Vidisha Raisen Lok Sabha Seat Election: शिवराज सिंह चौहान का रिश्तों पर और प्रतापभानु शर्मा का मुद्दों पर जोर
मध्य प्रदेश की विदिशा-रायसेन लोकसभा सीट पर चुनावी मैदान में एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए रणनीति रच रहे प्रतापभानु और शिवराज।
By Ajay Jain
Publish Date: Tue, 09 Apr 2024 04:00 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 09 Apr 2024 04:00 AM (IST)

Vidisha Raisen Lok Sabha Seat Election: अजय जैन, विदिशा। जीवनदायिनी बेतवा नदी के किनारे बसे विदिशा में गर्मी के पारे के साथ ही राजनीतिक पारा भी चढ़ा हुआ है। इस संसदीय सीट पर 33 वर्ष बाद भाजपा और कांग्रेस के पुराने प्रतिद्वंदी मैदान में होने से मुकाबला कड़ा होता जा रहा है। यहां से पांच बार सांसद और 18 वर्षों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे भाजपा प्रत्याशी शिवराज सिंह चौहान बहनों के रिश्तों की डोर को थाम रिकार्ड मतों से जीत की कोशिश में हैं तो उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापभानु शर्मा दो बार इस सीट से सांसद चुने जाने के अनुभव के साथ स्थानीय मुद्दों के आधार पर मैदान में हैं।
यूं तो विदिशा को भाजपा का गढ़ ही माना जाता है। यहां से पिछले 18 चुनावों में कांग्रेस सिर्फ दो बार ही जीत हासिल कर पाई है। वर्ष 1989 के बाद से इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा है लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव इसलिए रोचक है, क्योंकि कांग्रेस को दो बार जीत दिलाने वाले प्रतापभानु शर्मा ही चुनाव मैदान में है और सामने शिवराज है।
इस जोड़ी का मुकाबला 33 साल पहले हो चुका है, जिसमें शिवराज ने जीत हासिल की थी। अब फिर वे आमने–सामने है। इस जोड़ी के मैदान में उतरने से आम मतदाताओं में बीच चुनाव का आकर्षण स्वाभाविक है। पुरानी पीढ़ी के लोग प्रताप भानु के कार्यकाल के दिनों की बातें कर रहे है तो युवा वर्ग के जुबां पर मोदी राज के किस्से है। इन दो पीढ़ियों के बीच का समन्वय ही किसी एक प्रत्याशी की जीत का आधार बनेगा।

पुरानी शैली में ही प्रचार कर रहे शिवराज
चुनावी राजनीति में तीन दशक से अधिक का समय बदल गया लेकिन शिवराज आज भी अपनी पुरानी शैली में ही प्रचार करते नजर आ रहे है। वे पहले भी सीधे मतदाताओं से ही जुड़ने का प्रयास करते थी इसी के चलते उन्होंने पहले चुनाव के समय पदयात्रा की थी और पांव-पांव वाले भैया कहलाए थे।
अबकी बार पदयात्रा तो नहीं कर रहे है लेकिन मतदाताओं के घर पहुंचना और उनके घर भोजन करना इस बार भी जारी हैं। इस बार के चुनाव में लाड़ली बहना पर फोकस ज्यादा है। इसी के चलते वे हर विधानसभा क्षेत्र में लाड़ली बहना सम्मेलन जरूर कर रहे है। उनके भाषणों में भी विकास के मुद्दे कम भावनात्मक मुद्दे ज्यादा है। उनका जोर अपने कार्यकाल की और मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर है।
33 वर्षों का हिसाब मांग रहे प्रतापभानु
सांगठनिक रूप से और संसाधनों की कमी से जूझ रहे कांग्रेस प्रत्याशी प्रतापभानु शर्मा भाजपा की पिच पर खेलने की बजाय प्रतिद्वंदी को अपनी पिच पर लाने के प्रयास में जुटे है। कांग्रेस नेताओं के दलबदल और टिकिट की घोषणा में देरी के कारण उनका सीधे हर मतदाता तक पहुंचना नहीं हो पा रहा लेकिन वे अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने और भाजपा प्रत्याशी को मुद्दों को घेरने में जुटे हुए है।
वे जगह–जगह इस बात को प्रमुखता से उठा रहे है कि पिछले 33 वर्ष से भाजपा ही इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही है। इसके बावजूद यह क्षेत्र विकास में काफी पिछड़ा है। इसके लिए जिम्मेदार भाजपा प्रत्याशी को अपने कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए। वे कहते है कि शिवराज इस क्षेत्र से पांच बार सांसद रहे लेकिन उन्होंने सिर्फ घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं किया। उनकी उपेक्षा का जीता जागता उदाहरण प्रदूषित बेतवा है, जिसके संरक्षण का जिम्मा शिवराज ने उठाया था लेकिन आज तक कुछ नहीं किया।
विदिशा लोकसभा क्षेत्र – एक नजर में
कुल मतदाता – 19,38,343
पुरुष – 10,04,254
महिला– 9,34,046
थर्ड जेंडर – 43
पिछले चुनाव परिणाम
वर्ष 1991 से 2005 – शिवराज सिंह चौहान ( भाजपा)
वर्ष 2006 – रामपाल सिंह ( भाजपा)
वर्ष 2009, 2014 – सुषमा स्वराज (भाजपा)
वर्ष 2019 – रमाकांत भार्गव। (भाजपा)

