Indore Lok sabha Election 2024: ‘बम कांड’ का फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ भाजपा को

पार्टी के वरिष्ठों का भी मानना है कि इंदौर जैसी सुरक्षित सीट पर इस तरह का कदम उठाने की आवश्यकता ही नहीं थी।

By Kuldeep Bhawsar

Publish Date: Mon, 06 Might 2024 07:14:20 PM (IST)

Up to date Date: Mon, 06 Might 2024 07:22:47 PM (IST)

Indore Lok sabha Election 2024: 'बम कांड' का फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ भाजपा को
पार्टी के वरिष्ठों का भी मानना है कि इंदौर जैसी सुरक्षित सीट पर इस तरह का कदम उठाने की आवश्यकता ही नहीं थी।

HighLights

  1. ”बम कांड” का फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ भाजपा को
  2. -जमीनी कार्यकर्ता हताश हुए
  3. राष्ट्रीय स्तर पर इंदौर की छबि भी बिगड़ी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। अक्षय बम के पार्टी में शामिल होने का भाजपा को फायदा तो दूर नुकसान होता नजर आ रहा है। कांग्रेस को दौड़ से बाहर करने की रणनीति फिलहाल तो भाजपा पर ही भारी पड़ती नजर आ रही है। बम कांड को अंजाम देने वाले दो नंबरी नेता भले ही इसे अपनी जीत मान रहे हों, लेकिन वास्तविकता यह है कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की छबि धूमिल हुई है।

पार्टी के वरिष्ठों का भी मानना है कि इंदौर जैसी सुरक्षित सीट पर इस तरह का कदम उठाने की आवश्यकता ही नहीं थी। अक्षय को अब तक का सबसे कमजोर कांग्रेसी प्रत्याशी माना जा रहा था। उनका नामांकन फार्म वापस करना तो फिर भी ठीक था, लेकिन उन्हें पार्टी में शामिल कर भाजपा ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है।

बम कांड को अंजाम देकर पार्टी ने चुनावी मैदान में शह मात की बाजी भले ही जीत ली, लेकिन इससे पार्टी के भीतर फैली नकारत्मकता का खामियाजा भाजपा को लंबे समय उठाना पड़ेगा। बम कांड के बाद पार्टी के कार्यकर्ता असमंजस में हैं।

16 मार्च को आचार संहिता लागू होते वक्त जिस उत्साह के साथ उन्होंने चुनावी शंखनाद किया था वह अब सुस्त पड़ चुका है। भाजपा के सामने इस वक्त इंदौर में चुनाव जीतना बड़ी चुनौती नहीं, बल्कि घटनाक्रम के बाद मतदाता और कार्यकर्ताओं को घेर चुकी नकारात्मकता को दूर करना है।

रविवार देर रात अलाकमान द्वारा बुलाई गई बैठक में इसी मुद्दे को लेकर चर्चा हुई। इसमें इंदौर के सभी नौ विधायक, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष और चुनावी कोर टीम के सदस्य शामिल हुए। बैठक में शामिल जनप्रतिनिधि भले ही कह रहे हैं कि इसमें सिर्फ मतदान का प्रतिशत बढ़ाने की बात हुई, लेकिन अंदर के सूत्र बताते हैं कि बम कांड की गूंज दिल्ली तक है और बैठक का इससे सीधा-सीधा संबंध है।

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देशभर में हुई बदनामी

29 अप्रैल को हुए घटनाक्रम से पूरे देश में इंदौर की बदनामी हुई है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मंशा भले ही इसके जरिए केंद्रीय नेतृत्व की नजर में अपने नंबर बढ़ाने की रही हो, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा। हर तरफ एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर भाजपा ने इंदौर जैसे सुरक्षित सीट पर ऐसा कदम क्यों उठाया।

अक्षय बम खुद प्रचार के दौरान कांग्रेस के मंच से स्वीकार कर चुके थे कि वे जीतने के लिए नहीं बल्कि कांग्रेस की पिछली हार का अंतर कम करने के लिए लड़ रहे हैं। यानी खुद कांग्रेस मानकर चल रही थी कि इंदौर सीट पर उसके लिए बहुत ज्यादा कुछ नहीं है। ऐसे में उसे दौड़ से बाहर करना किसी के समझ नहीं आ रहा।

न वरिष्ठों को जानकारी न संगठन से अनुमति

चौकाने वाली बात यह भी है कि जिस कदम से पूरे देश में इंदौर की थू-थू हुई उसे उठाने से पहले न वरिष्ठों को जानकारी दी गई न संगठन से अनुमति ली गई। मुख्यमंत्री तक को इसकी जानकारी 29 अप्रैल को ही लगी। भाजपा की वरिष्ठ नेता और लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन खुद कह चुकी हैं कि उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी ही नहीं थी। अक्षय इतने बड़े नेता नहीं कि उन्हें भाजपा में शामिल करने के लिए ऐसा कदम उठाया जाना था।

स्वस्थ स्पर्धा ही समाप्त हो गई

कांग्रेस के दौड़ से बाहर होने के बाद इंदौर में मुकाबला एकतरफा हो गया है। जिस स्वस्थ स्पर्धा के लिए इंदौर पहचाना जाता है वह गायब है। दौड़ से बाहर कांग्रेस इस घटनाक्रम को भुनाते हुए मतदाताओं की सहानुभूति बटोरने सकती है। मुद्दाविहीन चल रहे चुनाव में इस घटनाक्रम ने एक नया मुद्दा दे दिया है।

त्यौहार खोटा हो गया पार्टी का

शंकर लालवानी ने वर्ष 2019 का चुनाव लगभग साढ़े पांच लाख मतों से जीता था। इस बार भी पार्टी का दावा था कि जीत का आंकडा आठ लाख से ज्यादा रहेगा। 29 अप्रैल के घटनाक्रम के बाद जीत का आंकड़ा भले ही इससे भी ज्यादा हो जाए, लेकिन पार्टी का त्यौहार खोटा तो हो ही गया। इस घटनाक्रम के बाद लालवानी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। बगैर स्पर्धा जीतने का मजा वो नहीं जो काटे के मुकाबले में होती है।

दबाव में आकर नहीं, खुद शामिल हुए हैं

किसी दबाव-प्रभाव में आकर नहीं अक्षय खुद भाजपा में शामिल हुए हैं। प्रधानमंत्री की रीति नीति से प्रभावित कोई भी व्यक्ति भाजपा में शामिल हो सकता है। अक्षय के भाजपा में शामिल होने से निश्चित ही भाजपा को फायदा होगा। इस घटनाक्रम से कांग्रेस की वस्तुस्थिति मतदाताओं के सामने आ गई है।

शंकर लालवानी, भाजपा प्रत्याशी

अक्षय का फैसला हिम्मत वाला

अक्षय ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला खुद ही लिया है। उनका यह फैसला हिम्मत वाला है। उन्होंने मुझसे बात की और कहा कि मैं नामांकन वापस ले रहा हूं।

कैलाश विजयवर्गीय नगरीय प्रशासन मंत्री

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    वर्तमान में नईदुनिया डॉट कॉम में शिफ्ट प्रभारी हैं। पत्रकारिता में विभिन्‍न मीडिया संस्‍थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में कार्य करने का 22 वर्षों का दीर्घ अनुभव। वर्ष 2002 से प्रिंट व डिजिटल में कई बड़े दायित्‍वों