Warmth Wave Alert: राजधानी दिल्ली के साथ गुजरात में चलेगी लू, इन राज्यों में आज हो सकती है बारिश

IMD का अनुमान है कि महाराष्ट्र के कई जिलों में आज बारिश हो सकती है। 13-16 अप्रैल के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में गरज के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है।

By Sandeep Chourey

Publish Date: Wed, 10 Apr 2024 08:36 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 10 Apr 2024 08:36 AM (IST)

Heat Wave Alert: राजधानी दिल्ली के साथ गुजरात में चलेगी लू, इन राज्यों में आज हो सकती है बारिश
मध्य प्रदेश में कटनी, उमरिया, सिवनी, शहडोल, बैतूल, दमोह, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और सीहोर में बारिश होने की संभावना है।

HighLights

  1. पश्चिमी विक्षोभ की शुरुआत के साथ 8 अप्रैल से कई राज्यों में पारा मामूली रूप से गिर गया है।
  2. 10 अप्रैल को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में बारिश की संभावना है।
  3. पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 10 अप्रैल को ओलावृष्टि, तूफानी हवा चलने या बिजली गिरने और मध्यम बारिश होने की संभावना है।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। देश के कई हिस्सा में सूरज के तपिश बढ़ने लगी है और इस कारण उत्तर भारतीय राज्यों में लू चलने के आसार हैं। इसके अलावा मौसम विभाग ने कुछ राज्यों में हल्की बारिश होने की भी संभावना जताई है। मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के कारण कुछ राज्यों में तापमान में गिरावट भी महसूस की जाएगी। सौराष्ट्र और कच्छ में लू का प्रकोप जारी रह सकता है। राजधानी दिल्ली का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है।

इन राज्यों में होगी बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ की शुरुआत के साथ 8 अप्रैल से कई राज्यों में पारा मामूली रूप से गिर गया है। 10 अप्रैल को भी महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में बारिश और तूफान की संभावना है।

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मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 10 अप्रैल को ओलावृष्टि, तूफानी हवा चलने या बिजली गिरने और मध्यम बारिश होने की संभावना है। मध्य प्रदेश में कटनी, उमरिया, सिवनी, शहडोल, बैतूल, दमोह, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और सीहोर में बारिश होने की संभावना है। IMD का अनुमान है कि महाराष्ट्र के कई जिलों में आज बारिश हो सकती है। 13-16 अप्रैल के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में गरज के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है।

हिमाचल व उत्तराखंड में ओलावृष्टि की संभावना

मौसम विभाग के अनुसार, 13 अप्रैल को राजस्थान में धूल भरी आंधी चल सकती है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ओलावृष्टि होने की संभावना है। आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने कहा है कि तूफान और बारिश की गतिविधियों के कारण कर्नाटक में तापमान गिर सकता है।

World Homeopathy Day 2024: कैंसर, अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हो रहा होम्योपैथी से

विश्व होम्योपैथी दिवस, शहर में इस पैथी से इलाज के लिए अन्य प्रदेश गुजरात, राजस्थान, बिहार, झारखंड आदि से भी मरीज आने लगे हैं।

By Sameer Deshpande

Publish Date: Wed, 10 Apr 2024 08:07 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 10 Apr 2024 08:07 AM (IST)

World Homeopathy Day 2024: कैंसर, अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हो रहा होम्योपैथी से
विश्व होम्योपैथी दिवस

HighLights

  1. होम्योपैथी से इलाज को लेकर आज भी लोगों में कई प्रकार की भ्रांतियां हैं।
  2. उन्हें ऐसा लगता है कि यह पैथी स्लो है और इससे मरीज को ठीक होने में समय लग जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है।
  3. एलोपैथी, आयुर्वेद के साथ ही अब इस पैथी से भी इलाज करवाने वालों की संख्या बढ़ रही है।

World Homeopathy Day 2024: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। होम्योपैथी से इलाज को लेकर आज भी लोगों में कई प्रकार की भ्रांतियां हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि यह पैथी स्लो है और इससे मरीज को ठीक होने में समय लग जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। एलोपैथी, आयुर्वेद के साथ ही अब इस पैथी से भी इलाज करवाने वालों की संख्या बढ़ रही है। कोरोनाकाल के बाद होम्योपैथी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ने लगा है।

पहले जहां बुजुर्ग ही इस पैथी से इलाज करवाते थे, अब बच्चे और बड़ी संख्या में युवा भी इस पैथी को अपनाने लगे हैं। कैंसर, सिकलसेल, अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज भी होम्योपैथी से इलाज करवा रहे हैं। खास बात है कि इसकी दवा का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होम्योपैथी चिकित्सा में लगातार हो रहे रिसर्च के परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। हमारे शहर में इस पैथी से इलाज के लिए अन्य प्रदेश गुजरात, राजस्थान, बिहार, झारखंड आदि से भी मरीज आने लगे हैं।
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मरीजों के स्वस्थ होने की बानगी

डेढ़ साल के बच्चे का अप्लास्टिक एनीमिया हुआ ठीक

बिहार दरभंगा के डेढ़ वर्षीय शिवांश को अप्लास्टिक एनीमिया था। स्वजन कई डाक्टरों से इलाज करवा चुके थे, लेकिन आराम नहीं मिल रहा था। बच्चे का होम्योपैथी से उपचार चलने के बाद अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है। अब उसे दवाएं भी नहीं लेनी पड़ रही है।

प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित 81 वर्षीय मरीज हुए स्वस्थ

81 वर्षीय बुजुर्ग को प्रोस्टेट कैंसर की शिकायत थी। जिसके कारण वह लंबे समय से परेशान थे। इसके बाद किसी की राय के बाद होम्योपैथी पद्धति से इलाज करवाया। वह धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगे और अब वह सामान्य जीवन जी रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

