Ambedkar Nagar Constituency: यूपी की अंबेडकर नगर सीट पर 3 दशक से जारी है त्रिकोणीय मुकाबला, 2014 के बाद बदली तस्वीर
वर्ष 1995 में बसपा सरकार ने अंबेडकरनगर जिले का गठन किया तो इसके बाद इसी सीट पर बसपा की पकड़ मजबूत हो गई। साल 2004 तक यहां बसपा का मजबूत पकड़ रही।
By Sandeep Chourey
Publish Date: Sat, 13 Apr 2024 10:13 AM (IST)
Up to date Date: Sat, 13 Apr 2024 10:14 AM (IST)

HighLights
- भाजपा ने बीते चुनाव में बसपा से सांसद चुने गए रितेश पांडेय को इस सीट से प्रत्याशी घोषित किया है।
- समाजवादी पार्टी ने कटेहरी से विधायक और बसपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे लालजी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है।
- बहुजन समाजवादी पार्टी ने नए चेहरे मो. कलाम शाह पर दांव लगाया है।
अभिषेक मालवीय, अंबेडकरनगर। लोकसभा चुनाव में जनता को साधने में राजनीतिक दलों की जोर आजमाइश काफी तेज हो गई है और इस बीच कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला भी देखने को मिल रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश की अंबेडकरनगर सीट ऐसा संसदीय क्षेत्र हैं, जहां बीते 3 दशक से जनता की धुरी बसपा, सपा और भाजपा के बीच ही घूम रही है। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी Ambedkar Nagar Constituency पर सपा, बसपा और भाजपा के प्रत्याशी मैदान में है और एक-दूसरे को जमकर टक्कर दे रहे हैं।
इस बार ऐसा है मुकाबला
भाजपा ने बीते चुनाव में बसपा से सांसद चुने गए रितेश पांडेय को इस सीट से प्रत्याशी घोषित किया है, वहीं समाजवादी पार्टी ने कटेहरी से विधायक और बसपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे लालजी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा बहुजन समाजवादी पार्टी ने नए चेहरे मो. कलाम शाह पर दांव लगाया है।

अंबेडकर नगर सीट का इतिहास
साल 1951 में फैजाबाद पूर्व के नाम से बने लोकसभा क्षेत्र में शुरुआती दो जीत कांग्रेस के खाते में रही थी। कांग्रेस को वर्ष 1962 में अकबरपुर सुरक्षित सीट बनने के बाद जनाधार मिला था। इसके बाद साल 1967 में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने कांग्रेस को मात देते हुए जीत हासिल की थी। इसके बाद वर्ष 1971 में कांग्रेस ने दोबारा इस सीट को अपने कब्जे में कर लिया था। साल 1977 और 1980 में जनता पार्टी व जनता पार्टी (सेक्युलर) की जीत हुई। इस सीट पर 1984 में कांग्रेस को आखिरी बार जीत मिली थी। इस सीट से राम प्यारे सुमन कांग्रेस से आखिरी बार सांसद चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 1989 व 1991 में जनता दल से राम अवध सांसद चुने गए।
जिला बना तो समीकरण भी बदले
वर्ष 1995 में बसपा सरकार ने अंबेडकरनगर जिले का गठन किया तो इसके बाद इसी सीट पर बसपा की पकड़ मजबूत हो गई। साल 2004 तक यहां बसपा का मजबूत पकड़ रही। बसपा प्रमुख मायावती यहां से सांसद चुनी गई थी, इससे पूर्व भी दो बार जनता ने उन्हें सांसद बनाया था, लेकिन किसी भी कार्यकाल को पूरा नहीं कर पाई। सपा प्रत्याशी शंखलाल माझी ने उपचुनाव में जीत हासिल की। साल 2009 में एक बार फिर से बसपा ने इस सीट पर कब्जा कर लिया। बसपा के राकेश पांडेय ने 22 हजार से अधिक मतों से सपा प्रत्याशी को हराया। भाजपा प्रत्याशी विनय कटियार तीसरे स्थान पर रहे।
वर्ष 2014 में भाजपा की पहली जीत
वर्ष 2014 में मोदी लहर के बीच पहली बार लोकसभा चुनाव में भाजपा को इस सीट से जीत मिली। भाजपा प्रत्याशी डॉ. हरिओम पांडेय ने 4,32,104 मत हासिल किए थे। इसके बाद साल 2019 में बसपा ने सपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। बसपा ने राकेश पांडेय के पुत्र रितेश पांडेय को प्रत्याशी बनाया। बसपा प्रत्याशी को 5,64,118 मत मिले थे। भाजपा के मुकुट बिहारी 4,68,238 मतों के साथ दूसरे स्थान पर थे।












.jpg)




