NASA Europa Clipper: बर्फीले पानी में डूबे बृहस्पति के चंद्रमा ‘यूरोपा’ पर बस पाएगा इंसान! पता लगाएगा नासा का यान

इस साल नासा अंतरिक्ष में जीवन की तलाश के लिए क्लिपर स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करेगा। यह बृहस्पति के बर्फीले उपग्रह यूरोपा पर जीवन की संभावनाओं की खोज करेगा।

By Kushagra Valuskar

Publish Date: Fri, 12 Apr 2024 04:24 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 12 Apr 2024 04:27 PM (IST)

NASA Europa Clipper: बर्फीले पानी में डूबे बृहस्पति के चंद्रमा 'यूरोपा' पर बस पाएगा इंसान! पता लगाएगा नासा का यान
यूरोपा में जीवन की संभावना हो सकती है। (फोटो-नासा)

HighLights

  1. नासा का क्लिपर मिशन अक्टूबर में लॉन्च होगा।
  2. बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा यूरोपा पर करेगा स्टडी।
  3. यूरोपा पर पानी की मौजूदगी की संभावना है।

एएफपी, पासाडेना। NASA Europa Clipper Mission: इस साल नासा अंतरिक्ष में जीवन की तलाश के लिए क्लिपर स्पेसक्राफ्ट लॉन्च करेगा। यह बृहस्पति के बर्फीले उपग्रह यूरोपा पर जीवन की संभावनाओं की खोज करेगा। क्लिपर मिशन अक्टूर में लॉन्च होगा। यूरोपा बृहस्पति के 90 से ज्यादा उपग्रहों में से एक है। साइंटिस्टों का मानना है कि यूरोपा बर्फीले पानी में डूबा है। यहां पर जीवन लायक परिस्थितियां हो सकती है। मिशन के प्रोजेक्ट वैज्ञानिक बॉब पप्पलार्डो ने एएफपी ने कहा कि नासा जिन सवालों को जानना चाहती है। क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं? यह उनमें से एक है।

क्या रखा गया है नासा का क्लिपर प्रोब?

क्लिपर प्रोब पांच बिलियन डॉलर की लागत से तैयार किया गया है। इसे कैलिफोर्निया स्थिति नासा की जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी में रखा गया है। इसे जहां रखा गया है वह एरिया पूरा सील है। सिर से पैर तक ढके लोगों को ही जाने की परमिशन है। स्पेसक्राफ्ट संक्रमण से बचा रहे, इसलिए इतनी सावधानी बरती जा रही है। वरना धरती के माइक्रोब्स यूरोपा तक पहुंच सकते हैं।

कब तक यूरोपा के पास पहुंचेगा यान?

फ्लोरिया के कैनेडी स्पेस सेंटर से क्लिपर को लॉन्च होगा। इसके लिए स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह पांच साल की यात्रा शुरू होगा। मंगल ग्रह के पास अपनी स्पीड को बढ़ाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि 2031 तक क्लिपर बृहस्पति और यूरोपा की कक्षा के पास पहुंच जाएगा।

किन उपकरणों से क्लिपर लैस है?

नासा के अनुसार, क्लिपर में कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर्स, मैग्नेटोमीर और रडार जैसे उपकरण लहे हैं। ये बर्फ में जा सकते हैं और पानी पर तैर सकते हैं। एसेंजी को क्लिपर प्रोब मिशन से यूरोपा पर जीवन की तलाश में है। वैज्ञानिकों को रिचर्स से पता चला है कि छोटे जीव प्रतिकूल परिस्थितियों में जिंदा रह सकते हैं।

यूरोपा पृथ्वी के चंद्रमा के बराबर है। वहां की परिस्थितियां धरती के समान होने की संभावना है। हालांकि यूरोपा पर जीवन की खोज करना आसान नहीं है, क्योंकि यहां चारों तरफ रेडिएशन फील्ड है। इससे क्लिपर के उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है। पृथ्वी से यूरोपा 628.3 मिलियन किमी दूर है। क्लिपर जो डेटा भेजेगा वह नासा के मिशन कंट्रोल के पास 45 मिनट बाद पहुंचेगा।