होम्योपैथी से इलाज लेने वाले मरीजों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। खासकर कोरोना के बाद मधुमेह के मरीज भी इस पैथी से इलाज करवाने लगे हैं। साइड इफेक्ट से बचाव के लिए इस पैथी से इलाज करवाने के लिए मरीज आ रहे हैं। खासबात है कि अब बच्चों का इलाज करवाने के लिए स्वजन लाने लगे हैं।

– डा. शालिनी तिवारी, होम्योपैथ

कोरोना के बाद होम्योपैथी से इलाज करवाने वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। शहर में देशभर से मरीज अब इलाज करवाने के लिए आने लगे हैं। पहले जहां बुजुर्ग इस पैथी से इलाज करवाते थे, लेकिन अब बच्चे और बड़ी संख्या में युवा भी इस पैथी को अपनाने लगे हैं।

– डा. एके द्विवेदी, होम्योपैथ

Bhopal Information: जिस नाबालिग को पढ़ाने के लिए घर में रखा, उसी ने डकैतों के साथ मिलकर लुटवाया घर

एएसीपी अंजली रघुवंशी ने बताया कि नाबालिग नौकर पर किसी को शंका नहीं हो, इसके लिए डकैतों से नाबालिग नौकर ने खुद को पिटवाया और खुद को नीचे के बगल के कमरे में बंद करा लिया था।

By Hemant Kumar Upadhyay

Publish Date: Wed, 10 Apr 2024 07:02 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 10 Apr 2024 07:02 AM (IST)

Bhopal News:  जिस नाबालिग को पढ़ाने के लिए घर में रखा, उसी ने डकैतों के साथ मिलकर लुटवाया घर

HighLights

  1. घर के 15 साल के नौकर और ड्राइवर ने रायसेन के बदमाशों के साथ मिलकर रची साजिश
  2. वारदात में घर के नाबालिग नौकर की सबसे अहम भूमिका थी,
  3. नौकर दंपती के डकैतों ने हथोड़े से फोड़े सिर

भोपाल। शाहपुरा में जिस मकान में डकैती हुई उस मकान को लुटवाने में घर के 15 वर्षीय नाबालिग नौकर की सबसे अहम भूमिका थी, उसे पीड़‍ि‍त परिवार ने पढ़ाने के लिए घर में रखा था, उसने ही डकैतों के लिए घर के मुख्य दरवाजे खोले और – कहा कीमती सामान और रुपये रखा है। उसी ने सारी जानकारी डकैतों को दी।

सबसे चौंकाने वाली बात है कि पीड़‍ित परिवार के लोग उस पर आंख बंद कर भरोसा रखते थे और घर के छोटे मोटे कामों के जरूरत के लिए लगने वाले रुपये अलमारियों से उसी से निकलवाते थे, वह हर चीज पर नजर रखता था कि घर के किस हिस्से में कौन क्या क्या रखता है? वह हर जानकारी से पूरी तरह से अपडेट था।

घर के मुखिया के हाइड्रोलिक पलंग से निकली रकम

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त मलकीत सिंह ने बताया कि जिस मकान में डकैती हुई, उसमें घर के मुखिया के कमरे के हाइड्रोलिक पलंग में रुपये रखे थे। डकैत घर में और घर के मुखिया के कमरे में घुसे। दरवाजा खुला नहीं तो उसे तोड़ा दिया। कमरे के अंदर पहुंचकर हाइड्रोलिक पलंग में बैग में रखे रुपये निकले। बाद कमरे में रखी एक और लोहे की अलमारी खोलने की कोशिश हुई,लेकिन वह खुली नहीं उसे तोड़ने की भी कोशिश की गई। सारा लूटा सामान बोरियां में भरकर ले गए।

बदमाशों ने हथौड़े से नौकर दंपती के सिर फोड़े

डकैतों में घर में घुसने के बाद घर के नौकर मूलत: सतना निवासी 48 वर्षीय धर्मेंद्र परिहार और उसकी 42 वर्षीय पत्नी सुमन परिहार के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। जब धर्मेंद्र परिहार ने विरोध किया तो डकैतों ने उस पर हथौड़े से हमला कर दिया। आरोपितों ने उसे और उसकी पत्नी सुमन पर हथौड़े से वार किए। इससे उसके सिर से खून निकलने लगा। बाद में दोनों को नीचे के कमरे में बंद कर दिया। इस डकैती में पुलिस ने नौकर धर्मेंद्र परिहार को ही फरियादी बनाया और उसकी शिकायत पर आइपीसी 397 डकैती की धाराओं में एफआइआर दर्ज की है।

शक हो न हो तो नाबालिग ने खुद को पिटवाया और कमरे में बंद कराया

एएसीपी अंजली रघुवंशी ने बताया कि नाबालिग नौकर पर किसी को शंका नहीं हो, इसके लिए डकैतों से नाबालिग नौकर ने खुद को पिटवाया और खुद को नीचे के बगल के कमरे में बंद करा लिया था। इससे उस पर किसी को शंका नहीं हो हो। इस पूरी साजिश में नाबालिग का चचेरा भाई लक्ष्मण सिंह भी शामिल है। वह पहले रेलवे में संविदा पर था, वहां से निकालने के बाद वह वह पीड़‍ित परिवार में ड्राइवरी की नौकरी कर रहा था।

बहन के बर्थडे का डिनर करने जहांनुमा रिट्रीट में गए थे

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शाहपुरा सी सेक्टर निवासी 59 वर्षीय ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह अपनी अपनी पत्नी सविता सिंह, बेटी डाॅ अंशुल और दूसरी बेटी प्रियंल के साथ जहांनुगमा रिट्रीट में खाना खाने गए थे। उनकी छोटी बेटी प्रियंल का जन्मदिन सात अप्रैल को था। अमूमन हर साल उनका परिवार जन्मदिन पर केक काटने के बाद दूसरे दिन घर के सभी स्वजन खाना खाने के लिए बाहर जाते हैं। घर के नौकरों के लिए बाहर से खाने का आर्डर किया जाता है।

