्रस्तुत कराने के लिए पत्र लिखे थे, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ और साक्ष्य के अभाव में 13 मई को आरोपित बरी हो गए। इस केस में डीजीपी से लेकर पुलिस अधिकारियों को न्यायाधीश मोहम्मद अजहर ने पत्र लिखे थे। ग्राम केदारपुर स्थित करीब 100 करोड़ रुपये की चरनोई की शासकीय भूमि को हड़पने के उद्येश्य से न्यायालय का फर्जी आदेश बनाने वाले तीन आरोपितों के बरी करने के मामलें में शासकीय लोक अभियोजक के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने की भी मांग की।
ग्राम केदारपुर का सर्वे नंबर 482 मिसिल बंदोबस्त सम्वत 1997 (वर्ष 1940) के अनुसार 10 बीघा 10 विस्वा चरनोई की शासकीय भूमि दर्ज हैं। चरनोई की भूमि का कभी नामांतरण नहीं हो सकता और न ही मद चेंज किया जा सकता। लगभग 10 बीघा 10 विस्वा की चरनोई की शासकीय जमीन को हड़पने के लिए आरोपीगण महादेवी गुर्जर पत्नी स्व. उम्मीद सिंह गुर्जर, भारत सिंह गुर्जर पुत्र जर्दान सिंह गुर्जर एवं वृंदावन सिंह पुत्र जर्दान सिंह गुर्जर निवासीगण छोटी मड़ैया केदारपुर थाना झांसी रोड ने न्यायालय प्रथम अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश वर्ग- दो ग्वालियर एके गोयनर का फर्जी आदेश बनाया, जिसे मनीष वर्मा पुत्र वृषभान सिंह वर्मा निवासी सी-18 गोविंदपुरी सिटी सेंटर जिला ग्वालियर ने तैयार किया था।
बाद में उक्त भूमि को मनीष वर्मा ने स्वयं खरीद लिया था। तब 2015 में झांसी रोड थाने में केस दर्ज हुआ। इसमें आरोपित बरी हो गए। मनीष वर्मा सरकारी गवाह बन गया था। इस मामले में कलेक्टर से संकेत साहू ने कलेक्टर से शिकायत की थी जिस आधार पर एसडीएम को जांच दी गई।


