Bengali Actress Suchitra Sen Story Defined; Raj Kapoor | Dilip Kumar Uttam Kumar | महानायिका सुचित्रा सेन, जिनके दिलीप कुमार भी थे फैन: अचानक हुईं नजरबंद, 36 साल एक कमरे में गुजारे, दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड भी ठुकराया, जानिए वजह

17 मिनट पहलेलेखक: ईफत कुरैशी

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हिंदी सिनेमा में नायिका तो कई हैं, लेकिन इतिहास में आज भी महानायिका का दर्जा सिर्फ और सिर्फ सुचित्रा सेन को दिया जाता है। सुचित्रा की खूबसूरती, अदाकारी और आंखों की तारीफें दिलीप कुमार, बिमल दा जैसे आला कलाकार भी किया करते थे, यही वजह रही कि उन्हें स्क्रीन गॉडेस यानी पर्दे की देवी कहा जाता था।

सुचित्रा बेहद स्वाभिमानी थीं। शोमैन राज कपूर की फिल्में करना कई एक्ट्रेसेस का सपना हुआ करता था, लेकिन एक दौर वो भी रहा जब राज कपूर जैसी शख्सियत उन्हें फिल्म में लेने के लिए उनके कदमों पर आ बैठी थी। सुचित्रा ने ये कहते हुए उनकी फिल्म ठुकरा दी कि उन्हें राज कपूर का अंदाज पसंद नहीं आया।

सुचित्रा सेन कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ रही थीं, जबकि उनका स्टारडम उनकी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद होने का कारण बन गया। फिर एक समय ऐसा भी आया जब सिर्फ एक फिल्म फ्लॉप होने के सदमे में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री और लोगों से राब्ता खत्म कर दिया। दुनिया से छिपने के लिए वे 36 साल तक एक कमरे में कैद होकर रहीं।

दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया जाना था, लेकिन सुचित्रा अपने कमरे से निकलने को राजी नहीं हुईं और अवॉर्ड ठुकरा दिया। उनकी आखिरी इच्छा भी यही रही कि उन्हें दुनिया की नजरों से छिपाकर अंतिम विदाई दी जाए, जिससे कोई उनका चेहरा न देख सके।

आज अनसुनी दास्तान में 4 चैप्टर्स में पढ़िए सुचित्रा सेन के हुनर, खूबसूरती, स्वाभिमान और दुनिया से छिपकर रहने की परत-दर-परत कहानी-

सुचित्रा सेन का जन्म 6 अप्रैल 1931 को बंगाल के सिराजगंज के पास स्थित भांगा बारी गांव (अब ये गांव बांग्लादेश में आता है) में हुआ था। उनके पिता कोरुणामॉय दासगुप्ता, पभा म्युनिसिपल के सैनिटरी इंस्पेक्टर थे, जबकि उनकी मां इंदिरा देवी एक गृहिणी थीं। 5 भाई-बहनों में सबसे छोटी सुचित्रा का असली नाम रोमा दासगुप्ता था, जो फिल्मों में आने के बाद बदला गया था।

आजादी की लड़ाई में छूटा घर-परिवार

जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तब सुचित्रा सेन पभा गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल की स्टूडेंट थीं। आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दंगे शुरू हुए, जिसका असर बंगाल पर भी पड़ा। इन्हीं दंगों के दौरान ईस्ट बंगाल में हिंदू परिवारों के साथ बर्बरता की जाने लगी। सुचित्रा के पिता किसी तरह परिवार की जान बचाते हुए वेस्ट बंगाल आकर बस गए, जो उस समय हिंदुओं के लिए एक सुरक्षित जगह थी।

15 साल की उम्र में करवा दी गई शादी, पति-ससुर की मदद से फिल्मों में आईं

वेस्ट बंगाल में बसने के बाद पिता ने 15 साल की सुचित्रा की शादी बिजनेसमैन आदिनाथ सेन के बेटे दीबानाथ सेन से करवा दी।

पति ने दिया था सिंगर बनने का सुझाव

सुचित्रा को गाने का शौक था। घर में भी वो अक्सर काम करते हुए गुनगुनाया करती थीं। उनके पति दीबानाथ उनके हुनर की कद्र करते थे। वो चाहते थे कि सुचित्रा का हुनर चारदीवारी में कैद न रह जाए, यही वजह रही कि उन्होंने पत्नी को बंगाली सिनेमा का हिस्सा बनने का सुझाव दिया। दोनों ने मिलकर आदिनाथ को भी राजी कर लिया।

सिंगर बनना चाहती थीं, खूबसूरती देखकर डायरेक्टर ने फिल्म में कास्ट किया

पति ने मदद की तो 1952 में बन रही बंगाली फिल्म शेष कोठाय में उन्हें गाने का मौका मिला। फिल्म पूरी होने से पहले ही हीरोइन ने फिल्म छोड़ दी और फिल्म बंद हो गई। इसी समय बंगाली सिनेमा के मशहूर फिल्ममेकर सुकुमार दासगुप्ता ने सुचित्रा की खूबसूरती और हुनर को भांप लिया और उनका स्क्रीन टेस्ट लिया।

सुचित्रा का स्क्रीन टेस्ट इतना बेहतरीन था कि उन्हें फिल्म सात नंबर कोयदी (1953) में कास्ट कर लिया गया। फिल्म की शूटिंग शुरू हुई और सुचित्रा की चर्चा बंगाली सिनेमा में होने लगी। फिल्म रिलीज होने से पहले ही सुचित्रा को 3 और बंगाली फिल्में कजोरी, सारे चोतोर और भगवान श्री श्री कृष्णा मिल गईं।

उत्तम कुमार के साथ बनी आइकॉनिक जोड़ी

फिल्म शारे चोतोर (1953) में सुचित्रा को उत्तम कुमार के साथ कास्ट किया गया था। ये फिल्म सुपरहिट रही और सुचित्रा सेन को बंगाली सिनेमा की टॉप एक्ट्रेसेस में गिना जाने लगा।

बंगाली सिनेमा का सुनहरा दौर लाई सुचित्रा-उत्तम की जोड़ी

सुचित्रा-उत्तम की जोड़ी ऐसी जमी कि जब भी बंगाली सिनेमा में कोई बड़ी फिल्म बनती थी, तो उसमें सुचित्रा सेन और उत्तम कुमार को ही कास्ट किया जाता था। इनकी आइकॉनिक जोड़ी, इंडियन सिनेमा की सबसे बेहतरीन पेयरिंग कहलाती थी, जो बंगाली सिनेमा का सुनहरा दौर लाई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में दिलीप कुमार ने कहा था कि पर्दे पर उनकी पसंदीदा जोड़ी सुचित्रा और उत्तम कुमार की थी।

बिमल दा की जिद से हिंदी सिनेमा का हिस्सा बनीं सुचित्रा सेन

बंगाली सिनेमा में सुचित्रा सेन की खूबसूरती की चर्चा हर तरफ होती थी। यही वजह रही कि जब फिल्ममेकर बिमल रॉय को फिल्म देवदास (1955) के लिए पारो चुननी थी, तो मीना कुमारी के बाद उन्हें सबसे पहले सुचित्रा का ही ख्याल आया।

दरअसल, उन्होंने सबसे पहले ये रोल मीना कुमारी को दिया था, लेकिन उनके पति कमाल अमरोही ने उन्हें फिल्म करने की इजाजत नहीं दी। मीना ने फिल्म ठुकराई तो बिमल दा ने सुचित्रा को कास्ट कर लिया। दूसरी तरफ फिल्म में चंद्रमुखी का रोल नरगिस को दिया गया था, लेकिन वो अड़ गईं कि वो फिल्म तभी करेंगी, जब उन्हें पारो का रोल दिया जाएगा।

बिमल दा नहीं माने और नरगिस ने नाराजगी में फिल्म छोड़ दी। नरगिस के बाद चंद्रमुखी के रोल में बीना राय और सुरैया को भी बुलाया गया, लेकिन वो भी चंद्रमुखी नहीं बल्कि पारो बनना चाहती थीं। बिमल दा ने अपना फैसला नहीं बदला और सुचित्रा के नाम पर अड़े रहे। ऐसे में चंद्रमुखी का रोल वैजयंतीमाला को दिया गया और सुचित्रा बन गईं पारो।