यह नाबालिग नौकर को मालूम था। हम सोमवार रात में जब खाना खाने जा रहे थे तो नाबालिग नौकर उनकी सारी हरकत को देख रहा था। वे लोग घर से करीब साढ़े नौ बजे पौने दस के बीच घर से निकले हाेंगे और रात में साढ़े ग्यारह बजे तक वापस आ गए थे। आने के बाद उनको हैरानी हुई कि उनके विदेशी नस्ल के दोनों गोल्डन रिटीवर श्वान भौंके नहीं। अंदर देखा तो ज्ञानेंद्र प्रताप के कमरे का दरवाजा टूट पड़ा था और कमरे का पूरा सामान फैला हुआ था। बाद में जब नौकर धमेंद्र और उसकी पत्नी सुमन को आवाज लगाई तो वह नीचे के कमरे में खून में लथपथ और बंद मिले।

Manoj Bajpayee instructed why he abuses in movies and collection | मनोज बाजपेयी ने बताया फिल्मों-सीरीज में क्यों देते हैं गालियां: बोले- ऐसा करना सही नहीं लगता है, स्क्रिप्ट के आगे मजबूर हूं

मुंबई38 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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मनोज बाजपेयी की एक्टिंग के अलावा फिल्मों और सीरीज में उनकी गालियां भी बड़ी फेमस हैं। उनके इस फ्रस्टेट अवतार को लोग पसंद भी करते हैं। हालांकि स्क्रीन पर गालियां देने में मनोज को कोई आनंद नहीं आता है। उन्हें तो ऐसा करना अच्छा भी नहीं लगता है। मनोज ने कहा कि स्क्रिप्ट की डिमांड ही ऐसी रहती है कि उन्हें ऐसे शब्दों का प्रयोग करना पड़ता है।

मनोज बाजपेयी आज भी थिएटर को काफी मिस करते हैं। मनोज ने कहा कि वो अपने आप को आज भी सिनेमा का एक्टर नहीं मानते। वो खुद को थिएटर एक्टर के तौर पर जानते हैं। प्राची देसाई ने कहा कि जो स्क्रिप्ट वो कई बार पढ़ती हैं, मनोज बाजपेयी उसे कुछ ही बार में पढ़कर समझ लेते हैं।

मनोज बाजपेयी और प्राची देसाई की फिल्म साइलेंस-2, 16 अप्रैल को OTT प्लेटफॉर्म ZEE 5 पर रिलीज होगी। दोनों एक्टर ने फिल्म और अपनी प्रोफेशनल लाइफ के बारे में दैनिक भास्कर से बातचीत की है।

मनोज ने कहा- स्क्रिप्ट की डिमांड की वजह से देनी पड़ती हैं गालियां
वेब सीरीज और फिल्मों में मनोज बाजपेयी की गालियां भी बहुत पॉपुलर हो रही हैं। इस संबंध में मनोज ने हंसते हुए कहा- मैं गालियां देना चाहता तो नहीं हूं, लेकिन डायरेक्टर्स मुझसे यह निकलवा लेते हैं। लोग अट्रैक्ट हों, इसके लिए कभी गालियां नहीं देता। जब स्क्रिप्ट की मांग रहती है, तभी गालियां ऐड की जाती हैं। जब लगता है कैरेक्टर फ्रस्टेट हो रहा है, तभी वो गालियां देता है।

डायलॉग्स की लाइनें याद करना मुश्किल काम- मनोज
मनोज बाजपेयी ने कहा कि डायलॉग्स की लाइंस याद करना सबसे मुश्किल काम होता है। इस फिल्म की डायरेक्टर अबान बहुत डीटेल्ड स्क्रिप्ट लिखती हैं। कई वर्ड तो ऐसे लिखती हैं, जो हमने कभी सुने ही नहीं होते। ऐसे वर्ड को समझना और उसे नेचुरली बोलना सबसे मुश्किल काम है।

अपने रोल में घुस जाते हैं मनोज
डायरेक्टर अबन देव ने कहा- मनोज बाजपेयी सर अपने रोल में घुस जाते हैं, इसका एक उदाहरण बताती हूं। जब मैं साइलेंस-2 की स्क्रिप्ट लिख रही थी तो मनोज सर ने कहा कि मुझे तीन-चार दिन पहले एक फाइनल स्क्रिप्ट दे दीजिएगा ताकि मैं तैयारी कर सकूं।

काम करने के तरीकों में बदलाव करते रहते हैं मनोज
मनोज ने कहा कि वो कभी भी एक प्रोसेस पर ज्यादा नहीं चलते। उन्होंने कहा- मैं समय-समय पर अपने काम करने के तरीकों में बदलाव करते रहता हूं। फिल्म अलीगढ़ में मेरा काम करने का जो प्रोसेस था, वो मैं साइलेंस में अप्लाई नहीं कर सकता। दोनों का जॉनर डिफरेंट है। दोनों के कैरेक्टर डिफरेंट हैं।

अजहर की वाइफ का किरदार निभाना चुनौती थी- प्राची देसाई
प्राची देसाई ने भी अपनी एक्टिंग प्रोसेस पर बात की। उन्होंने कहा- फिल्म अजहर में मैंने मोहम्मद अजहरुद्दीन की वाइफ का किरदार निभाया था। उन्हें किसी ने ज्यादा देखा नहीं था। उनका किरदार निभाना अपने आप में एक चुनौती थी। अजहरुद्दीन को तो सभी जानते थे, लेकिन उनकी पहली वाइफ ज्यादातर पर्दे में ही रहती थीं। अगर आप साइलेंस में मेरे कैरेक्टर की बात करें तो यह एक रियल लाइफ किरदार नहीं है, फिर भी इसमें काफी कुछ अलग करना पड़ा।

