Ratlam Jhabua Lok Sabha Seat: गढ़ जीतने और गढ़ बचाने का द्वंद, छवि, विकास और भावनाओं पर केंद्रित कर रहे चुनाव
रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र : कार्यकर्ताओं का सम्मेलन, मतदाताओं के लिए खाटला बैठक की तैयारी, धीमे प्रचार से माहौल बनाने में जुटे प्रत्याशी।
By narendra joshi
Publish Date: Tue, 09 Apr 2024 04:00 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 09 Apr 2024 04:00 AM (IST)

HighLights
- भाजपा ने इस बार बदलाव करते हुए महिला प्रत्याशी अनीता चौहान को मैदान में उतारा।
- कांग्रेस ने पांच बार इसी सीट से पांच बार सांसद रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया पर दावं लगाया है।
- झाबुआ व आलीराजपुर जिले की कुल पांच व रतलाम की तीन विधानसभा इस लोकसभा सीट में आती है।
Ratlam Jhabua Lok Sabha Seat: नरेंद्र जोशी, रतलाम। रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र में इस बार भाजपा-कांग्रेस के बीच दिलचस्प मुकाबला है। 2019 का लोकसभा चुनाव परिणाम भले ही भाजपा के पक्ष में रहा हो लेकिन 2023 के विधानसभा चनाव में संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के प्रदर्शन से कांग्रेस नेताओं को छिंदवाड़ा के बाद सबसे ज्यादा उम्मीद रतलाम लोकसभा सीट से ही है। भाजपा ने इस बार बदलाव करते हुए महिला प्रत्याशी अनीता चौहान को मैदान में उतारा तो कांग्रेस ने पांच बार इसी सीट से पांच बार सांसद रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया पर दावं लगाया है।
भाजपा यहां मोदी सरकार की गारंटी और आदिवासी नायकों को सम्मान देने के मुद्दे के साथ मैदान में है तो कांग्रेस दोबारा अपने परंपरागत वोट बैंक को अपने नाम करने के लिए टोले-मजरों से लेकर शहर तक पहुंच रही है। क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़क जैसे परंपरागत मुददों पर अधिक बात नहीं होती। आदिवासियों के लिए योजनाओं और उनके क्रियान्वयन से शुरू होकर बात आदिवासी नायकों के सम्मान तक पहुंच जाती है। विधानसभा चुनाव में प्रचंड लहर के बाद भी कांग्रेस को इस क्षेत्र से मिली सफलता भाजपा के लिए चुनौती है तो कांग्रेस इसे मजबूत सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करने की कवायद में जुटी है।
झाबुआ व आलीराजपुर जिले की कुल पांच व रतलाम की तीन विधानसभा इस लोकसभा सीट में आती है। कांग्रेस का गढ़ माने वाली सीट पर भाजपा ने 2014 में सेंध लगा दी थी, हालांकि उपचुनाव में वापस कांग्रेस ने बाजी मारी पर 2019 में फिर से भाजपा ने जीत हासिल की। अब जीत का सिलसिला बरकरार रखने की तैयारी भाजपा ने की है तो कांग्रेस यहां वापसी के प्रयास कर रही है।
आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित रतलाम लोकसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल धीमी गति से बढ़ रहा है। 13 मई को मतदान होना है। भाजपा व कांग्रेस ने मैदान संभाल लिया है। भगौरिया के बाद अब लोगों में भी चुनाव पर चर्चा का दौर जमने लगा है। किसानों, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के साथ ही रेलवे, सड़क और सामाजिक समानता पर बातें हो रही हैं।
रतलाम शहर व रतलाम ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में अभी ज्यादा चर्चा नहीं है, लेकिन इससे आगे बढ़कर सैलाना जाते ही लोगों में चुनाव को लेकर उत्साह नजर आने लगता है। सैलाना विधानसभा से 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय आदिवासी पार्टी ने जीत हासिल की है। सैलाना के इस समीकरण पर भी भाजपा-कांग्रेस दोनों की नजर है। दोनों ही दलों के प्रत्याशी और राजनेता इस पर पूरा फोकस कर रहे हैं।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने व लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका देने की मांग को साधते हुए भाजपा ने आलारीजपुर विधायक व केबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान की पत्नी अनिता चौहान को प्रत्याशी बनाया है। इधर कांग्रेस ने अपने अनुभवी नेता व पांच बार सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया पर ही विश्वास जताया है।
