Ujjain Lok Sabha Elections 2024: कभी इंदौरी नेता लड़ते थे यहां से चुनाव, अब समीकरण उलटे
लोकसभा चुनाव: उज्जैन कांग्रेस के तीन नेता अलग-अलग सीटों से मैदान में उतरे।
By Sameer Deshpande
Publish Date: Sat, 13 Apr 2024 08:17 AM (IST)
Up to date Date: Sat, 13 Apr 2024 08:17 AM (IST)

HighLights
- लोकसभा क्षेत्र के सक्रिय कांग्रेस के तीन नेता मालवा-निमाड़ क्षेत्र की तीन लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी बना दिए गए हैं।
- इनमें इंदौर, मंदसौर और उज्जैन-आलोट लोकसभा सीट शामिल हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है।
- इस क्षेत्र से कांग्रेस 1999 से लेकर 2014 तक लगातार इंदौर के बड़े नेताओं को चुनाव लड़ाती आई है।
Ujjain Lok Sabha Elections 2024: अमित कसेरा, उज्जैन। सियासत से जुड़े समीकरण कब पलट जाएं, यह कहना कठिन होता है। उज्जैन-आलोट लोकसभा क्षेत्र में इस चुनाव में कुछ ऐसा ही हो रहा है। कभी इस सीट पर कांग्रेस की ओर से इंदौरी नेता अपनी किस्मत आजमाया करता था। पार्टी को कोई स्थानीय चेहरा तक नहीं मिल पाता था, मगर इस बार स्थिति उलट है। लोकसभा क्षेत्र के सक्रिय कांग्रेस के तीन नेता मालवा-निमाड़ क्षेत्र की तीन लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी बना दिए गए हैं। इनमें इंदौर, मंदसौर और उज्जैन-आलोट लोकसभा सीट शामिल हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है।

1999 से लेकर 2019 तक के चुनाव पर नजर
-1999 में कांग्रेस की ओर से तुलसीराम सिलावट ने चुनाव लड़ा। उन्हें भाजपा के सत्यनारायण जटिया ने हराया था।
-2004 में कांग्रेस की ओर से प्रेमचंद गुड्डू चुनाव लड़े। हालांकि उन्हें भी जटिया ने पराजित किया।
-2009 में एक बार फिर कांग्रेस ने गुड्डू पर भरोसा जताया। इस बार गुड्डू ने सत्यनारायण जटिया को हरा दिया।
-2014 के चुनाव में एक बार फिर गुड्डू मैदान में उतरे। भाजपा की ओर से चुनाव लड़े चिंतामणि मालवीय ने उन्हें शिकस्त दे दी।
-2019 के चुनाव में कांग्रेस ने स्थानीय प्रत्याशी (तराना से) बाबूलाल मालवीय को चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि मालवीय भाजपा के अनिल फिरोजिया से रिकार्ड मतों से चुनाव हार गए।
आखिर क्यों बनी ऐसी स्थिति
इधर नागदा-खाचरौद के विधायक रहे कांग्रेस नेता दिलीप गुर्जर को मंदसौर भेजने के पीछे भी कई कारण रहे। गुर्जर मंदसौर क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। पार्टी के परंपरागत वोट सहित गुर्जर समाज के वोटों को भी साधने की जुगत कांग्रेस नेताओं ने लगाई है। बड़नगर में सक्रिय रहे अक्षय कांति बम को इंदौर से चुनाव लड़ाने के पीछे भी पार्टी की कुछ इसी तरह की रणनीति रही।