प्राची ने यहां मनोज बाजपेयी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा- जो स्क्रिप्ट हम 20 बार में भी पढ़कर नहीं समझ पाते हैं, वो मनोज सर 10 बार में ही समझ जाते हैं।

मनोज बाजपेयी के ऊपर पीयूष पांडे ने एक किताब लिखी है। उस किताब में एक जगह जिक्र है कि मनोज को NSD में एडमिशन नहीं मिल रहा था। तभी रॉबिन दास ने उन्हें एक नाटक में काम दिया। मनोज ने उस नाटक में ऐसा काम किया कि रॉबिन दास ने NSD के स्टूडेंट्स को बुलाकर कहा कि देखो इसे कहते हैं एक्टिंग।

खुद को आज भी थिएटर का एक्टर मानता हूं
मनोज ने यह बात सुनी तो कहा कि वो अभी भी थिएटर को काफी मिस करते हैं। उन्होंने कहा- मैं आज भी अपने आप को सिनेमा का एक्टर कंसीडर नहीं करता हूं। मैं थिएटर का एक्टर हूं, मुझे आज भी जरूरत रहती है तो थिएटर के ट्रिक्स ही इस्तेमाल करता हूं। आज भी मुझे मौका मिला तो थिएटर जरूर करूंगा। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि मैं थिएटर को जितना एन्जॉय करता था, उतना सिनेमा को नहीं करता।

मनोज कहते हैं कि उन्हें OTT का सितारा कहना सही नहीं होगा। भले ही उन्होंने पिछले कुछ सालों में ज्यादातर OTT बेस्ड फिल्में और सीरीज में काम किया है, लेकिन ऐसा नहीं है कि वो इसी में सिमट कर रह गए हैं।

प्राची ने कहा- आर्टिस्ट के लिए लुक और फिजिक अहम
प्राची देसाई ने इंटरव्यू के दौरान अपनी डाइट पर भी बात की। उन्होंने कहा- आर्टिस्ट के लिए लुक और फिजिक बहुत मायने रखता है। उन्हें इसके लिए काफी नियमित भी होना पड़ता है।

काफी साल पहले डिनर करना छोड़ चुके हैं मनोज
मनोज बाजपेयी ने कहा- मैंने काफी साल पहले से डिनर करना छोड़ दिया है। पहले बड़ी दिक्कतें होती थीं, बाद में सब सही हो गया। अब तो खाने का मन भी नहीं करता।

मनोज ने इंटरव्यू के अंत में कहा कि प्राची देसाई अपने हेल्थ और रुटीन को लेकर काफी सीरियस हैं। मनोज ने कहा- हम लोग तो सेट पर खूब मटन चिकन खाते थे, लेकिन प्राची सिर्फ सैंडविच खाकर ही रहती थीं। प्राची और अबान ने कहा कि मनोज बाजपेयी सेट पर काफी टेस्टी मटन बनाते थे।

शिव ज्योति अर्पणम महोत्सव : उज्जैन में पांच लाख दीपों से दमका शिप्रा का राम घाट

शिप्रा नदी के घाट पर पूरा कार्यक्रम उज्जैन नगर निगम की ओर से जीरो वेस्ट इवेंट के रूप में हुआ।

By Prashant Pandey

Publish Date: Tue, 09 Apr 2024 08:48 PM (IST)

Up to date Date: Wed, 10 Apr 2024 06:20 AM (IST)

शिव ज्योति अर्पणम महोत्सव : उज्जैन में पांच लाख दीपों से दमका शिप्रा का राम घाट
उज्जैन में शिप्रा नदी का राम घाट दीपों से जगमगा उठा।

HighLights

  1. प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल के सुमधुर गीतों ने कार्यक्रम की रंगत ओर बढ़ा दी।
  2. जय महाकाल, हर-हर शिप्रा के उद्घोष से समूचा क्षेत्र देर तक गूंजता रहा।
  3. दत्त अखाड़ा घाट पर आकर्षक लाइट और रंग-बिरंगी लिग्गियां लगाई गई थी।

Shiv Jyoti Arpanam Mahotsav 2024: नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मोक्षदायिनी शिप्रा नदी का किनारा मंगलवार शाम एक साथ प्रज्ज्वलित किए पांच लाख दीपों से जगमगा उठा। शंख, डमरू, झांझ की ध्वनि, भव्य आतिशबाजी और फिर प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल के सुमधुर गीतों ने कार्यक्रम की रंगत ओर बढ़ा दी। जय महाकाल, हर-हर शिप्रा के उद्घोष से समूचा क्षेत्र देर तक गूंजता रहा।

विक्रम संवत 2081 का दीपों की रोशनी से जगमगाते क्षिप्रा के घाट स्वागत कर रहे हैं।

बाबा महाकाल की नगरी आनंदित है; सभी दिशाओं में हर्ष और उल्लास है।#DrMohanYadav#CMMadhyaPradesh pic.twitter.com/LM8PYjv2On

— Dr Mohan Yadav (Modi Ka Parivar) (@DrMohanYadav51) April 9, 2024

कार्यक्रम ‘शिव ज्योति अर्पमण् महोत्सव’ के नाम से रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट पर हुआ था, जिसके साक्षी हजारों लोग बने। पूरा कार्यक्रम नगर निगम की ओर से जीरो वेस्ट इवेंट के रूप में हुआ। नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक ने बताया कि जीरो वेस्ट इवेंट से तात्पर्य ये है कि कार्यक्रम में उपयोग लाई गई हर सामग्री को पुन: उपयोग में लेने को तत्काल एकत्रित किया गया।