आरोपों का दौर शुरू, नीतियों पर नजर
आरंभिक प्रचार में अभी भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करते हुए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया है, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन के माध्यम से आगे बढ़ रही है। गत एक सप्ताह में दोनों दलों की प्रचार गतिविधियां तेज हुई हैं। भाजपा जहां क्षेत्र में फोरलेन निर्माण, रेलवे सुविधा के विस्तार आदि को गिनाते हुए आगे बढ़ रही है वहीं कांग्रेस नेताओं ने प्रत्याशी की छवि को आधार बनाया है।
कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के बेटे व झाबुआ विधायक डा. विक्रांत भूरिया रतलाम में गत दिनों हुए कार्यकर्ता सम्मेलन में इस चुनाव को कांतिलाल भूरिया का आखरी चुनाव बताते हुए भावनात्मक सहारा लेने की कोशिश की, वहीं भाजपा प्रत्याशी अनिता चौहान के पति आलीराजपुर विधायक व वन मंत्री नागरसिंह चौहान की छवि को पर निशाना साधते हुए इसे परिवारवाद का उदाहरण भी बताया। इससे परे भाजपा संगठन पूरे क्षेत्र में हुए विकास व केंद्र-प्रदेश की नीतियों को समझा रहा है।
बड़ा मुद्दा नहीं, लेकिन सुविधाओं की मांग जस की तस
आलीराजपुर में लोगों के बीच जाने पर कोई बड़ा मुद्दा नजर नहीं आता। यहां ट्रेनों का संचालन होने से लोग खुश हैं, लेकिन मेडिकल कालेज की स्थापना और खंडवा-बडौदा राजमार्ग के बायपास की मांग जरूर कर रहे हैं। झाबुआ में भी कमोबेश यही स्थिति है, गुटबाजी के स्वर यहां दोनों ही दल में है, लेकिन खुलकर नहीं।
प्रचार के परंपरागत तरीकों के साथ ही वाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म पर भी चर्चा हो रही है। कांग्रेस खाटला बैठक (गांव-गांव में 20 से 50 लोगों के साथ होने वाला संवाद) में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी है। भाजपा ने बूथ व पन्ना प्रमुख की रणनीति के साथ ही बड़ी सभाओं की तैयारी की है।
रतलाम शहर व ग्रामीण से भाजपा को मिलती रही बढ़त, यहां दोनों दलों का ध्यान
वर्ष 2014, 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में रतलाम शहर व ग्रामीण विधानसभा से भाजपा को निर्णायक बढ़त मिली थी। इस बार भाजपा ने इसे और बढ़ाने पर ध्यान दिया है जबकि कांग्रेस यहां होने वाले नुकसान को सैलाना विधानसभा में बढ़त बनाकर कम करने के प्रयास में है।
रतलाम भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय ने चुनाव में पिछली बार से अधिक बढ़त मिलने का दावा करते हुए कहा कि पूरे लोकसभा क्षेत्र में शहर से लेकर पंचायत स्तर तक विकास हुआ है। यही बात कार्यकर्ता आमजन तक पहुंचा रहे हैं। इधर शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र कटारिया, जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश पटेल ने महंगाई, बेरोजगारी व भय, भ्रष्टाचार से जनता के परेशान होने की बात कहते हुए कांग्रेस को समर्थन मिलने की उम्मीद जताई है।
लोकसभा क्षेत्र की तस्वीर –रतलाम शहर, रतलाम ग्रामीण, पेटलावद व आलीराजपुर में भाजपा विधायक व झाबुआ, थांदला, जोबट कांग्रेस के पास है। सैलाना से जयस का विधायक है।
कुल मतदाता – 20,72,288
पुरुष मतदाता – 1029,902
महिला मतदाता – 10,42,330
थर्ड जेंडर – 56