दिलीप कुमार हो गए थे परफेक्शन के मुरीद

बिमल दा ने फिल्म देवदास की शूटिंग के पहले दिन सुचित्रा सेन और दिलीप कुमार की मुलाकात करवाई थी। जैसे ही दिलीप कुमार की नजर उन पर पड़ी, तो बड़ी-बड़ी आंखों और तीखे नैन-नक्श ने उनका ध्यान खींच लिया। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में दिलीप कुमार ने कहा था, वे अपनी एक नजर से बहुत कुछ कह जाती थी।

एक इंटेंस सीन की शूटिंग के दौरान दोनों को एक-दूसरे की आंखों में देखना था। जैस से ही सुचित्रा ने एक्सप्रेशन दिए, तो दिलीप कुमार और सेट पर मौजूद हर कोई उनका परफेक्शन देख हैरान रह गया।

वो एक ही डायलॉग को 5 अलग-अलग मॉड्यूलेशन के साथ बोल सकती थीं। सुचित्रा खामोश रहना पसंद करती थीं, सेट पर किसी से बोल-चाल नहीं रखती थीं, लेकिन अपने साथ काम करने वालों को बराबर इज्जत देती थीं, चाहे वो एक स्पॉट बॉय ही क्यों न हो।

पॉलिटिकल मतभेद के चलते सुचित्रा सेन को नहीं मिला नॉमिनेशन

30 दिसंबर 1955 को रिलीज हुई फिल्म देवदास हिट रही और फिल्म में काम करने वाले हर कलाकार को चौथे फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दिलीप कुमार को बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला और वैजयंतीमाला- मोतीलाल को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस-एक्टर का। हालांकि सुचित्रा को अपने करियर के सबसे बेहतरीन रोल के लिए नॉमिनेशन तक नहीं मिला।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि उस समय बांग्लादेश-भारत के बीच तनाव की स्थिति थी, ऐसे में कभी बांग्लादेश का हिस्सा रहीं सुचित्रा को नॉमिनेशन नहीं दिया गया। वहीं दूसरी तरफ वैजयंतीमाला ने ये कहते हुए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड ठुकरा दिया कि उनका भी सुचित्रा की तरह लीड रोल था।

सुचित्रा की कामयाबी उनकी शादीशुदा जिंदगी के आड़े आई। कहा जाता है कि उनके पति दीबानाथ उनकी कामयाबी और स्टारडम से खुश नहीं थे, यही वजह रही कि दोनों के बीच झगड़े बढ़ने लगे। एक बार उन दोनों का झगड़ा इतना बढ़ा कि सुचित्रा कुछ दिनों के लिए अपनी दोस्त और एक्ट्रेस कानन देवी के घर जाकर रहने लगीं।

पति से झगड़ा हुआ तो डायरेक्टर से वही सीन फिल्म में डलवाया

60 के दशक की शुरुआत में सुचित्रा सेन सात पाके बधा की शूटिंग कर रही थीं। एक दिन शूटिंग पर निकलने से पहले उनका, पति से इतना बड़ा झगड़ा हुआ कि सुचित्रा ने पति की शर्ट फाड़ दी। झगड़े के बाद जब वो शूटिंग पर पहुंचीं, तो उन्होंने डायरेक्टर से कहकर वही सीन फिल्म सात पाके बधा में रखवाया। 1963 में रिलीज हुई इस फिल्म ने सुचित्रा को इंटरनेशनल स्टार बनाया था।

नाराजगी में पति चले गए न्यूयॉर्क, सालों बाद एक कॉल के जरिए मिली मौत की खबर

लगातार बढ़ते झगड़ों के चलते एक रोज दीबानाथ, सुचित्रा और बेटी मुनमुन को छोड़कर न्यूयॉर्क चले गए। शिपिंग कंपनी में काम करते हुए उन्होंने कभी मुड़कर परिवार की ओर नहीं देखा। स्वाभिमानी सुचित्रा ने भी कभी उनसे संपर्क नहीं किया और अकेले बेटी की परवरिश की।

27 नवंबर 1970 को सुचित्रा की बेटी ने एक डरावना ख्वाब देखा और डर कर उठ गई। सुचित्रा ने उसे सुलाया और 28 नवंबर 1970 की सुबह एक इंटरनेशनल कॉल आया। बताया गया कि उनके पति दीबानाथ का निधन हो चुका है।

सुचित्रा लोगों की मदद से पति का शव कोलकाता लाईं, जहां पूरे परिवार की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार हुआ। पति की मौत से सुचित्रा टूट गई थीं, लेकिन उन्होंने फिल्मों में काम करना जारी रखा।

कदमों के पास बैठे राज कपूर तो ठुकरा दी फिल्म, कहा-मुझे उनका स्टाइल पसंद नहीं आया

एक रोज राज कपूर अपनी फिल्म का ऑफर लेकर सुचित्रा सेन के घर पहुंचे थे। जैसे ही सुचित्रा सोफे पर बैठीं तो राज कपूर उनके कदमों के पास सटकर बैठ गए और फूल देने लगे। ये देखते ही सुचित्रा सेन ने उनकी फिल्म करने से इनकार कर दिया।

सुचित्रा ने बायोग्राफी ‘अमर बोंधु सुचित्रा सेन’ लिखने वाले राइटर अमिताभ चौधरी से कहा था, ‘मैंने फिल्म इसलिए रिजेक्ट की क्योंकि मुझे उनका तरीका और उनकी पर्सनैलिटी पसंद नहीं आई। जिस तरह का उनका रवैया था, जिस तरह वो पैरों पर बैठे, ये एक आदमी को शोभा नहीं देता।’

सत्यजीत रे की फिल्म ठुकराई

सुचित्रा ने सत्यजीत रे की फिल्म देवी चौधरानी ठुकराई थी। जिस समय सत्यजीत रे उनके पास ऑफर लेकर पहुंचे थे, तब वे दूसरी फिल्मों में व्यस्त थीं। जब सत्यजीत रे ने उनसे कहा कि वे उनकी फिल्म को तवज्जो दें, तो उन्होंने साफ कह दिया- मैं दूसरी फिल्में पूरी करने के बाद ही आपकी फिल्म साइन करूंगी।

डायरेक्टर ने कहना नहीं माना तो शूटिंग के बीच चली गईं घर

राइटर अमिताभ चौधरी से बातचीत में सुचित्रा ने बताया था कि एक दिन वो दोस्त कानन देवी के पति हरिदास भट्टाचार्या की एक फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। एक दिन उन्होंने डायरेक्टर से कहा कि वो अपने मुताबिक सीन करेंगी, इस पर हरिदास ने जवाब दिया, काम वैसा ही करना जैसा मैं कहूं।

सेट पर दोनों का जोरदार झगड़ा हुआ और सुचित्रा स्टूडियो छोड़कर घर निकल गईं। फिल्म बंद पड़ने के कई दिनों बाद हरिदास उनके पास आए और कहा, तुम्हें जैसा ठीक लगे, वैसा ही करना। ऐसे सुचित्रा ने वो फिल्म पूरी की।

सुचित्रा सेन को पसंद आ जाए, इसलिए लिखी गई फिल्म आंधी

हारपर कॉलिन इंडिया में जब गुलजार साहब की 3 बेहतरीन फिल्मों आंधी, अंगूर, इजाजत पर चर्चा हुई, तो उनसे पूछा गया कि आंधी में सुचित्रा सेन को कास्ट क्यों किया गया था?

गुलजार साहब ने जवाब में बताया कि पहले संजीव कुमार और सुचित्रा को एक टिपिकल बंबइया फिल्म में कास्ट किया गया था। जिस समय स्टोरी नरेशन का काम हुआ उस समय सुचित्रा कोलकाता में थीं। एक मीटिंग रखी गई, जिसमें संजीव कुमार, गुलजार साहब, प्रोड्यूसर जे. ओमप्रकाश, राइटर सचिन भौमिक मौजूद थे। जब बंबइया थीम की स्टोरी सुनाई गई, तो गुलजार साहब खड़े हुए और कहा, क्या आप लोगों को लगता है कि सुचित्रा सेन इस कहानी को सुनने के लिए कोलकाता से बंबई आएंगीं। वे ऐसी फिल्म क्यों करेंगी?

