MP Excessive Court docket: दुष्कर्म पीड़िता व उसके माता – पिता के विरुद्ध अपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू, हाई कोर्ट के आदेश
हाई कोर्ट ने पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति इस आधार पर दी थी कि वह ट्रायल में बयान से नहीं मुकरने का हलफनामा पेश करे।
By Paras Pandey
Publish Date: Fri, 24 Might 2024 12:36:15 AM (IST)
Up to date Date: Fri, 24 Might 2024 06:10:56 AM (IST)
HighLights
- हाई कोर्ट से मिली गर्भपात की अनुमति
- अंडरटेकिंग का उल्लंघन कर ट्रायल कोर्ट में बयान से मुकरने का मामला
- झांसा देकर खुरई ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में एक दुष्कर्म पीड़िता व उसके माता-पिता के विरुद्ध अपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्य न्यायाधीश रवि विजय मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने यह व्यवस्था देते हुए अधिवक्ता का नाम दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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दरअसल, हाई कोर्ट ने पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति इस आधार पर दी थी कि वह ट्रायल में बयान से नहीं मुकरने का हलफनामा पेश करे। इसके विपरीत ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने आरोपों से मुकर गई। इतना ही नहीं आरोपित युवक की डीएनए रिपोर्ट भी निगेटिव पाई गई। इस पर न्यायालय ने पीड़िता व उसके माता-पिता के विरुद्ध अपराधिक अवमानना की कार्रवाई करने के आदेश देते हुए सागर पुलिस अधीक्षक के माध्यम से उन्हें नोटिस सर्व किए जाने के आदेश दिए थे।
शादी का दिया था झांसा
उल्लेखलनीय है कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने गर्भपात की अनुमति के लिए हाई कोर्ट की शरण ली थी। उसका कहना था कि उसकी मां एक व्यक्ति के यहां घरेलू काम करती थी। उसी घर में आरोपित कपिल लोधी कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम करता था। इस दौरान दोनों में दोस्ती हो गई। आरोपित ने शादी का झांसा देकर खुरई ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए।
जिसके बाद वह गर्भवती हो गई थी। नाबालिग ने 23 अक्टूबर, 2023 को आरोपित के विरुद्ध सागर जिले के कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया था। याचिका में कहा गया था कि उसके गर्भ में लगभग नौ सप्ताह का भ्रूण है। हाई कोर्ट सशर्त गर्भपात की अनुमति प्रदान करते हुए अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता तथा उसके माता-पिता विवेचना अधिकारी के समक्ष भी हलफनामा पेश करें की वह ट्रायल के दौरान अपने आरोपों से नहीं मुकरेंगे।
झूठ पकड़े जाने पर हाई कोर्ट ने दिए निर्देश
आरोपित युवक के द्वारा दायर जमानत आवेदन की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने पाया कि पीड़िता ट्रायल कोर्ट में अपने बयान से मुकर गई है। पीड़िता ने अपने बयान में कहा है कि शत्रुतावश उसने आरोपित के विरुद्ध झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। आरोपित ने उसके साथ दुष्कर्म नहीं किया है। भ्रूण के डीएनए रिपोर्ट में भी आरोपित युवक उसका बायोलाजिकल पिता नहीं पाया गया है।
हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता सहित उनके माता-पिता के विरुद्ध अपराधिक अवमानना का प्रकरण चलाए जाने के निर्देश जारी करते हुए पुलिस अधीक्षक सागर के माध्यम से नोटिस जारी किए थे। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने तीनों के विरुद्ध अपराधिक अवमानना की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश जारी किए।

