मध्य प्रदेश का बड़ा मुद्दा : मैंटिनेंस के नाम पर उद्योगों से होती है दोहरी टैक्स वसूली, निर्यात के लिए सरकार से नहीं मिलती मदद
अधिकारियों की कार्य संस्कृति में लाना होगा सुधार, ऐसा हुआ तो मध्य प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां सर्वाधिक निवेश होता है।
By sourabh soni
Publish Date: Tue, 16 Apr 2024 04:09 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 16 Apr 2024 04:09 AM (IST)

HighLights
- सबसे ज्यादा खराब स्थिति विंध्य, महाकोशल और बुंदेलखंड की है।
- यहां निवेश के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है और न ही सरकार का इन क्षेत्रों की ओर ध्यान हैं।
- औद्योगिक घरानों का भरोसा जीतने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल। बीमारू से मध्य प्रदेश विकासशील राज्य श्रेणी में तो आ गया है, लेकिन अब भी उद्योगों को आकर्षित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनी है। मध्य प्रदेश में उद्योगों से मैंटिनेंस के नाम पर दोहरी टैक्स वसूली होती है। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश से निर्यात के लिए कोई बेहतर व्यवस्था भी नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है अधिकारियों की मनमानी कार्यशैली।
जिसके चलते निवेशक हताश और निराश होकर मध्य प्रदेश में निवेश से पीछे हट जाता है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति विंध्य, महाकोशल और बुंदेलखंड की है। यहां निवेश के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है और न ही सरकार का इन क्षेत्रों की ओर ध्यान हैं। जनप्रतिनिधि इस दिशा में पहल करें हैं तो निश्चित ही मध्य प्रदेश में औद्योगिक वातावरण ओर बेहतर होगा।
हालांकि ऐसा भी नहीं है कि प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र में कुछ भी नहीं हुआ हो। प्रदेश में उद्योग मित्र माहौल का ही परिणाम है कि पिछले 10 वर्षों में यहां तीन लाख करोड़ के उद्योग धंधे लगे और दो लाख युवाओं को रोजगार मिला। उद्योगों के लिए आवश्यक सड़क, बिजली, पानी, और अधोसंरचना सहित सुशासन के हर पैमाने में मध्य प्रदेश निवेशकों के लिए पहली पसंद बन रहा है।
औद्योगिक घरानों का भरोसा जीतने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, बिना अनुमति उद्योग की स्थापना सहित जो वादे उद्योग जगत से किए हैं, उन्हें धरातल पर उतारा जा रहा है। हालांकि अब भी कुछ कमियां है, जैसे उद्योगों की स्थापना से जुड़े विभागों के अधिकारियों की कार्य संस्कृति में सुधार लाना पड़ेगा। ऐसा हुआ तो मध्य प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां सर्वाधिक निवेश होता है।
मध्य प्रदेश में 10 साल में 30 लाख 13 हजार 41.607 करोड़ रुपये के 13 हजार 388 निवेश प्रस्ताव आए। इनमें तीन लाख 47 हजार 891.4039 करोड़ रुपये के 762 पूंजी निवेश हुए हैं। इन पूंजी निवेश से प्रदेश में दो लाख सात हजार 49 बेरोजगार को रोजगार मिला है। इसी तरह वर्ष 2007 से अक्टूबर 2016 तक आयोजित इन्वेस्टर समिट के आयोजन पर 50.84 करोड़ रुपये व्यय किए गए और 366 औद्योगिक इकाईयों को 1224 करोड़ रुपये की अनुदान राशि दी गई।

इधर, मध्य प्रदेश से अधिकांश उत्पादों को जीआइ टैग दिलाने भी प्रयास किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) की ब्रांडिंग की जा रही है। इसके लिए अलग से एक सेल गठित किया गया है। इधर, मप्र की औद्योगिक राजधानी इंदौर व मालवा निमाड़ का औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश के राजस्व में 80 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके बाद भी औद्योगिक क्षेत्र आधारभूत संरचना व अन्य सुविधाओं से जूझ रहे हैं।
मप्र में छोटे उद्योगों के लिए वातावरण बनाने की जरूरत
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) का विस्तार सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है। इसे प्राथमिकता में लेकर सरकार वो सभी सुविधाएं उपलब्ध कराए जो छोटे उद्योगों के लिए वातावरण बनाने आवश्यक है। सरकार इस दिशा में आगे भी बढ़ रही है।