राइटर सचिन भौमिक ने सहमति जताते हुए कहा, सही कहा, ये बंबई है। हम यहां किसी भी एक्टर को बुला सकते हैं, लेकिन अगर सुचित्रा सेन को बुलाना है तो कहानी कुछ अलग होनी चाहिए।

हर कोई इस बात से सहमत था। इसी बीच गुलजार साहब ने एक पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म की कहानी सुनाई, जो हर किसी को पसंद आ गई। वो कहानी फिल्म आंधी की थी, जो उन्होंने सुचित्रा के लिए चुनी थी। ये बात भी कम लोग जानते हैं कि फिल्म आंधी के सेट पर हर कोई सुचित्रा को ‘मेडम’ नहीं ‘सर’ कहता था। ये रुतबा उन्हें गुलजार साहब ने ही दिया था।

कांग्रेस ने बैन कर दी थी फिल्म आंधी

14 फरवरी 1975 को रिलीज हुई फिल्म आंधी में सुचित्रा सेन ने आरती देवी का रोल प्ले किया था। कहा गया कि ये फिल्म तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर बनी है, जबकि ऐसा नहीं था। इस फिल्म को कांग्रेस पार्टी ने कई जगह रिलीज होने से रोक दिया।

फिर जब इमरजेंसी लगी, तो फिल्म को बैन कर दिया गया। कांग्रेस का मानना था कि इस फिल्म से उनकी पार्टी की छवि पर बुरा असर पड़ेगा। बैन के चलते फिल्म नेशनल टॉपिक बन गई थी। 1977 में जब कांग्रेस को हराकर जनता पार्टी सत्ता में आई, तो इस फिल्म का TV प्रीमियर किया गया था। ये सुचित्रा सेन के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से है।

एक फिल्म फ्लॉप हुई तो फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर गुमनाम हुईं

फिल्म आंधी के रिलीज होने के 2 साल बाद 1978 में सुचित्रा सेन बंगाली फिल्म प्रनय पाशा में नजर आई थीं। इस फिल्म का फ्लॉप होना सुचित्रा बर्दाश्त नहीं कर पाईं और उन्होंने तुरंत फिल्मों से रिटायरमेंट की अनाउंसमेंट कर दी। जबकि उस समय वो राजेश खन्ना के साथ नाती बिनोदिनी में काम कर रही थीं। उन्होंने फिल्म अधूरी छोड़ दी और फिल्मी दुनिया से सारे नाते तोड़ लिए।

सात्विक जीवन अपनाया, एक कमरे को बनाई दुनिया

फिल्में छोड़ते ही सुचित्रा सेन रामकृष्ण मिशन आश्रम से जुड़कर सात्विक जीवन जीने लगीं। चंद दिनों में ही उन्होंने घर के एक छोटे से कमरे में अपनी दुनिया बसा ली। इस दौरान भी उन्हें कई फिल्में मिलीं, लेकिन उन्होंने सारी फिल्में ठुकरा दीं। समय बीतता गया और एक समय ऐसा आया, जब वो कमरे में ही कैद रहने लगीं। उनके परिवार वालों को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं थी।

बायोग्राफी ‘अमर बोंधु सुचित्रा सेन’ लिखने वाले राइटर अमिताभ चौधरी से सुचित्रा ने कहा था, ‘मैं अकेले रहना पसंद करती हूं। मैंने अपनी बहन की बेटी रुना की शादी भी अटेंड नहीं की। मैं जहां भी जाती थी लोग मुझे डिस्टर्ब करते थे। मुझे कई लेटर आते थे, लेकिन मैंने न उन्हें खोला, न किसी का जवाब दिया। मैं इस तरह ही खुश हूं।’

कमरे से न निकलना पड़े, इसलिए ठुकरा दिया दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड

साल 2005 में सुचित्रा सेन को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया जाने वाला था। हालांकि जब उन्हें कॉल कर इसकी खबर दी गई, तो उन्होंने ये कहते हुए अवॉर्ड ठुकरा दिया कि वह अब लोगों के सामने नहीं आएंगी, अगर अवॉर्ड देना है तो घर आना पड़ेगा।

आखिरी ख्वाहिश- मौत के बाद भी चेहरा किसी को न दिखाया जाए

24 दिसंबर 2013 को सुचित्रा सेन को लंग इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। प्राइवेसी के चलते इस बात को पूरी तरह से राज रखा गया था। 17 जनवरी 2014 को सुचित्रा को अस्पताल में हार्ट अटैक आया, जिससे उनका निधन हो गया।

82 साल की सुचित्रा की आखिरी ख्वाहिश थी कि मौत के बाद भी उनका चेहरा किसी को न दिखाया जाए। यही वजह रही कि उनकी मौत के महज 5 घंटे बाद ही उनके परिवार ने कोलकाता के काइओरातोला श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया। आखिरी ख्वाहिश के मुताबिक उनका चेहरा ढंककर रखा गया था, जबकि उन्हें अंतिम विदाई देने हजारों चाहने वाले पहुंचे थे।

अगले शनिवार, 13 अप्रैल को पढ़िए कहानी दादा साहेब तोर्ने की कहानी। 1912 में भारत में पहली फिल्म बनाने के बावजूद उन्हें फिल्मों के जनक का दर्जा नहीं दिया गया। सालों बाद भी उनका परिवार उन्हें क्रेडिट दिलवाने की जद्दोजहद कर रहा है।

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हॉलीवुड एक्ट्रेस, डायरेक्टर और राइटर एड्रीन की, जिसके कत्ल ने पूरी हॉलीवुड इंडस्ट्री को झकझोर दिया था। एड्रीन महज 40 साल की थीं, जब उनके बाथटब में उनकी लाश मिली थी। हर किसी का मानना था कि उन्होंने आत्महत्या की है, लेकिन महीनों बाद जब उनकी मौत से पर्दा उठा तो हर कोई हैरान था। एड्रीन ने आत्महत्या नहीं की थी, उनकी हत्या हुई थी, वो भी बिल्डिंग में काम करने वाले एक मामूली कारपेंटर के हाथों। आगे पढ़िए..

मलयाली एक्ट्रेस रानी पद्मिनी, जिनका 3 नौकरों ने किया कत्ल:जो घर खरीदना था उसके बाथरूम में छिपाई लाश, अस्पताल में लावारिस पड़ा रहा शव

मलयाली एक्ट्रेस रानी पद्मिनी, जिनकी घर के 3 नौकरों ने एक बेइज्जती का बदला लेने के लिए हत्या कर दी। उनका शव उनके बाथरूम में ही छिपाया गया था। एक्ट्रेस अपनी मां का सपना पूरा करने के लिए फिल्मों में आई थीं, लेकिन पहली हिंदी फिल्म रिलीज से पहले ही उनकी मौत हो गई। आगे पढ़िए..

Aaj Ka Rashifal 6 April 2024: आज काम ज्यादा रहेगा, भागदौड़ के बीच सेहत का ध्यान रखें

Aaj Ka Rashifal 6 April 2024: आज किसी बड़े फंक्शन में जा सकते हैं। समाज में सम्मान मिलेगा।

By Arvind Dubey

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 04:38 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 04:38 AM (IST)

Aaj Ka Rashifal 6 April 2024: आज काम ज्यादा रहेगा, भागदौड़ के बीच सेहत का ध्यान रखें
6 अप्रैल 2024, शनिवार का राशिफल

HighLights

  1. मेष: आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा। बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।
  2. वृषभ: विरोधी वर्ग आपके बनते कार्य में अड़चन पैदा कर सकता है।
  3. मिथुन: कार्य की अधिकता के कारण शारीरिक रूप से थकावट महसूस कर सकते हैं।

Aaj Ka Rashifal 6 April 2024: आज दिनांक 6 अप्रैल 2024, शनिवार को विक्रम सम्वत 2080, मास अमांत फाल्गुन, मास पूर्णिमांत चैत्र, तिथि द्वादशी है। यहां पढ़ें सभी 12 राशियों का दैनिक भविष्यफल

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आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा। बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। रुके हुए कामों को पूरा करने में सफलता प्राप्त होगी। काम के सिलसिले में लंबी यात्रा पर जा सकते हैं। परिवार में माहौल आपके पक्ष में रहेगा। आपसी मतभेद दूर होंगे, खुशनुमा माहौल महसूस करेंगे।

Aaj Ka Rashifal: वृषभ दैनिक राशिफल (Taurus Horoscope Immediately)

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आज स्वास्थ्य को लेकर परेशान रह सकते हैं। मौसमी बीमारियों की चपेट में आने से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में विरोधी वर्ग आपके बनते कार्य में अड़चन पैदा कर सकता है। परिवार में पत्नी से किसी बात पर झगड़ा हो सकता है।

Aaj Ka Rashifal: मिथुन दैनिक राशिफल (Gemini Horoscope Immediately)

