EPFO Information: ईपीएफ में फॉर्म 10सी और फॉर्म 10डी का क्या काम है, ईपीएफओ मेंबर्स जानिए यहां
EPFO Information in Hindi: ईपीएस में डिपॉजिट हो रही राशि को लेकर नियम हैं। यदि कर्मचारी का ईपीएस खाते में कॉन्ट्रीब्यूशन दस साल तक रहता है तो वो रिटायरमेंट के बाद पेंशन पाने का हकदार है।
By Kushagra Valuskar
Publish Date: Solar, 05 Might 2024 04:53:21 PM (IST)
Up to date Date: Solar, 05 Might 2024 04:54:33 PM (IST)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। EPFO Information in Hindi: सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों का वेतन का कुछ हिस्सा ईपीएफओ में जमा होता है। जिसमें कर्मचारी की सैलरी का 12 प्रतिशत और इतना ही कंपनी जमा करती है। जिसमें एक हिस्सा ईपीएफ खाते और दूसरा ईपीएस में जाता है। जरूरत पड़ने पर मेंबर्स ईपीएफ अकाउंट से कुछ पैसा निकाल सकते हैं। हालांकि पूरे फंड की निकासी दो महीने तक बेरोजगार रहने या सेवानिवृत्ति के बाद किया जा सकता है।
ईपीएस में डिपॉजिट हो रही राशि को लेकर नियम हैं। यदि कर्मचारी का ईपीएस खाते में कॉन्ट्रीब्यूशन दस साल तक रहता है तो वो रिटायरमेंट के बाद पेंशन पाने का हकदार है। अगर योगदान दस साल से कम है तो फाइनल सेटलमेंट कर सकता है। ईपीएफओ के पैसे निकालने के लिए 10सी और 10डी फॉर्म की जरूरत पड़ती है। आइए जानते हैं कब कौन-सा फॉर्म काम आता है।
फॉर्म 10डी का इस्तेमाल कब किया जाता है?
अगर किसी कर्मचारी ने दस साल से अधिक समय तक ईपीएफ पेंशन खाते में योगदान दिया है, तो रिटायरमेंट के बाद EPFO से पेंशन प्राप्त कर सकता है। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने के लिए फॉर्म 10डी भरना होगा।
फॉर्म 10सी का जरूरत कब पड़ती है?
ईपीएफओ के नियम के अनुसार, अगर किसी सदस्य की नौकरी की अवधि दस साल तक नहीं है। वो फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना चाहते है तो उसे फॉर्म 10सी भरना होगा। इस फॉर्म का इस्तेमाल पेंशन स्कीम सर्टिफिकेट के लिए किया जाता है।
फॉर्म 31 और 19 की जरूत कब ये भी जानें?
नौकरी के दौरान पैसों की जरूरत पड़ने पर पीएफ बैलेंस का कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं। इसके लिए फॉर्म 31 को भरना होगा। वहीं, पूरे फंड की निकासी करने पर ईपीएफ क्लेम फॉर्म 19 का इस्तेमाल करना होगा।


