Gwalior Electrical energy Information: नगरनिगम की वजह से कहीं छिन न जाए गुणवत्तायुक्त बिजली देने का प्रोजेक्ट

नगर निगम के अफसरों का लापरवाह रवैया न केवल गुणवत्तायुक्त बिजली के लिए शहर को तरसा रहा है, बल्कि जमीन का नामांतरण करने में बरती जा रही लापरवाही प्रोजेक्ट को शहरवासियों से छीनने का कारण भी बन सकती है।

By anil tomar

Publish Date: Tue, 09 Apr 2024 02:17 PM (IST)

Up to date Date: Tue, 09 Apr 2024 02:17 PM (IST)

Gwalior Electricity News: नगरनिगम की वजह से कहीं छिन न जाए गुणवत्तायुक्त बिजली देने का प्रोजेक्ट

HighLights

  1. मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को जीआइएस सब स्टेशन की जमीन का निगम के अफसर नहीं कर रहे नामातंरण
  2. नामातंरण और टावर खड़े करने की अनुमति नहीं मिलने से अटका काम

Gwalior Electrical energy Information: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम के अफसरों का लापरवाह रवैया न केवल गुणवत्तायुक्त बिजली के लिए शहर को तरसा रहा है, बल्कि जमीन का नामांतरण करने में बरती जा रही लापरवाही प्रोजेक्ट को शहरवासियों से छीनने का कारण भी बन सकती है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लंबे समय से काम अटका पड़ा होने की वजह से जीआइएस सब स्टेशन को अन्य जगह स्थापित करने का निर्णय ले सकती है। आधुनिक तकनीक जीआइएस (गैस इंसुलेटेड स्विच्ड गियर सब-स्टेशन) का निर्माण करने के लिए शासन ने मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को फूलबाग स्थित चौपाटी के पास जगह का आवंटन किया था, लेकिन नगर निगम ने अब तक आवंटित भूमि का नामांतरण नहीं किया है, जिससे सब स्टेशन का निर्माण अटका पड़ा है।

ग्वालियर का प्रोजेक्ट नगर निगम के कागजों में दबा रखा है, जबकि 50 एमवीए क्षमता का सब स्टेशन बनने से बिजली की गुणवत्ता बेहतर होती। ग्वालियर में आज तक जमीन की समस्या का निराकरण ही नहीं हो पाया। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी का कहना है कि प्रोजेक्ट 18 माह में पूरा होना था, लेकिन जमीन का नामांतरण नहीं होने के कारण कार्य अटका है। कंपनी ने जिला प्रशासन के सहयोग से इस मामले में कुछ निराकरण होने की संभावना जाहिर की है।

123 करोड़ के प्रोजेक्ट में निगम बना रोड़ा

123 करोड़ के प्रोजेक्ट का सात जनवरी 2023 को केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भूमिभूजन किया था। इसके बाद से जीआइएस तकनीक पर आधारित 132केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कार्य के साथ मोनोपोल टावर खड़े करने का काम मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को 18 माह में पूरा करना था। कंपनी के अधिकारियों की माने तो दिसम्बर 2023 में ही इस प्रोजेक्ट को पूरा होना था, लेकिन नगर निगम में जमीन का मामला अटका होने के कारण प्रोजेक्ट को मार्च 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया, लेकिन जमीन का नामांतरण नहीं होने से अब तक काम अटका पड़ा है।

सब स्टेशन बनने के साथ 39 टावर लगने थे

कंपनी को शहर में 39 टावर लगाने थे। इनमें 10 सामान्य टावर तथा 29 मोनोपोल है। इसमें से आठ सामान्य टावर का काम पूरा हो चुका है। दो टावर रेलवे की अनुमति के कारण लंबित हैं। 29 मोनोपोल में से 13 के फाउंडेशन कंप्लीट हो चुके हैं। बाकी 16 मोनोपोल टावरों के फाउंडेशन बनाने का कार्य प्रगति पर है। इसमें 12 फाउंडेशन निजी जमीन के कारण लंबित हैं।

क्या है फायदा

आम सब स्टेशन बनाने में करीब 24 हजार वर्गफीट जमीन की उपलब्धता होती है, वहीं जीआइएस तकनीक के सब स्टेशन पांच हजार वर्गफीट पर बन जाते हैं। इनकी क्षमता और गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं होता है, लेकिन जगह की बचत के कारण ये थोड़ा महंगे पड़ते हैं। ग्वालियर के फूलबाग क्षेत्र 50 एमवीए क्षमता पावर सब स्टेशन बनाया जाना था। इससे शहर में बिजली की गुणवत्ता बेहतर होती। व्यावसायिक गतिविधयां बढ़ने की वजह से बिजली का भार बढ़ रहा है ऐसे में यह सब स्टेशन बेहद उपयोगी होता।