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आज का दिन भाग दौड़ वाला रहेगा। कार्य की अधिकता के कारण शारीरिक रूप से थकावट महसूस कर सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में आज परिवर्तन करना ठीक नहीं रहेगा। पार्टनर आपको धोखा दे सकते हैं। कोई नया कार्य शुरू करने से पहले अच्छे से सोच विचार लें।

कर्क दैनिक राशिफल (Most cancers Horoscope Immediately)

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आज आप किसी बड़े फंक्शन में जा सकते हैं। समाज में सम्मान मिलेगा। कुल मिलाकर इस राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। वाणी पर संयम रखें। किसी भी प्रकार के वाद-विवाद में ना उलझें।

Aaj Ka Rashifal: सिंह दैनिक राशिफल (Leo Horoscope Immediately)

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आज का दिन खुशमिजाज रहने वाला है। कोई सुखद समाचार मिलेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। नए कार्य का शुभारंभ कर सकते हैं। पारिवारिक समस्याओं में राहत मिलेगी। पत्नी से चल रहे मतभेद दूर होंगे।

Aaj Ka Rashifal: कन्या दैनिक राशिफल (Virgo Horoscope Immediately)

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आज का दिन संभल कर चलें। कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले उसके बारे में अच्छे से जान लें। किसी भी व्यक्ति की बातों में ना आएं। नुकसान उठाना पड़ सकता है। परिवार में चल रहे मतभेद दूर होंगे।

Aaj Ka Rashifal: तुला दैनिक राशिफल (Libra Horoscope Immediately)

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आज नया वाहन खरीदने का विचार बना रहे हैं तो उसमें सफलता मिलेगी। प्रॉपर्टी में बड़ा निवेश करने का फैसला कर सकते हैं। आज किसी व्यक्ति को बड़ी धनराशि उधार देना हानिकारक रहेगा।

Aaj Ka Rashifal: वृश्चिक दैनिक राशिफल (Scorpio Horoscope Immediately)

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आज का दिन बड़ी राहत लेकर आने वाला है। न्यायालय पक्ष में चल रहे विवाद में आपको विजय मिलेगी। सामाजिक राजनीतिक क्षेत्र में आपका वर्चस्व कायम रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में बड़ी पार्टनरशिप में सहभागी हो सकते हैं।

Aaj Ka Rashifal: धनु दैनिक राशिफल (Sagittarius Horoscope Immediately)

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आज बाहर की यात्रा पर जा सकते हैं। यात्रा अपने सामान का ध्यान रखें। वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं। आज कहीं से बड़ा आर्थिक लाभ हो सकता है। पैतृक संपत्ति में अधिकार मिल सकता है। परिवार में माता-पिता का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।

Aaj Ka Rashifal: मकर दैनिक राशिफल (Capricorn Horoscope Immediately)

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आज का दिन उलझन भरा रहेगा। किसी पारिवारिक विवाद में फंस सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में बड़ी आर्थिक गिरावट महसूस होगी। मानसिक चिंता बनी रहेगी। आज पत्नी और बच्चों को लेकर कोई बड़ा डिसीजन ले सकते हैं।

Aaj Ka Rashifal: कुंभ दैनिक राशिफल (Aquarius Horoscope Immediately)naidunia_image

आज किसी पुराने विवाद में उलझ सकते हैं, इस कारण आप कानूनी शिकंजे में फंस सकते हैं। आज व्यापार-व्यवसाय में विरोधी आपके काम को बिगाड़ने का प्रयास करेंगे। बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। शेयर मार्केट में बड़ा निवेश करने से परिवार में मतभेद बढ़ सकते हैं।

Aaj Ka Rashifal: मीन दैनिक राशिफल (Pisces Horoscope Immediately)

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आज व्यापार-व्यवसाय में बड़े लाभ के योग बन रहे हैं। कहीं से पुराना रुका हुआ धन मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। व्यापार व्यवसाय में बड़ी पार्टनरशिप डील हो सकती है, जिससे आर्थिक स्रोत के नए रास्ते बनेंगे। परिवार में मांगलिक कार्य के योग बनेंगे।

Lok Sabha Election: रतलाम में भूरिया vs भूरिया की लड़ाई रही दिलचस्प, एक ने कांग्रेस छोड़ी तो दूसरे को भोपाल छोड़ना पड़ा

झाबुआ में 1998 का लोकसभा चुनाव दो बड़ी पार्टियों के भूरिया प्रत्याशियों के बीच पहले दिलचस्प मुकाबले के लिए जाना जाता है। दिलीप सिंह भूरिया 1998 से इस सीट से भाजपा सांसद बनकर दिल्ली जाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। 16 साल बाद 2014 का लोकसभा चुनाव जीतकर वे भाजपा सांसद बने।

By Neeraj Pandey

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 04:00 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 04:00 AM (IST)

Lok Sabha Election: रतलाम में भूरिया vs भूरिया की लड़ाई रही दिलचस्प, एक ने कांग्रेस छोड़ी तो दूसरे को भोपाल छोड़ना पड़ा
भूरिया विरुद्ध भूरिया की लड़ाई दिलचस्प रही

HighLights

  1. भूरिया विरुद्ध भूरिया की लड़ाई दिलचस्प रही
  2. एक के मन में भाजपा से सांसद बनने की इच्छा जागी
  3. दूसरे को सांसद पद के लिए मंत्री पद छोड़ना पड़ा

शवंतसिंह पंवार, झाबुआ। रतलाम-झाबुआ क्षेत्र की राजनीति में भूरिया विरुद्ध भूरिया की राजनीतिक लड़ाई दिलचस्प रही है। वर्षों दोनों के बीच एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ मची रही है। पहले जब दोनो कांग्रेस में रहे तो गुटबंदी चलती रही। जब अलग-अलग दल में बंट कर लड़ने लगे तो मुकाबला ही अलग तरह का हो गया। यह मुकाबला भी एक-दो साल नहीं बल्कि डेढ़ दशक से अधिक चला।

लड़ाई का केंद्र बना लोकसभा चुनाव

1996 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ कांग्रेस के ही बड़े नेताओं ने विश्वासघात किया तो दिग्गज सांसद दिलीप सिंह भूरिया का कांग्रेस से मोह भंग हो गया। दिल्ली में भी खींचतान चल रही थी। परिणाम यह रहा कि 1998 का लोकसभा चुनाव सांसद भूरिया ने भाजपा से लड़ने का मन बना लिया। जब वे भाजपा में गए तो कांग्रेस उनके टक्कर का नेता खोजने लगी। तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल के मंत्रालय का काम छुड़वाते हुए अपने कैबिनेट मंत्री कांतिलाल भूरिया को सांसद का चुनाव लड़ने के लिए झाबुआ भेजा। दोनो भूरिया में चुनावी जंग शुरू हुई।

दोनो को देना था संदेश

1980 से कांग्रेस के सांसद बनकर लोकसभा में बैठने वाले दिलीप सिंह भूरिया की इच्छा थी कि अब वे भाजपा के सांसद बनकर दिखाए। ताकि राजनीतिक संदेश यह जाए कि रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट पर कांग्रेस नहीं बल्कि दिलीप सिंह भूरिया जीतता है। पार्टी उनके पीछे चलती है। उधर कांतिलाल भूरिया यह राजनीतिक संदेश देना चाहते थे कि कांग्रेस इस क्षेत्र में मजबूत है। किसी नेता के छोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। चुनाव प्रचार के दौरान आरोप – प्रत्यारोप भी खूब चले।

एक साल बाद फिर चुनाव

1998 का लोकसभा चुनाव दो बड़ी पार्टियों के भूरिया प्रत्याशियों के बीच पहले दिलचस्प मुकाबले के लिए जाना जाता है। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया को जीत मिली। दिल्ली जाने के लिए उन्हें प्रदेश का मंत्री पद छोड़ना पड़ा। एक साल बाद देश में चल रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण फिर लोकसभा चुनाव हो गए। 1999 के चुनाव में दूसरी बार कांग्रेस व भाजपा ने फिर अपने भूरियाओं को प्रत्याशी बनाया। इस बार कांग्रेस के भूरिया बड़े अंतर से चुनाव जीत गए।

