IMD Climate Forecast: कमजोर हो रहा अल नीनो इफेक्ट, सामान्य से 106 फीसदी ज्यादा सक्रिय होगा मानसून
आईएमडी ने कहा कि उत्तर-पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों को छोड़कर लगभग पूरे देश में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
By Sandeep Chourey
Publish Date: Tue, 16 Apr 2024 09:11 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 16 Apr 2024 09:13 AM (IST)
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HighLights
- मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत में एक बार फिर सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
- इस क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से मानसूनी वर्षा में गिरावट का रुझान देखा जा रहा है।
- भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो और ला नीना के कारण भारतीय मानसून सहित वैश्विक मौसम पैटर्न प्रभावित होता है।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। देश में इस मानसून सीजन में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून का पूर्वानुमान जताते हुए कहा है कि इस मानसून में भारत में “सामान्य से अधिक” बारिश हो सकती है। पूरे देश में इस साल औसत से 106 फीसदी बारिश ज्यादा हो सकती है। आईएमडी ने कहा कि उत्तर-पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों को छोड़कर लगभग पूरे देश में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
45 दिन पहले मानसून का पूर्वानुमान
बीते 10 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब मौसम विभाग ने 4 माह चलने वाले मानसून सीजन को लेकर 45 दिन पहले ही सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वानुमान जता दिया है। भारत में हर साल मानसून सीजन में औसतन 870 मिमी बारिश होती है। बीते साल मौसम विभाग ने पहले चरण के पूर्वानुमान में 96 फीसदी बारिश की संभावना जताई थी, जो सीजन के अंत में वास्तविक वर्षा 94 प्रतिशत के करीब थी।

पूर्वोत्तर में फिर सामान्य से नीचे
मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत में एक बार फिर सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इस क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से मानसूनी वर्षा में गिरावट का रुझान देखा जा रहा है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो और ला नीना के कारण भारतीय मानसून सहित वैश्विक मौसम पैटर्न प्रभावित होता है। अल नीनो प्रभाव के सक्रिय होने पर भारतीय मानसून कमजोर हो जाता है और बारिश कम होती है, वहीं ला नीना प्रभाव को अच्छी बारिश के लिए मददगार होता है।
मौसम विभाग के मुताबिक, 1951 के बाद करीब 22 वर्षों में जब ला नीना की स्थिति बनी हुई थी तो 20 सालों के दौरान मानसूनी वर्षा सामान्य या सामान्य से ऊपर थी। 1974 और 2000 में यह सामान्य से कम थी। लेकिन बीते 9 साल में मानसून का पैटर्न फिर बदल रहा है।