फिर वो चाहे दीये हो, तेल हो, प्लास्टिक की बोतल हो या रूई बाती आदि। कहा गया कि तेल का उपयोग कपिला गोशाला में किया जाएगा और प्लास्टिक की बोतल, दीये से सुंदर कलाकृतियां बनाई जाएंगीं।

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उज्जैन में चैत्र नवरात्र के पहले दिन शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में दीपमालिका प्रज्वलित की गई।

रिकार्ड बनना था, मगर…

मालूम हो कि ‘शिव ज्योति अर्पमण् महोत्सव’ की सफलता के लिए स्थानीय प्रशासन महीनेभर से ताकत झोंक रहा था। महीनेभर पहले घाट पर 25 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाने की घोषणा हुई थी मगर आचार संहिता और अन्य कारणों से इसे पांच लाख किया गया। इसके पहले वर्ष 2023 के शिव ज्योति अर्पमण् महोत्सव में यहां 18 लाख 82 हजार दीप, वर्ष 2022 में 11 लाख 71 हजार दीप एक साथ प्रज्ज्वलित करने का विश्व रिकार्ड बनाया गया था। दोनों वर्ष कार्यक्रम महाशिवरात्रि पर हुआ था। इस बार ये गुड़ी पड़वा पर किया गया। लोकसभा चुनाव आचार संहिता प्रभावशील रहने से कार्यक्रम के मंच से राजनीतिक दल के नेताओं और जनप्रतिनिधियों की दूरी भी देखने को मिली।

यह भी जानिये

शिव ज्योति अर्पणम महोत्सव के लिए कार्यक्रम स्थल रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट पर आकर्षक लाइट और रंग-बिरंगी लिग्गियां लगाई गई थी। आयुक्त आशीष पाठक ने बताया कि तय समय अनुसार छह हजार वालेंटियर ने एक साथ एक समय पर पांच लाख दीप प्रज्ज्वलित किए थे। भीड़ प्रबंधन की द्ष्टि से प्रशासन ने शंकराचार्य चौराहा से छोटी रपट, दानीगेट मार्ग, गुदरी से रामानुज कोट तक, दानीगेट से रामानुज कोट मार्ग पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर रखा था। वाहनों की पार्किंग कार्तिक मेला मैदान पर रखी थी।

मंचीय प्रस्तुति को मंच से दूर बैठे लोगों ने विभिन्न स्थलों पर लगाई 14 एलईडी बिग स्क्रीन पर देखा। घाट पर पेयजल, अग्नि सुरक्षा, सफाई व्यवस्था के बेहतर इंतजाम देखने को मिले। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरे वक्त तैनात रही। कार्यक्रम स्थल पर मतदाता जागरूकता आधारित गतिविधि हुई। लोकसभा चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन न हो, ये सुनिश्चित करने में अफसर निगाह जमाए रहे।

Amar Singh Chamkila Film Story; Director Imtiaz Ali | Diljit Dosanjh Parineeti Chopra | ‘चमकीला’ से 4 साल बाद डायरेक्टर इम्तियाज अली का कमबैक: पंजाबी सिंगर की जिंदगी पर बनी है फिल्म, खालिस्तानी आतंकियों ने गोली मारी थी

10 मिनट पहले

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तारीख: 8 मार्च 1988 स्थान: मोहशमपुर (पंजाब)

गांव में मंच सजा था। उस पर म्यूजीशियन बैठे थे। मंच के सामने लोगों की भीड़ जमा थी। सब अपने फेवरेट लोक गायक अमर सिंह चमकीला का इंतजार कर रहे थे। मंच से एंकर ने ऐलान किया। दिल थाम के बैठिए आपके पसंदीदा गायक चमकीला मंच पर आ रहे हैं।

चमकीला अपनी पत्नी अमरजोत के साथ मंच के बाईं ओर से चढ़ रहे थे। इसी दौरान कुछ बाइक सवार आए और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में चमकीला और अमरजोत की मौके पर ही मौत हो गई। फायरिंग का आरोप खालिस्तान समर्थकों पर लगा।

90 के दशक में पंजाब में अमर सिंह चमकीला सबसे लोकप्रिय नाम था। हर कोई उनके गाने और लाइव परफॉर्मेंस सुनना चाहता था। उन पर आरोप था कि वह अश्लील गाने गाते हैं, इस वजह से एक वर्ग उनसे नाराज भी था। चमकीला की हत्या के 36 साल बाद उनके जीवन पर इम्तियाज अली ने फिल्म बनाई है। ‘अमर सिंह चमकीला’ नाम की यह फिल्म 12 अप्रैल को OTT पर रिलीज होगी।

फिल्म में चमकीला का किरदार पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ और उनकी पत्नी का किरदार परिणीति चोपड़ा निभा रही हैं। फिल्म से 4 साल बाद डायरेक्शन में वापसी कर रहे इम्तियाज अली ने भास्कर से फिल्म की मेकिंग और चमकीला के बारे में बात की…

इस फिल्म में दिलजीत और परिणीति पहली बार साथ नजर आएंगे।

इस फिल्म में दिलजीत और परिणीति पहली बार साथ नजर आएंगे।

सवाल: अमर सिंह चमकीला, पंजाब का वो सितारा जिसे वहां के लोग तो जानते हैं पर दुनिया नहीं जानती। इस कहानी तक आप कैसे पहुंचे ?
जवाब: मेरे कुछ दोस्तों ने मुझे तकरीबन 15 साल पहले चमकीला के बारे में बताया था। उस वक्त मुझे उनके किरदार, उनके संगीत, उनके लिरिक्स और गानों ने बहुत आकर्षित किया। धीरे-धीरे मुझे यह ख्याल आया कि इन पर फिल्म बनेगी तो बहुत इंट्रेस्टिंग बन सकती है।