जितवाकर दिखा देना

फिर 2004 लोकसभा चुनाव आया तो भाजपा को अनुकूल वातावरण लगा। कारण यह था संसदीय सीट की आठ में से सात विधानसभा में भाजपा पहली बार अपने विधायक बना चुकी थी व चार माह पहले उसके हाथ भोपाल की सत्ता भी लग गई थी। भाजपा ने दिलीप सिंह भूरिया का टिकट काटते हुए झाबुआ की पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रेलम चौहान को प्रत्याशी बना दिया। बताया जाता है कि उस समय टिकट कटने से नाराज दिलीप सिंह भूरिया ने भोपाल में तत्कालीन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष कैलाश जोशी को यह कह दिया था कि अब चुनाव जितवाकर दिखा देना।हुआ भी यही, कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया वातावरण अनुकूल नहीं होने के बावजूद चुनाव जीत गए।

घूमकर फिर आए

2004 के बाद दिलीप सिंह भूरिया ने भाजपा छोड़कर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का दामन थाम लिया। कुछ दिन बाद वापस कांग्रेस में आ गए। अगले चुनाव के पहले घूमकर फिर भाजपा में आ गए। 2009 का लोकसभा चुनाव फिर दो भूरियाओ के बीच लड़ा गया। परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहा।

Indore Kirana Bazar Price: सौंफ का उत्पादन बीते वर्ष से दोगुना, दाम में तेजी के आसार नहीं

शकर-गुड़ के दाम – शकर 3780-3860, गुड करेली कटोरा 3700-3800, लड्डू 3900-4000, गिलास एक किलो 4600-4800, भैली 3500-3600 रुपये प्रति क्विंटल। नारियल – नारियल 120 भरती 1750-1800, 160 भरती 1750-1800, 200 भरती 1650-1700, 250 भरती 1700-1750 प्रति बोरी और खोपरा गोला बक्सा 118-135, कट्टे 107-110 रुपये प्रति किलो और खोपरा बूरा 2350-4400, नारियल-बूरा अल्पाहार (1 किलो) 2750 प्रति 15 किलो।

फलाहारी के दाम – साबूदाना सच्चासाबू एगमार्क (500 ग्राम) 7740, सच्चासाबू खीरदाना 7600, सच्चासाबू चीनीदाना 7830, सच्चासाबू फूलदाना 8190, साबूदाना चक्र एगमार्क 7440, शिवज्योति (1 किलो) 7360, गोपाल लूज (25 किलो) 6950, कुकरीजाकी मोरधन (500 ग्राम) 9790 प्रति क्विंटल। रायल रतन साबूदाना (1 किलो) 7300, रायलरतन (500 ग्राम) 7360 व रायलरतन लूज 6800, रायल सच्चामोती पोहा एक किलो 5450 व 35 किलो पैकिंग में 4800, रायलरतन मोरधन (आधा किलो) 10500 रुपये।

पूजन सामग्री – केसर 180-188 ब्रांडेड 210-213, देशी कपूर 550 से 750, ब्रांडेड कपूर 750 से 800, पूजा बादाम 110 से 125, बेस्ट 175 से 190, पूजा सुपारी 475, अरीठा 130, सिंदूर (25 किलो) 7400 रुपये।

मसालों के दाम – हल्दी निजामाबाद 180 से 210, हल्दी लालगाय 275-280 कालीमिर्च गारबल 555 से 565 एटम 575 से 580, मटरदाना 590 से 625, जीरा ऊंझा 290 से 310, मीडियम 320 से 340 बेस्ट 360-370 सौंफ मोटी 95 से 125, मीडियम 175 से 225, बेस्ट 355 से 375, बारीक 350-400 , लौंग मीडियम 850 से 900, बेस्ट 950-965 सौंठ 295 से 325 बेस्ट 375 से 400, दालचीनी 245-255, जायफल 580-650, बेस्ट 700 जावत्री 1900-1950, बड़ी इलायची 1375-1425, मीडियम 1475-1575 और बेस्ट 1625-1675, पत्थरफूल 351 से 375, बेस्ट 475, बाद्यान फूल 550 से 575, बेस्ट 750-775 शाहजीरा खर 350 से 360, ग्रीन 600-611, तेजपान 91-101, नागकेसर 750 से 775, धोली मूसली 2100 से 2250, सिंघाड़ा छोटा 90-105 बड़ा 115 हींग वनदेवी दाना751- 3450, पाउच में 10 ग्राम 3530, 121- 50 ग्राम 3250, पाउच में 10 ग्राम 3330, 111-50 ग्राम 3050, पाउच में 10 ग्राम 3130, पावडर 875-925 , हरी इलायची 1850-1900 मीडियम बोल्ड 2050 से 2100 बोल्ड 2250-2350 बेस्ट ए बोल्ड 2400-2650 और सफेद तिल्ली 178-195 बेस्ट 200-220 रुपये।

सूखे मेवों के दाम – काजू डब्ल्यू 240 नंबर 760-800, काजू डब्ल्यू 320 नंबर 680 से 700, काजू डब्ल्यू 300 नंबर 670-680, काजू जेएच 590-600 टुकड़ी 530-550, बादाम 550-570 बेस्ट 640-660 आस्ट्रेलियन बादाम बेस्ट 625-750 खसखस मीडियम 650-725 बेस्ट 1125-1225 तरबूज मगज 750-760 खारक 115-135 मीडियम 145 से 175 बेस्ट 225 से 250 ए. बेस्ट 301 किशमिश कंधारी 420 से 470, बेस्ट 550-650, इंडियन 140 से 150 बेस्ट 170 से 190 , चारोली 1485 से 1550, बेस्ट 1600 मुनक्का 450 से 550 बेस्ट 650 से 900, अंजीर 750 से 900 बेस्ट 1150 से 1450 मखाना 650 से 785, मीडियम 825 से 875 बेस्ट 900-925, पिस्ता 1300-1450 ईरानी 1500-1600, नमकीन पिस्ता 850-1000 अखरोट 450 से 500, बेस्ट 550 से 650, अखरोट गिरी 700 से 1050 जर्दालू 250 से 350, बेस्ट 450 से 550 गोंद नाइजीरिया 180-250, गोंद धावड़ा 400-700 रुपये।

Gold and Silver Value in MP: इंदौर, उज्जैन और रतलाम सराफा बाजार बाजार में सोना-चांदी के आज ये हैं दाम

इंदौर में शुक्रवार को सोना कैडबरी नकद में 70300 रुपये प्रति दस ग्राम तथा चांदी 77900 रुपये प्रति किलो बोली गई।

By Lokesh Solanki

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 02:50 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 02:50 AM (IST)

Gold and Silver Price in MP: इंदौर, उज्जैन और रतलाम सराफा बाजार बाजार में सोना-चांदी के आज ये हैं दाम

Gold and Silver Value in MP: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। डॉलर में आई कमजोरी से और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की तीखी टिप्पणियों के कारण ग्रीनबैक जहां मजबूत हो गया, वहीं अंतरराष्ट्रीय बुलियन वायदा मार्केट टूट गया। शुक्रवार को कामेक्स पर छोटे निवेशकों और सटोरियों की मुनाफावसूली की बिकवाली आने के कारण कॉमेक्स पर सोना वायदा सर्वोच्च स्तर से गिर गया। कामेक्स पर गुरुवार को 2,305.31 डालर रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद शुक्रवार को हाजर में सोना गिरकर 2,292 प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। हालांकि इसका भारतीय बाजारों पर कोई प्रभाव नहीं देखा गया।

शुक्रवार को इंदौर में सोना कैडबरी नकद में 300 रुपये और बढ़कर 70300 रुपये प्रति दस ग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गया। ज्वेलर्स का मानना है कि मार्च और अप्रैल की शुरुआत में तेजी के बाद सोने में हाजिर दामों पर खरीदारी की गति कम हो गई। फिर भी सुरक्षित आश्रय की मांग बढ़ने से आगे सोना को फायदा हो सकता है, खासकर ईरान और इजरायल के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति खराब होने की आशंका से।

इधर, कामेक्स पर चांदी वायदा भी करीब 51 सेंट घटकर 23 डालर से नीचे 22.92 डालर प्रति औंस पर आ गई। भारतीय बाजार में चांदी में भी मुनाफावसूली की बिकवाली रही। इंदौर सराफा मेें चांदी घटकर 77900 रुपये प्रति किलो पर आ गई। विश्व में करीब 50 से ज्यादा देशों में इस साल चुनाव होने से बुलियन मार्केट अस्थिर रहने की संभावना है। कॉमेक्स सोना ऊपर में 2292 तथा नीचे में 2267 डॉलर प्रति औंस और चांदी ऊपर में 26.82 व नीचे में 26.27 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती देखी गई।

