ASI Survey of Bhojshala: भोजशाला के अंदर खोदाई शुरू, एएसआइ टीम ने किले पर पहुंचकर देखा शिलालेख
बरसों पहले भोजशाला में खोदाई के दौरान मिली साम्रगी रखी हुई है संग्राहलय में।
By Prashant Pandey
Publish Date: Solar, 07 Apr 2024 04:00 AM (IST)
Up to date Date: Solar, 07 Apr 2024 04:00 AM (IST)

HighLights
- भोजशाला में लगे हुए शिलालेखों के ही समान तीन शिलालेख किला परिसर स्थित संग्रहालय में रखे हुए हैं।
- धार की ऐतिहासिक भोजशाला का सर्वे जारी है, 16 दिन लगातार सर्वे हो चुका है।
- भोजशाला में मुख्य प्रवेश द्वार के बाई ओर दीवार पर शिलालेख लगे हुए हैं।
ASI Survey of Bhojshala: नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। ऐतिहासिक भोजशाला के सर्वे करने वाली भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम के कुछ सदस्य अकस्मात रूप से शनिवार शाम को धार के प्राचीन किले के संग्रहालय पहुंचे। मुख्य रूप से इस दल के कुछ सदस्यों ने भोजशाला से बरसों पहले खोदाई में मिली मूर्तियां और शिलालेखों को देखा है।
भोजशाला में लगे हुए शिलालेखों के ही समान तीन शिलालेख किला परिसर स्थित संग्रहालय में रखे हुए हैं। प्राकृत भाषा में लिखे हुए इस शिलालेख को पढ़वाने के लिए विशेषज्ञों को बुलवाया जा सकता है। वहीं माना जा रहा है कि यह टीम विशेष रूप से संग्रहालय की गैलरी में भोजशाला में बरसों पहले हुई खोदाई में रखी मूर्तियों की जानकारी भी ली।
धार की ऐतिहासिक भोजशाला का सर्वे जारी है। 16 दिन लगातार सर्वे हो चुका है। इस सर्वे के तहत पहली बार धार जिले के किले में स्थित प्राचीन संग्रहालय में टीम ने प्रवेश किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की पूरी टीम तो किले में नहीं गई लेकिन टीम के कुछ सदस्य आकस्मिक रूप से वहां पहुंचे हैं। इसमें माना जा रहा है की टीम के लीडर डाक्टर आलोक त्रिपाठी व विशेषज्ञ डाक्टर विक्रम भुवन जैसे विशेषज्ञ पहुंचे हैं।
जब यह टीम अंदर पहुंची तो किले में जाने वाले पर्यटकों को रोक दिया गया। हालांकि शाम होते ही वैसे भी किले में प्रवेश निषेध कर दिया जाता है। लेकिन यहां के धार्मिक स्थान पर जाने वाले लोगों को भी रोक दिया गया। सर्वे के दौरान गोपनीयता बनी रहे और सुरक्षा की दृष्टि से भी इस तरह का महत्वपूर्ण कदम उठाया गया था।
सारे दस्तावेजों को खंगाला
इधर सबसे अहम बात यह है कि भोजशाला में मुख्य प्रवेश द्वार के बाई ओर दीवार पर शिलालेख लगे हुए हैं। यह शिलालेख राजा भोज के काल के बताए जाते हैं। ऐसे ही शिलालेख धार की किले में रखे हुए हैं। इस बारे में बताया गया कि टीम ने शिलालेख के कुछ हिस्सों को संग्रहालय में देखा है। संग्रहालय में देखने के बाद इसकी सूक्ष्मता से परख की गई है।
ये प्राचीन बताए गए हैं और इन शिलालेखों में जो जानकारी दर्ज है, उन जानकारी के बारे में विशेषज्ञ को बुलाया जाएगा। प्राकृत भाषा जानने वाले लोगों से उसे पढ़वाया जा सकता है। साथ ही इन टुकड़ों के मिलान की स्थिति भी बन सकती है। इस तरह से एक बहुत बड़ी कवायद पहली बार धार के किला स्थित संग्रहालय में की गई है।
उल्लेखनीय है की धार के किले में एक बहुत ही प्राचीन संग्रहालय है। जो मध्य प्रदेश का सबसे प्राचीन संग्रहालय होने का दर्जा रखता है। इसकी वजह यह है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद धार का संग्रहालय ही ऐसा है जो करीब 110 वर्ष पहले अंग्रेजों के समय स्थापित हुआ था। मध्य प्रदेश अविभाजित था तब प्रदेश को प्राचीन संग्रहालय का दर्जा रायपुर को प्राप्त था। उल्लेखनीय कि यहां संग्रहालय में अलग-अलग विथिका है।
इसमें विशेष रूप से भोजशाला से प्राप्त अभिलेखों को रखा गया है। इसके तीन हिस्से वहां होने की जानकारी मिलती है। ऐसे में अब इनका अध्ययन किया जाएगा। यह जानकारी भारतीय पुरातत्व विभाग ले रहा है कि यह खोदाई में कब मिले। कैसे मिले और उस समय का जो रिकॉर्ड है, उसकी प्रति यह टीम अपने साथ रख सकती है। हालांकि यह सर्वे पूर्ण रूप से गोपनीय रहा। विभाग या अन्य कोई ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की है।