इसके बाद मैंने खुद रिसर्च करना शुरू किया। उन लोगों से मिला जो उनकी जिंदगी में थे और उनके आस-पास हुआ करते थे, तो मुझे लगा कि इनकी जिंदगी में कोई ऐसी बात है जो मैं कहना चाहता हूं… फिर मैंने इस फिल्म पर काम शुरू किया।

सवाल: इस फिल्म के गानों को आपने लाइव शूट किया है। वो कैसे अलग एक्सपीरियंस रहा?
जवाब: शूटिंग के दौरान हमने गाने लाइव शूट किए हैं। ठीक वैसे ही जैसे पूरी फिल्म शूट की जाती है। यह बताैर डायरेक्टर मेरे लिए इंट्रेस्टिंग था कि आप बोल रहे हो और फिर गा रहे हो। मेरे मन में यह बात थी कि अगर आप सिंगर की लाइफ पर फिल्म बना रहे हैं तो उनकी जिंदगी में ऐसी कई सिचुएशन आती हैं जब वो रिहर्सल करते या कंपोज करते हैं तब वो गा भी रहे होते हैं और बात भी करते हैं।

लाइव शोज जब लोग करते हैं तो उसमें बोलना और गाना साथ होता है। हमने इस फिल्म के लिए कई लाइव शो सीक्वेंस भी शूट किए। मैं हमेशा ऐसे एक्टर की तलाश में था जो गायक भी हो। मेरे ख्याल से यह ऑडियंस के लिए भी काफी इंट्रेस्टिंग रहेगा।

जब हम बात करते हैं तो हमारी आवाज होती है पर जब एक एक्टर गाता है तो रफी साहब, किशोर कुमार और अरिजीत की आवाज आ जाती है तो अलग लगता है। ऐसे में पॉसिबल है कि थोड़ा डिस्कनेक्ट हो जाए। तो एक गायक की फिल्म है और उसमें एक्टर ही गा रहा है तो उसका मजा थोड़ा ज्यादा होगा।

फिल्म में कई लाइव शो सीक्वेंस हैं। इन सीक्वेंस में गानों को लाइव ही रिकॉर्ड किया गया है।

फिल्म में कई लाइव शो सीक्वेंस हैं। इन सीक्वेंस में गानों को लाइव ही रिकॉर्ड किया गया है।

सवाल: आज जहां बाकी डायरेक्टर्स बड़े-बड़े सेट क्रिएट करना प्रिफर करते हैं वहां आपने इस फिल्म को रियल लोकेशन पर क्यों शूट किया?
जवाब: मुझे लगता है कि जिस तरह से सत्य का अपना एक पावर होता है उसी तरह एक रियल लोकेशन की भी रियल वाइब होती है जिसे आप अपनी फिल्म में कैप्चर कर सकते हैं। अगर इमैजिन करने से बेहतर आपको वो रियल लोकेशन ही मिल जाए तो बुराई क्या है ?

इससे कहानी ज्यादा इंट्रेस्टिंग बनती है और मैं पर्सनली हमेशा रियल लोकेशन शूट ही प्रिफर करता हूं।

‘चमकीला’ मेरी पहली बायोपिक है, जो किसी की जिंदगी पर आधारित है। मेरी ख्वाहिश थी कि मैं उन जगहों पर जाऊं जहां पर वो किस्से घटे हैं जो हम फिल्म में दिखा रहे हैं, इसलिए हम पंजाब आए हैं।

सवाल: क्या यह फिल्म चमकीला के दौर यानी 80 के दशक के पंंजाब के सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं को भी पेश करती है?
जवाब: यह एक पर्सनल फिल्म है। इसको कहने का जो स्टाइल है वो भी पर्सनल है। इसमें हम कोई पॉलिटिकल या सोशियाे पॉलिटिकल स्टेटमेंट नहीं दे रहे हैं। मगर मैंने इसको पॉलिटिकली और सोशियली ऑथेंटिक बनाने की कोशिश की है ताकि यह कहानी ज्यादा इंट्रेस्टिंग हो सके।

जो संदर्भ है जिसमें यह कहानी कही जा रही है। जो उस समय का सच है वो बहुत जरूरी था इस फिल्म के लिए। जैसा कि आपने कहा कि यह फिल्म 80 के दशक का पंजाब दिखाती है। वो वक्त पंजाब के लिए, पूरे हिंदुस्तान के लिए बहुत ही ड्रामेटिक फेज में था। उस समय ही चमकीला अपने शिखर पर था। सारे लोग उसके गाने सुन रहे थे।

इस हाई और लो को ही हमने इस फिल्म में साथ रखने की काेशिश की है। इसमें पॉलिटिकल स्टेटमेंट कोई नहीं है पर कहानी के बैकग्राउंड में आपको वो पॉलिटिक्स जरूर नजर आएगी। बिना किसी जजमेंट के उस वक्त की सोशियो पॉलिटिकल और कल्चरल सिचुएशन की झलक जरूर मिलेगी।

इस फिल्म का म्यूजिक एआर रहमान ने कंपोज किया है। वहीं इसके लिरिक्स इरशाद कामिल ने लिखे हैं।

इस फिल्म का म्यूजिक एआर रहमान ने कंपोज किया है। वहीं इसके लिरिक्स इरशाद कामिल ने लिखे हैं।

सवाल: आपके मुताबिक एक लोक गायक कैसे लोगों के दिलों में जगह बनाता है?
जवाब:
चमकीला जिन लोगों के लिए गाने बनाते थे उनके पास एंटरटेनमेंट का कोई साधन नहीं था। वो अखाड़े (लाइव शो) देखने आते थे क्योंकि ना उनके पास रेडियाे था, न टीवी और ना ही पैसे थे कि वो किसी और तरीके से मनोरंजन कर सकें।