इंदौर में सोना-चांदी के बंद भाव

इंदौर में सोना कैडबरी रवा नकद में 70300 रुपये, सोना (आरटीजीएस) 71600 रुपये तथा सोना (91.60 कैरेट) (आरटीजीएस) 65625 रुपये प्रति दस ग्राम बोला गया। गुरुवार को सोना 70000 रुपये पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी चौरसा 77900 रुपये, चांदी चौरसा (आरटीजीएस) 80400 रुपये तथा चांदी टंच 77800 रुपये प्रति किलो बोली गई। गुरुवार को चांदी 78000 रुपये।

Indore Mandi Bhav: मटर के आयात शुल्क की छूट आगे बढ़ने की उम्मीद, आयातित तुवर 100 रुपये टूटी

तुवर महाराष्ट्र सफेद 10500-10700, कर्नाटक 10700-10900, निमाड़ी तुवर 9000-10100 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।

By Lokesh Solanki

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 02:20 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 02:20 AM (IST)

Indore Mandi Bhav: मटर के आयात शुल्क की छूट आगे बढ़ने की उम्मीद, आयातित तुवर 100 रुपये टूटी

Indore Mandi Bhav: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दिसम्बर 2023 में सरकार ने पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति प्रदान की थी। आरंभिक चरण में इसकी अवधि मार्च 2024 नियत की गई थी, जिसे बाद में अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया गया। चूंकि आम चुनाव की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है और मई में यह जोर शोर से जारी रहेगी, इसलिए म्यांमार विश्लेषकों को लगता है कि दाल-दलहन के मोर्चे पर सरकार कोई जोखिम नहीं उठाते हुए पीली मटर के आयात की समय सीमा एक माह के लिए बढ़ा सकती है। इधर चार-पांच दिनों से तुवर में लगातार चली रही तेजी शुक्रवार को थम गई।

दरअसल, ऊंचे दामों पर तुवर में मिलर्स की लेवाली घटने के साथ ही हल्की और मीडियम क्वालिटी की तुवर में बिकवाली का दबाव बढ़ने से भाव में गिरावट दर्ज की गई। आयातित तुवर में करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल की मंदी रही, जबकि देसी तुवर का स्टाक बेहद कम होने से इसके दाम मजबूती पर टिके रहे। तुवर महाराष्ट्र सफेद 10500-10700, कर्नाटक 10700-10900, निमाड़ी तुवर 9000-10100 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।

व्यापारियों का कहना है कि मिलों में तुवर दाल का पर्याप्त स्टाक होने और तुवर दाल में जैसी ग्राहकी होना चाहिए वैसी नहीं होने के साथ ही सरकार की निगाहें स्टाक पर होने पर लगी रहने से मिलर्स की तुवर खरीदी कमजोर हो गई है। इससे भी दाम टूटे हैं। वहीं चना कांटे में भी अपेक्षित ग्राहकी नहीं होने और हलके मालों की आवक बढ़ जाने से भाव में पुन: गिरावट देखने को मिली है। चना कांटा 50 रुपये घटकर 5800-5950 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।

दूसरी ओर आयातित मसूर में ऊंचे दामों पर बिकवली बढ़ने और लेवाल कमजोर होने से भाव में नरमी रही। मसूर 50 रुपये घटकर 6050 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। काबुली चने में लोकल के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की पूछपरख रहने से भाव मजबूती पर टिके हुए है। अन्य दाल-दलहन में कारोबार सामान्य रहा। भाव में स्थिरता रही। कंटेनर में डॉलर चना बढ़कर 40/42 11900, 42/44 11700, 44/46 11400, 58/60 9400, 60/62 9300, 62/64 9200 रुपये क्विंटल पर पहुंच गया।

दलहन के दाम – चना कांटा 5800-5950, विशाल 5650-5850, डंकी 5300-5500, मसूर 6050, तुवर महाराष्ट्र सफेद 10500-10700, कर्नाटक 10700-10900, निमाड़ी तुवर 9000-10100, मूंग 9000-9200, बारिश का मूंग नया 9200-10000, एवरेज 7000-8000, उड़द बेस्ट 8800-9200, मीडियम 7000-8000, हल्की उड़द 3000-5000, गेहूं मिल क्वालिटी 2400-2460, मालवराज गेहूं 2200-2400, लोकवन 2650-2800, पूर्णा 2650-2960 रुपये क्विंटल के भाव रहे।

दालों के दाम – चना दाल 7800-7900, मीडियम 8000-8100, बेस्ट 8200-8300, मसूर दाल 7250-7350, बेस्ट 7450-7550, मूंग दाल 10550-10650, बेस्ट 10750-10850, मूंग मोगर 11450-11550, बेस्ट 11650-11750, तुवर दाल 12800-13000, मीडियम 13900-14000, बेस्ट 14700-14800, ए. बेस्ट 15700-15800, पैक्ड तुवर दाल नई 15900, उड़द दाल 11100-11200, बेस्ट 11300-11400, उड़द मोगर 11450-11550, बेस्ट 11650-11750 रुपये प्रति क्विंटल के भाव रहे।

इंदौर चावल भाव – दयालदास अजीतकुमार छावनी के अनुसार बासमती (921) 11500-12500, तिबार 10000-11000, बासमती दुबार पोनिया 8500-9500, मिनी दुबार 7500-8500, मोगरा 4500-7000, बासमती सेला 7000-9500 कालीमूंछ डिनरकिंग 8500, राजभोग 7500, दुबराज 4500-5000, परमल 3200-3400, हंसा सेला 3400-3600, हंसा सफेद 2800-3000, पोहा 4300-4700 रुपये क्विंटल।

Edible Oil Worth in Indore: वैश्विक बाजार की तेजी थमी, इंदौर में सोया तेल 25 रुपये टूटा

शुक्रवार को सोयाबीन तेल इंदौर करीब 20-25 रुपये टूटकर 975-980, पाम तेल 1000 रुपये प्रति दस किलो रह गया।

By Lokesh Solanki

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 02:05 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 02:05 AM (IST)

Edible Oil Price in Indore: वैश्विक बाजार की तेजी थमी, इंदौर में सोया तेल 25 रुपये टूटा

Edible Oil Worth in Indore: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नईदुनिया ने दो दिन पहले आशंका जताई थी कि चीन की सोयाबीन बिक्री वैश्विक तेल बाजार को झटका दे सकती है। वहीं हुआ और वैश्विक खाद्य तेल बाजारों में चल रही लगातार तेजी शुक्रवार को थम गई, जिससे भारतीय बाजारों में भी मंदी का वातावरण रहा। दरअसल, सीबॉट में कमजोरी आने के कारण केएलसीई फिसल गई। केएलसीई करीब 55 अंक माइनस पर कारोबार करता देखा गया। इंपोर्ट डेटा भी पोर्ट पर भारी मात्रा में सूरजमुखी और सोया तेल की आपूर्ति का संकेत दे रहा है।

इधर, हाजिर बाजारों में भी ऊंचे दामों पर ग्राहकी अटकने के कारण सोया तेल, पाम तेल की कीमतों में गिरावट रही। शुक्रवार को सोयाबीन तेल इंदौर करीब 20-25 रुपये टूटकर 975-980, पाम तेल 1000 रुपये प्रति दस किलो रह गया। अगले हफ्ते लंबी छुट्टी होने के साथ 1-10 अप्रैल के बीच पाम तेल के एक्सपोर्ट और उत्पादन के आंकड़े और मार्च महीने की डिमांड सप्लाई की एमपीओबी रिपोर्ट आने से पहले बाजार में मुनाफावसूली की बिकवाली देखी गई। इस वजह से भी बाजार में मंदी को सपोर्ट मिला है।

व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा स्तर पर नई खरीदारी के लिए फिलहाल अनुकूल समय नहीं है। वर्तामान दामों में अभी और करेक्शन की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर बाजारों में पाम तेल अभी भी सोया तेल से महंगा बिक रहा है। ऐसे में पाम तेल के ऊंचे भाव मांग प्रभावित करेंगे क्योंकि खुदरा विक्रेता सोया और सूरजमुखी जैसे प्रीमियम तेलों की और रुख सकते हैं। सोयाबीन 4600-4650, सरसों निमाड़ी 5800, एवरेज 5400-5600, राइया 4600-4800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव रहे।

