चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता से कहा- आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच में प्रदेश की सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही थी।
By Yogeshwar Sharma
Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 12:36 AM (IST)
Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 12:36 AM (IST)

HighLights
- दयालबंद में मां बेटे की दम घुटने से मौत को हाई कोर्ट ने लिया गंभीरता से
- आम आदमी की सुरक्षा को लेकर दी हिदायत
- दमकल की व्यवस्था ना किए जाने को लेकर नाराजगी जताई
नईदुनिया न्यूज,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने दयालबंद में आग लगने की घटना में दम घुटने से मां-बेटे की मौत को गंभीरता से लिया है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने इस घटना को लेकर संवेदना जताई और जिला प्रशासन की ओर से समय पर दमकल की व्यवस्था ना किए जाने को लेकर नाराजगी जताई। डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता से कहा कि देश में आम चुनाव के बहाने आम आदमी की सुरक्षा व सुविधा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आपकी सरकार है और मशीनरी भी है। इस पर आपको नियंत्रण तो रखना ही पड़ेगा।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच में प्रदेश की सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही थी। नई सड़कों के निर्माण के लिए निविदा जारी करने को लेकर जब महाधिवक्ता व अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद ही निविदा समेत आगे की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। चुनाव आचार संहिता के कारण आगे की प्रक्रिया एनएचएआइ और पीडब्ल्यूडी द्वारा पूरी नहीं की जा रही है। इस बीच महाधिवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि जनहित के कार्य को सामने रखकर अगर हाई कोर्ट निविदा जारी करने और निर्माण कार्य प्रारंभ करने का निर्देश जारी करे तो विभागीय प्रक्रिया के साथ ही निर्माण कार्य को प्रारंभ किया जा सकता है। महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर डिवीजन बेंच ने आदेश जारी कर दिया। इसी बीच चीफ जस्टिस ने दयालबंद की घटना की याद की। महाधिवक्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आप बताइए दयालबंद में दम घुटने से मां व बेटे की मौत हो गई। कितनी भयावह घटना है। आप और हम सोच नहीं सकते। जिला प्रशासन की लापरवाही देखिए। दमकल चलाने के लिए ड्राइवर की व्यवस्था नहीं कर पाए। एक छुट्टी पर चला गया और एक रैली में व्यस्त रहा। कितनी गलत बात है। प्रशासनिक कामकाज हो रहा है या नहीं। चुनाव के नाम पर आप ऐसे ही चलाते रहेंगे क्या। आम आदमी की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान तो रखना ही होगा। चुनाव के बहाने जरूरी काम को तो नहीं छोड़ा जा सकता।
चीफ जस्टिस की चिंता और संवेदना आई नजर
दयालबंद की घटना के बाद जिस तरह प्रशासनिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त नजर आई उसे लेकर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की नाराजगी सामने आई। मां बेटे की मौत को लेकर उनकी संवेदना और चिंता साफतौर दिखाई दी। महाधिवक्ता को संबोधित करते हुए दोटूक कहा कि आम आदमी को असहाय ना छोड़िए। उनकी सुरक्षा का ध्यान हर हाल में रखना होगा। स्टेट की मशीनरी है। आपको तो नियंत्रण करना पड़ेगा ना। आपको ध्यान देना होगा। चीफ जस्टिस ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश भी दिया।
ये हुई थी घटना
दयालबंद के मधुबन रोड स्थित शिखा पब्लिक स्कूल के पास रहने वाले रोमी कश्यप रविवार 31 मार्च की शाम को काम पर गए थे। उनकी पत्नी नम्रता कश्यप (30) और छह साल का बेटा अर्थ कश्यप घर पर थे। उन्होंने मकान के ऊपरी हिस्से को छात्रों को किराए पर दिया है। छात्र भी घर पर ही थे। शाम छह बजे के करीब मकान के सामने बिछाए गए बिजली के केबल में शार्ट सर्किट हो गया। इससे निकली चिंगारी से पोर्च में रखे तारपिन तेल के चार ड्रम में आग लग गई। आग लगने से घर के अंदर मौजूद महिला और उसका बेटा नहीं निकल सके। चार ड्रम में लगी आग को देखकर आसपास के लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। धुआं भरने पर ऊपरी मंजिल पर मौजूद छात्र छत के रास्ते से बाहर निकलने में कामयाब हो गए। महिला और बच्चे वहीं फंसे रह गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने किसी तरह आग पर काबू पाया। इसके बाद मोहल्ले में ही रहने वाले वैभव विश्वनाथ दुबे ने मकान के अंदर जाकर महिला और उसके बेटे को निकाला। तब तक मां और बेटा दम घुटने के कारण बेहोश हो गए थे। दोनों को तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अपोलो में इलाज के दौरान महिला और बेटे की मौत हो गई।