सबसे गरीब और पिछड़े जो लोग थे वही चमकीला के गानों से एंटरटेन होते थे। लोक गायक की यही पहचान होती है कि लोग उसे भले ही शक्ल से ना पहचानें, पर वो उनके दिलों में बसता है।

चमकीला, ग्रास रूट लेवल पर इतने पॉपुलर इसलिए थे क्योंकि वे लोगों की भाषा में बात करते थे। उनके बारे में बोलते थे और इसी वजह से लोग चमकीला को अपना मानते थे। वे ग्रास रूट लेवल पर इतना पॉपुलर थे कि उनको एल्विस ऑफ पंजाब कहा जाता है।

कहा जाता है कि उनके जितने रिकॉर्ड्स आज तक किसी भी पंजाबी सिंगर के नहीं बिके हैं। पंजाब के कई सिंगर्स आज भी अपने शोज की शुरुआत चमकीला के गाने से करते हैं।

पत्नी अमरजोत के साथ परफॉर्म करते असल अमर सिंह चमकीला। 80 के दशक में वो पंजाब के मशहूर लोक गायक थे।

पत्नी अमरजोत के साथ परफॉर्म करते असल अमर सिंह चमकीला। 80 के दशक में वो पंजाब के मशहूर लोक गायक थे।

सवाल: आपने अभी एक सीन शूट किया जिसमें चमकीला कोई और गाना गाना चाहते हैं और भीड़ उनसे किसी और तरह के गानों की फरमाइश कर रही है। तो एक आर्टिस्ट की अपनी पसंद कि वाे क्या गाना चाहता है। वो सोशियो पॉलिटिकली करेक्ट होना चाहता है पर जनता की डिमांड के आगे नहीं हो पाता। ये जो कॉन्फ्लिक्ट है चमकीला की जिंदगी में वो कैसा है?
जवाब: चमकीला की जिंदगी में यह कॉन्फ्लिक्ट ऐसा था कि इस कॉन्फ्लिक्ट ने आखिरकार उनकी जान ले ली। चमकीला को मालूम था कि अगर वो इस तरह के गाने गाते रहेंगे तो शायद उनकी जान जा सकती है। उनको चेतावनियां दी गई थीं।

मगर चमकीला की एक फितरत थी कि वाे जनता को कभी निराश नहीं कर सकते थे। आखिरकार उन्होंने जनता की डिमांड के आगे वैसे गाने फिर से गाने शुरू कर दिए जो उन्होंने छोड़ दिए थे।

उनके गाने बहुत हिट थे, पर एक वक्त पर उन्होंने तय कर लिया था कि वे ऐसे गाने नहीं गाएंगे और उन्होंने धार्मिक गाने बनाने शुरू कर दिए थे। उनके धार्मिक गाने उनके दूसरे गानों से ज्यादा बड़े हिट हो गए थे। वे गाने आज भी गुरुद्वारों के फंक्शन में बजते हैं।

ये गाने भले ही पॉपुलर हैं, पर जनता तो जनता है, उन्हें दूसरे भी गाने सुनने थे। तो अगर चमकीला को सेफ प्ले करना होता तो वे दोबारा वैसे गाने फिर से नहीं गाते जिनके चलते उनकी जान गई।

यह फिल्म 12 अप्रैल को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।

यह फिल्म 12 अप्रैल को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।

सवाल: आपका मूवी बनाने का प्रोसेस क्या है?
जवाब: जब फिल्म बननी शुरू होती है तो मुझे खुद पता नहीं होता कि वो बननी शुरू हो चुकी है। एक वक्त आता है जब वो कहानी का रूप ले लेती है। आप उसे सबको सुनाना शुरू कर देते हो। ऑटो में जा रहे हो तो ऑटोवाले को ही कहानी सुनाने लगते हो।

धीरे-धीरे एक समय आता है जब कहानी दिल और दिमाग में बीमारी की तरह फैल जाती है तब जाकर आप उसकी राइटिंग शुरू कर देते हैं। फिर उस कहानी को स्क्रिप्ट का रूप दिया जाता है और अंत में पता चलता है कि आप उस कहानी पर फिल्म बना रहे हैं।

सवाल: पर्सनली आपको ओटीटी ज्यादा पसंद है या फिर सिनेमाघर?
जवाब: मुझे सिनेमाघर में फिल्में देखना ज्यादा पसंद है। हालांकि कोविड के बाद से पूरी दुनिया की तरह मैं भी ओटीटी ज्यादा देखने लगा हूं।

सवाल: दो-तीन फिल्में जो आपको लगता है कि सबको देखनी चाहिए ?
जवाब: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ‘शोले’ और ‘मुगल-ए-आजम’ देखनी चाहिए। इसके अलावा ‘मुन्ना भाई-2’ तो पक्का देख लेना चहिए। ‘जुनून’ एक श्याम बेनेगल की फिल्म थी उसे जरूर देखना चाहिए। हाल फिलहाल की बात करें तो ‘बर्फी’ जरूर देखनी चाहिए।

इम्तियाज के मुताबिक हर किसी को एक बार रणबीर कपूर स्टारर फिल्म 'बर्फी' जरूर देखनी चाहिए। यह डायरेक्टर की भी फेवरेट फिल्म है।

इम्तियाज के मुताबिक हर किसी को एक बार रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘बर्फी’ जरूर देखनी चाहिए। यह डायरेक्टर की भी फेवरेट फिल्म है।

सवाल: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कौन सी बात आपको नहीं पसंद?
जवाब: आज कल लोग फिल्म रिलीज को स्टॉक मार्केट की तरह देख रहे हैं। बहुत ज्यादा अनुमान लगाकर देख रहे हैं। यह लेगसी ओरिएंटेड बिजनेस है और इसे उसी रिस्पेक्ट के साथ देखना जरूरी है।