लूज तेल के दाम – (प्रति दस किलो के भाव) मूंगफली तेल इंदौर 1510-1530, मुंबई मूंगफली तेल 1530, इंदौर सोयाबीन तेल रिफाइंड 975-980, इंदौर सोयाबीन साल्वेंट 935-944, इंदौर पाम 1000, मुंबई सोया रिफाइंड 980, सोया डीगम 900, मुंबई पाम तेल 975, राजकोट तेलिया 2400, गुजरात लूज 1500, कपास्या तेल इंदौर 940 रुपये।

सोयाबीन प्लांट खरीदी भाव – अवी एग्रो उज्जैन 4675, बंसल मंडीदीप 4725, बैतूल आइल सतना 4830, बैतूल 4775, कोरोरेशन ब्यावरा 4720, धानुका नीमच 4800, दिव्य ज्योति 4740, पचोर 4715, हरिओम रिफाइनरी 4800, केएन एग्री इटारसी 4690, खंडवा आइल 4725, लिविंग फूड शूजालपुर 4735, मित्तल सोया देवास 4750, एमएस साल्वेक्स नीमच 4800, नीमच प्रोटीन 4800, पतंजलि फूड 4680, प्रकाश 4735, प्रेस्ट्रीज ग्रुप देवास 4750, रामा धरमपुर 4600, आरएच साल्वेक्स सिवनी 4750, सांवरिया इटारसी 4750 रुपये प्रति क्विंटल।

कपास्या खली – (60 किलो भरती) इंदौर 1850, देवास 1850, उज्जैन 1850, खंडवा 1825, बुरहानपुर 1825, अकोला 2800 रुपये।

चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता से कहा- आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच में प्रदेश की सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही थी।

By Yogeshwar Sharma

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 12:36 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 12:36 AM (IST)

चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता से कहा- आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

HighLights

  1. दयालबंद में मां बेटे की दम घुटने से मौत को हाई कोर्ट ने लिया गंभीरता से
  2. आम आदमी की सुरक्षा को लेकर दी हिदायत
  3. दमकल की व्यवस्था ना किए जाने को लेकर नाराजगी जताई

नईदुनिया न्यूज,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने दयालबंद में आग लगने की घटना में दम घुटने से मां-बेटे की मौत को गंभीरता से लिया है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने इस घटना को लेकर संवेदना जताई और जिला प्रशासन की ओर से समय पर दमकल की व्यवस्था ना किए जाने को लेकर नाराजगी जताई। डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता से कहा कि देश में आम चुनाव के बहाने आम आदमी की सुरक्षा व सुविधा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आपकी सरकार है और मशीनरी भी है। इस पर आपको नियंत्रण तो रखना ही पड़ेगा।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच में प्रदेश की सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही थी। नई सड़कों के निर्माण के लिए निविदा जारी करने को लेकर जब महाधिवक्ता व अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद ही निविदा समेत आगे की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। चुनाव आचार संहिता के कारण आगे की प्रक्रिया एनएचएआइ और पीडब्ल्यूडी द्वारा पूरी नहीं की जा रही है। इस बीच महाधिवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि जनहित के कार्य को सामने रखकर अगर हाई कोर्ट निविदा जारी करने और निर्माण कार्य प्रारंभ करने का निर्देश जारी करे तो विभागीय प्रक्रिया के साथ ही निर्माण कार्य को प्रारंभ किया जा सकता है। महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर डिवीजन बेंच ने आदेश जारी कर दिया। इसी बीच चीफ जस्टिस ने दयालबंद की घटना की याद की। महाधिवक्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आप बताइए दयालबंद में दम घुटने से मां व बेटे की मौत हो गई। कितनी भयावह घटना है। आप और हम सोच नहीं सकते। जिला प्रशासन की लापरवाही देखिए। दमकल चलाने के लिए ड्राइवर की व्यवस्था नहीं कर पाए। एक छुट्टी पर चला गया और एक रैली में व्यस्त रहा। कितनी गलत बात है। प्रशासनिक कामकाज हो रहा है या नहीं। चुनाव के नाम पर आप ऐसे ही चलाते रहेंगे क्या। आम आदमी की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान तो रखना ही होगा। चुनाव के बहाने जरूरी काम को तो नहीं छोड़ा जा सकता।

चीफ जस्टिस की चिंता और संवेदना आई नजर

दयालबंद की घटना के बाद जिस तरह प्रशासनिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त नजर आई उसे लेकर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की नाराजगी सामने आई। मां बेटे की मौत को लेकर उनकी संवेदना और चिंता साफतौर दिखाई दी। महाधिवक्ता को संबोधित करते हुए दोटूक कहा कि आम आदमी को असहाय ना छोड़िए। उनकी सुरक्षा का ध्यान हर हाल में रखना होगा। स्टेट की मशीनरी है। आपको तो नियंत्रण करना पड़ेगा ना। आपको ध्यान देना होगा। चीफ जस्टिस ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश भी दिया।

ये हुई थी घटना

दयालबंद के मधुबन रोड स्थित शिखा पब्लिक स्कूल के पास रहने वाले रोमी कश्यप रविवार 31 मार्च की शाम को काम पर गए थे। उनकी पत्नी नम्रता कश्यप (30) और छह साल का बेटा अर्थ कश्यप घर पर थे। उन्होंने मकान के ऊपरी हिस्से को छात्रों को किराए पर दिया है। छात्र भी घर पर ही थे। शाम छह बजे के करीब मकान के सामने बिछाए गए बिजली के केबल में शार्ट सर्किट हो गया। इससे निकली चिंगारी से पोर्च में रखे तारपिन तेल के चार ड्रम में आग लग गई। आग लगने से घर के अंदर मौजूद महिला और उसका बेटा नहीं निकल सके। चार ड्रम में लगी आग को देखकर आसपास के लोगों ने तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। धुआं भरने पर ऊपरी मंजिल पर मौजूद छात्र छत के रास्ते से बाहर निकलने में कामयाब हो गए। महिला और बच्चे वहीं फंसे रह गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने किसी तरह आग पर काबू पाया। इसके बाद मोहल्ले में ही रहने वाले वैभव विश्वनाथ दुबे ने मकान के अंदर जाकर महिला और उसके बेटे को निकाला। तब तक मां और बेटा दम घुटने के कारण बेहोश हो गए थे। दोनों को तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अपोलो में इलाज के दौरान महिला और बेटे की मौत हो गई।

Indore Crime Information: गोली मारने वाले अभिषेक यादव की कॉल डिटेल से लिंक जोड़ेगी पुलिस, निकालेगी पिस्टल की जानकारी

क्राइम ब्रांच अनलाक नहीं कर पाई दीपक, स्नेहा और अभिषेक के मोबाइल। पुलिस ने दोस्तों और स्वजन को पूछताछ के लिए बुलाया।

By Hemraj Yadav

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 01:05 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 01:05 AM (IST)

Indore Crime News: गोली मारने वाले अभिषेक यादव की कॉल डिटेल से लिंक जोड़ेगी पुलिस, निकालेगी पिस्टल की जानकारी

Indore Crime Information: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। स्नेहा और दीपक की गोली मारकर हत्या करने वाले अभिषेक यादव की कॉल डिटेल निकाली गई है। इसी से पिस्टल की जानकारी और स्नेहा से प्रेम संबंधों की लिंक जोड़ी जाएगी। अभिषेक का आपराधिक रिकार्ड भी देखा जा रहा है। दोस्तों और स्वजन को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

एडिशनल डीसीपी जोन-4 आनंद कुमार यादव के मुताबिक, स्वामीनारायण मंदिर के गार्ड हरि राठौर की शिकायत पर अभिषेक आत्माराम यादव पर हत्या और अरिहंत कालेज के कैंटीन संचालक दर्पण मेहरा ने मर्ग कायम करवाया है। पुलिस ने यूं तो तीनों की कॉल डिटेल निकाली है, लेकिन अभिषेक की सीडीआर महत्वपूर्ण है। अभिषेक ने हत्या करने के बाद वाट्सएप पर मैसेज भेजा था। स्नेहा से प्रेम संबंध और मंदिर में शादी करने के बारे में लिखा था।

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यह जानकारी निकाल रही पुलिस

एडीसीपी के मुताबिक, पुलिस सीडीआर से दोनों के संबंधों की जांच करेगी। स्नेहा और दीपक की सीडीआर से तय होगा कि उनमें कब से बात होने लगी थी। अभिषेक ने पिस्टल कहां से ली, इसकी भी जांच चल रही है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून) अमित सिंह ने उसका आपराधिक रिकार्ड और करीबी दोस्तों की जानकारी जुटाने के आदेश दिए हैं।