194 औद्योगिक क्षेत्र केवल एमएसएमई के लिए बनाए गए हैं और प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर में क्लस्टर बनाए गए हैं। सरकार के अनुसार तीन लाख 54 हजार एमएसएमई इकाइयों को पंजीकृत किया है। इनमें 18.33 लाख नौकरियां उत्पन्न करने की क्षमता है। इसके साथ-साथ ग्रामीण कुटीर उद्योग पर भी फोकस करना होगा। स्थानीय स्तर पर इसको लेकर काफी संभावनाएं भी हैं।
महंगी बिजली और ज्यादा स्टांप ड्यूटी ने रोका उद्योगों का रास्तादिल्ली से नजदीक होने के बाद भी ग्वालियर में उद्योग सिमटते चले गए, लेकिन जैसे ही हवाई सेवाएं धरातल पर आना शुरू हुई तो अब उद्योगपति ग्वालियर में आने का मन बनाने लगे हैं। हालांकि अब भी मध्य प्रदेश शासन की पालिसी उद्योगों के बीच अड़चन बन रही है।
महंगी बिजली और ज्यादा स्टांप ड्यूटी की वजह से उद्योगपतियों यहां निवेश में कम रुचित दिखा रहे हैं। दूसरा बड़ा कारण सुरक्षा व्यवस्था है। मालनपुर औद्योगिक केंद्र में जिस तेजी से उद्योग स्थापित हुए, बंद भी उसी तेजी से हुए। इसकी प्रमुख समस्या सुरक्षा, सफाई न होना और जर्जर सड़कें है।
कुछ बढ़ी कंपनियां दिल्ली से आने वाले समय में अपने उद्योग ग्वालियर में स्थापित कर सकती है। चैंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल बताते हैं कि दिल्ली में मजदूरी प्रति व्यक्ति 21000 रुपये प्रतिमाह है जबकि ग्वालियर में 12000 हजार रुपये है। बढ़ती एयर कनेक्टिविटी उद्योगों के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी।
धरातल पर 3.47 लाख करोड़ का आया पूंजी निवेश
आयोजन स्थल- निवेश संख्या- पूंजी निवेश- रोजगार मिला
– जीआइएस अक्टूबर 2007 – 19- 26,165.35 करोड़ – 7240
– जीआइएस अक्टूबर 2010 – 27- 24883.91 करोड़ – 13,447
– जीआइएस अक्टूबर 2012 – 257- 26929.76 करोड़ – 1,02,425
– जीआइएस अक्टूबर 2014 – 143- 59136.39 करोड़ – 13,863
– जीआइएस अक्टूबर 2016 – 223- 197647.8039 करोड़ – 27,462
– जीआइएस जनवरी 2023 – 93 – 13,128.19 करोड़ – 42,612
कुल निवेश – 762 – पूंजी निवेश – 3,47,891.4039 करोड़ – कुल रोजगार- 2,07,049
मध्य प्रदेश में औद्योगिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। मप्र से निर्यात की व्यवस्था बेहतर करने के लिए सरकार को बंदरगाह (पोर्ट) तक जाने के लिए माल के भाड़े में सब्सिडी की व्यवस्था करनी चाहिए। कुछ राज्यों ने इस दिशा में बेहतर काम किया है। टैक्स की दोहरी व्यवस्था बंद होनी चाहिए। अभी नगर निगम और एमपीआइडीसी दोनों ही मैंटिनेंस के नाम पर टैक्स लेते हैं। औद्योगिक इकाइयों के लिए आवश्यक सामग्री जैसे गैस पर सबसे अधिक भारत में वेट है इसे कम किया जाना चाहिए। राज्य सरकार को बड़े उद्योगों को भी आमंत्रित करना चाहिए, बड़े उद्योग आते हैं तो उसकी मदद के लिए छोटे उद्योगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। – राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष एसोसिएशन आफ आल इंडस्ट्रीज मंडीदीप
मैंटिनेंस के नाम पर उद्योगों से दोहरी टैक्स वसूली की पिछले 15 साल से हो रही है। उद्योग विभाग इसे समाप्त करने के लिए सहमत भी है लेकिन स्थानीय नगर निगम या नगरीय निकाय इसे सहमत नहीं हो रहा है। जिसके चलते प्रदेश में उद्योगपतियों को दोहरा टैक्स का भार उठाना पड़ रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रदेश के उन क्षेत्रों को भी निवेश के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है जहां लोग रोजगार के लिए अन्य राज्यों में पलायन करते हैं। – आरएस गोस्वामी, अध्यक्ष फिक्की, एमपी चेप्टर
सरकार छोटे उद्योगों को नीलामी प्रक्रिया में उलझा देती है, वहीं बड़े उद्योगों को सीधे जमीन मिल जाती है। ऐसे में छोटे उद्योगों को महंगी दरों पर जमीने लेना पड़ रही है। यदि औद्योगिक क्षेत्र के आसपास अस्पताल, स्कूल व लोगों की जरूरत की सुविधाएं मिलें तो वहां काम करने मजदूर व कर्मचारी वर्ग के लिए वहां बसना सुविधापूर्वक हो जाता है। यहां उद्योगों को एक हजार लीटर पानी 50 रुपये 68 पैसे की दर पर दिया जा रहा है। प्रदेश में यह सबसे महंगी दर है। पहले यह नियम था कि औद्योगिक इकाइयों से जो मैंटिनेंस चार्ज लेंगे, उसे वहीं खर्च करेंगे। इस नियम का भी पालन ही नहीं हो रहा है। – गौतम कोठारी, अध्यक्ष, पीथमपुर औद्योगिक संगठन