सवाल: आपका ड्रीम प्रोजेक्ट क्या है?
जवाब: मैं भगवान कृष्ण से बहुत प्रभावित हूं और श्रीमद्भगवद्गीता से भी। मेरे दिमाग में राधा-कृष्ण की कहानी अक्सर चलती है तो हो सकता है कि मैं कभी उस कहानी के आस-पास कुछ करूं।

(डिस्क्लेमर- जिस वक्त यह इंटरव्यू किया गया तब जर्नलिस्ट वैभव पलनीटकर दैनिक भास्कर के लिए काम करते थे। अब वो संस्थान का हिस्सा नहीं हैं।)

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CG Information: पीएम आवास में देरी और कमीशनखोरी का समाधान खोज रहे भाजपाई, हितग्राहियों तक बना रहे पहुंच

भाजपा ने प्रचार के माइक्रो प्लान पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। बूथ जीतो, सरकार बनाओ जैसे नारों को प्रभावी बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ता केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के हितग्राहियों तक पहुंच रहे हैं।

By Radha Krishna Sharma

Publish Date: Wed, 10 Apr 2024 05:00 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 10 Apr 2024 05:00 AM (IST)

CG News: पीएम आवास में देरी और कमीशनखोरी का समाधान खोज रहे भाजपाई, हितग्राहियों तक बना रहे पहुंच
पीएम आवास में देरी और कमीशनखोरी का समाधान खोज रहे भाजपाई

HighLights

  1. पीएम आवास में देरी और कमीशनखोरी का समाधान खोज रहे भाजपाई
  2. भाजपा कार्यकर्ताओं को केंद्रीय योजनाओं के हितग्राहियों से मिल रहा फीडबैक
  3. दिल्ली में बैठे पार्टी के रणनीतिकार जान रहे हितग्राहियों के मन की बात

राधाकिशन शर्मा, बिलासपुर (नईदुनिया)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के हितग्राहियों के बीच भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता सीधी पहुंच बना रहे हैं। इनके बीच पहुंचकर योजनाओं के बारे में फीडबैक ले रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर हितग्राहियों का अनुभव कहीं अच्छा है तो किसी गांव में बेहद कड़वा भी मिल रहा है।

हितग्राही, आवास योजना में कमीशनखोरी के अलावा संबंधित विभाग द्वारा राशि के आवंटन में विलंब की शिकायत भी कर रहे हैं। हितग्राहियों से मिल रहे फीडबैक को कार्यकर्ता सरल एप के माध्यम से अपलोड कर रहे हैं। इसके माध्यम से दिल्ली में बैठे भाजपा के रणनीतिकार और चुनाव प्रबंधक एक-एक हितग्राहियों के मन की बात को समझ रहे हैं।

भाजपा ने प्रचार के माइक्रो प्लान पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। बूथ जीतो, सरकार बनाओ जैसे नारों को प्रभावी बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ता केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के हितग्राहियों तक पहुंच रहे हैं। सरकार के कामकाज को बता रहे हैं और उनसे जरुरी जानकारी भी हासिल कर रहे हैं। योजना को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी मंडल प्रभारियों को दी गई है। सरल एप के माध्यम से केंद्रीय योजनाओं की पड़ताल और हितग्राहियों से सीधी बात कर रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय स्थित आइटी सेल ने पोलिंग बूथ और मंडलवार केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लेने वाले हितग्राहियों के नाम, मोबाइल नंबर व गांव का नाम पता सहित पूरी सूची सरल एप में अपलोड कर दिया है। ग्राम दुधिया में अभियान के दौरान पीएम आवास योजना के हितग्राही बुधराम दास ने बताया कि किस्तों मिलने वाली राशि के आवंटन में कमीशन मांगा जा रहा है।

कमीशन न देने पर राशि देने में बहानेबाजी की जाती है। इसके चलते आवास बनाने में विलंब हो रहा है। वर्ष 2018 से 2022 तक राशि का आवंटन न करने से मकान नहीं बन पाया। राशि के अभाव में आधे अधूरे मकान की हालत वर्षाऋतु में और भी खराब हो गया। ग्राम मल्दा के किसान सालिक राम ने बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने हिस्से की राशि नहीं दी।

केंद्र सरकार ने अपने हिस्से का पैसा पूरा दिया। राज्य सरकार की कोताही के कारण मकान नहीं बन पाया। अब जाकर राशि मिल रही है। मकान का काम चल रहा है। संपर्क के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं को दो तरह का फीडबैक मिल रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की वादा खिलाफी से हितग्राही अब भी नाराज दिख रहे हैं। बातचीत के दौरान यह बात भी सामने आ रही है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के बीच केंद्र सरकार के कामकाज को लेकर अच्छी राय है। जिला पंचायत और रोजगार सहायकों के कामकाज और असहयोग को लेकर जरुर नाराजगी है।

सरल एप के जरिए एक-एक हितग्राहियों पर नजर

आइटी सेल ने सरल एप बनाया है। एप में मंडल व बूथवार केंद्र सरकार की योजनाओं के हितग्राहियों की सूची के साथ ही मोबाइल नंबर, गांव का नाम दर्ज है। प्रभारी को संबंधित मंडल का एडमिन बनाया गया है। जैसे ही एडमिन जिस पोलिंग बूथ के नंबर को एड करता है, वह बूथ मोबाइल के स्क्रीन पर ओपन हो जाता है।

लाभार्थी के नाम के साथ ही योजना का नाम भी दिखने लगता है। जिस हितग्राही के मोबाइल नंबर को एप में एड करते हैं, उनके मोबाइल पर ओटीपी आता है। इसके बाद हितग्राही की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। इसी में उनकी राय लिखने का विकल्प आता है। फीडबैक लिख रहे हैं। इसके बाद प्रचार सामग्री के साथ फोटो खींच रहे हैं और उसे सरल एप में अपलोड कर रहे हैं।