Chaitra Navratri 2024: हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर इंदौर के इस माता मंदिर में होता है कन्या पूजन
बियाबानी स्थित कैला माता मंदिर में नवरात्र ही नहीं, प्रतिदिन भक्तों का लगा रहता है तांता।
By Hemraj Yadav
Publish Date: Wed, 17 Apr 2024 04:05 AM (IST)
Up to date Date: Wed, 17 Apr 2024 04:05 AM (IST)

Chaitra Navratri 2024: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। यूं तो कैला देवी का मुख्य मंदिर करौली (राजस्थान) में है, लेकिन इंदौर के मध्य भी कैला देवी मंदिर है, जहां नवरात्र ही नहीं, बल्कि हर दिन भक्तों का तांता लगता है। यह कैला माता मंदिर बियाबानी में स्थित है। मंदिर बेशक प्राचीन नहीं है, लेकिन इसकी मान्यता बहुत है। यहां चैत्र और अश्विन मास की नवरात्र में हर दिन देवी को 56 भोग लगाया जाता है और फूल बंगला सजाया जाता है। प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर भी मां का विशेष शृंगार कर 56 भोग अर्पित किया जाता है और कन्या पूजन होता है।
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मंदिर का इतिहास – घर में स्थापित की मूर्ति, बाद में मंदिर बनाया
मंदिर का निर्माण 36 वर्ष पूर्व अमरचंद और नंदूबाई राजोरिया ने कराया था। नंदूबाई कैला देवी की भक्त थीं और घर में नियमित उनकी पूजा किया करती थी। स्वप्न में कैला देवी के दर्शन होने के बाद वे राजस्थान से कैला माता की मूर्ति लेकर आईं और घर में ही उन्हें स्थापित किया। कुछ महीनों बाद जिस घर में मूर्ति स्थापित की थी, उसे मंदिर में परिवर्तित कर दिया। तब से यहां विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठान का सिलसिला शुरू हो गया। यहां कैला देवी और उनकी छोटी बहन चामुंडा देवी की सफेद संगमरमर से बनी मूर्तियां स्थापित है।
हर दिन होता है विशेष श्रृंगार
कैला देवी वही महामाया है जो कंस के हाथ से छूटकर आकाश में चली गई और देवी के रूप में उसे सचेत किया कि उसे मारने वाला जन्म ले भी चुका है। कैला देवी के साथ उनकी छोटी बहन चामुंडा माता भी यहां विराजित हैं। हर दिन मां का विशेष शृंगार किया जाता है। भक्त यहां अपनी मनोकामना लिए दर्शन करने आते हैं। – मंजू राजोरिया, मुख्य पुजारी
मां से जो मांगा, वह पाया
मैं करीब 30 वर्ष से इस मंदिर में दर्शन करने आ रहा हूं। मां के दर्शन करने से मन को शांति और प्रसन्नता मिलती है। मां से जब भी कुछ मांगा गया, वह पाया ही है। हर बार करौली स्थित कैला माता मंदिर तो नहीं जाया जा सकता, लेकिन यहां आकर तो मां की भक्ति की ही जा सकती है। इसलिए मैं और मेरा परिवार यहां दर्शन व पूजन करने आता है। – ताराचंद अग्रवाल, भक्त