फुटेज में रिकार्ड हुई हत्या: दीपक जाने लगा तो उसे गोली मार दी

स्वामीनारायण मंदिर में हुई पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हो गई है। गुरुवार को पुलिस ने मंदिर प्रबंधन से डीवीआर जब्त किया। दीपक, स्नेहा और अभिषेक परिसर की बेंच पर बैठकर बातचीत करते नजर आए। तीनों में कुछ बहस हुई और दीपक ने तल्खी में स्कूटर स्टार्ट किया। तभी अभिषेक आगे बढ़ा और गोली मार दी। स्नेहा रोते हुए दीपक से लिपट गई।

चौकीदार की पत्नी ने बचाने की कोशिश की

अभिषेक ने स्नेहा की तरफ पिस्टल घुमाई लेकिन उस पर गोली नहीं चलाई। चौकीदार हरि की पत्नी धूपा बाई अभिषेक के सामने खड़ी हो गई और कहा कि लड़की को मत मारना। अभिषेक ने धूपा को धमकाया तो वह बीच में से हट गई और अभिषेक ने स्नेहा को दो गोली मार दी। तभी हरि ललकारता हुआ दौड़ा तो उसे भी धमकाते हुए बाहर निकल गया। पुलिस वीडियो फुटेज को सबूत के तौर पर केस डायरी में लगाएगी। हालांकि अभिषेक के विरुद्ध दर्ज हत्या के केस में खात्मा लगेगा।

तीनों मोबाइल को अनलाक नहीं कर पाई क्राइम ब्रांच

पुलिस ने स्नेहा, अभिषेक और दीपक के मोबाइल जब्त कर लिए थे। गुरुवार रात अपराध शाखा की मदद ली लेकिन शुक्रवार को फोन लौटा दिए। एडीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक, दो आइफोन और एक वन प्लस (नार्ड) है। तीनों फोन के लाक नहीं खुले हैं। रिसेट करने पर डाटा उड़ जाएगा। साइबर एक्सपर्ट ने फोन भंवरकुआं पुलिस को लौटा दिए हैं। पुलिस ने द्वारकापुरी स्थित अभिषेक यादव के रूम की तलाशी ली लेकिन कुछ नहीं मिला। भाई ने भी स्नेहा जाट से संबंधों की जानकारी से इन्कार कर दिया।

स्वजन और दोस्तों के बयान लेगी पुलिस

एसीपी देवेंद्रसिंह धुर्वे के मुताबिक, कॉल डिटेल का विश्लेषण कर स्नेहा, दीपक और अभिषेक के करीबियों के कथन लेंगे। किससे तीनों की ज्यादा बात हुई, उन्हें बुलाया जाएगा। पुलिस ने स्वजन से भी संपर्क किया है। हालांकि परिवार अभी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। दीपक के स्वजन ने स्नेहा को पहचानने से इन्कार कर दिया है।

चार जवानों की हत्या के आरोपित सीआरपीएफ जवान की बर्खास्तगी को हाई कोर्ट ने माना अवैध

प्रीति देवी तिवारी ग्राम नरौना जिला लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ने वरिष्ठ अधिवक्ता केए अंसारी, मीरा अंसारी और अमन अंसारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पति के खिलाफ केंद्र सरकार व सीआरपीएफ की कार्रवाई को चुनौती दी थी।

By Yogeshwar Sharma

Publish Date: Sat, 06 Apr 2024 12:39 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 06 Apr 2024 12:39 AM (IST)

चार जवानों की हत्या के आरोपित सीआरपीएफ जवान की बर्खास्तगी को हाई कोर्ट ने माना अवैध
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

HighLights

  1. जेल में हो गई थी मौत
  2. 11 साल कानूनी लड़ाई के बाद पत्नी को अब मिली राहत
  3. बर्खास्तगी आदेश को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती

नईदुनिया न्यूज,बिलासपुर। अपने ही साथी जवानों की हत्या के आरोप में सेवा से बर्खास्त व जेल में सजा काटने के दौरान मृत जवान की विधवा ने पति की बेगुनाही व बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में सीआरपीएफ के कोर्ट आफ इंक्वायरी के आधार पर बर्खास्तगी आदेश को अवैध माना है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता अपने पति की मृत्यु यानी 24 अप्रैल 2013 तक मिलने वाले सभी सेवा लाभों की भी हकदार होगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस न्यायालय ने याचिकाकर्ता के पति की मृत्यु की प्रकृति पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।

प्रीति देवी तिवारी ग्राम नरौना जिला लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ने वरिष्ठ अधिवक्ता केए अंसारी, मीरा अंसारी और अमन अंसारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पति के खिलाफ केंद्र सरकार व सीआरपीएफ की कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिका के अनुसार पति स्व. दीप कुमार तिवारी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र अरनपुर, जिला दंतेवाड़ा में कमांडेंट 111 बटालियन, सीआरपीएफ कैंप में तैनात थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने 25 दिसंबर 2012 की रात में सीआरपीएफ के चार जवानों की हत्या की थी और अपने बैरक के एक कांस्टेबल को गोली मारकर घायल कर दिया था। कोर्ट आफ इंक्वायरी और विभागीय जांच के बाद दोषी जवान को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। जेल में बंद रहने के दौरान 24 अप्रैल 2013 को उनकी मृत्यु हो गई। जेल में बंद रहने के दौरान स्व. दीप कुमार तिवारी द्वारा की गई अपील खारिज कर दी गई। इसके तहत अपीलीय प्राधिकारी ने अनुशासनात्मक प्राधिकारी के छह मार्च 2013 के आदेश की पुष्टि की है, जिसमें उनके पति को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। चार जवानों की हत्या के आरोप में राज्य पुलिस द्वारा आइपीसी की धारा 302 व 307 के तहत गिरफ्तार किया। उसी दिन 28 दिसंबर 2012 के आदेश द्वारा 25 दिसंबर 2012 से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद जांच अदालत (कोर्ट आफ इंक्ववायरी) का गठन किया गया और जांच अदालत ने अपने निष्कर्ष और सिफारिश से माना कि दीप कुमार तिवारी जवानों की हत्या के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। जांच अदालत की रिपोर्ट के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया।

पति-पत्नी दोनों की पुनरीक्षण याचिका खारिज

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल नियम, 1955 के नियम 27(सीसी)(ii) और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के नियम 19(ii) के तहत याचिकाकर्ता के पति को छह मार्च 2013 से सेवा से बर्खास्तगी की सजा दी गई और अन्य लाभ भी जब्त कर लिए गए। इसके खिलाफ उन्होंने उप महानिरीक्षक के समक्ष अपील की। पुलिस, हैदराबाद रेंज, सीआरपीएफ, हैदराबाद और अपीलीय प्राधिकारी ने अपने आदेश तीन अगस्त 2013 द्वारा अनुशासनात्मक प्राधिकारी के निष्कर्षों की पुष्टि करते हुए अपील को खारिज कर दिया। इस बीच, याचिकाकर्ता के पति की 24 अप्रैल 2013 को जेल में मृत्यु हो गई। याचिका के अनुसार

पति की मृत्यु के बाद पत्नी होने के नाते याचिकाकर्ता ने नियम 1965 के नियम 29 के तहत पुनरीक्षण प्राधिकारी के समक्ष आवेदन पेश किया जिसे पुनरीक्षण प्राधिकारी ने खारिज कर दिया।

कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस संजय के अग्रवाल ने अपने फैसले में कहा है कि प्राकृतिक न्याय सिद्धांत की न्यूनतम आवश्यकताओं का अनुपालन किए बिना अपीलकर्ता के खिलाफ ऐसी प्रारंभिक जांच शुरू नहीं की जा सकती थी, जो निष्पक्ष न्याय के सभी सिद्धांतों के खिलाफ है। अपीलीय प्राधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि वह पुलिस सेवा के लिए पूर्ण अयोग्यता साबित करने वाले गंभीर कदाचार का दोषी था और उसे दी गई सजा कदाचार के अनुरूप है। अपीलीय प्राधिकारी प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करने में विफल रहा और अप्रासंगिक कारकों पर अपना निर्णय आधारित किया। लिहाजा अनुशासनात्मक प्राधिकारी दस्तावेज व साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा है। अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने सीआरपीएफ नियमों के नियम 27 (सीसी) (ii) को लागू करने में गंभीर कानूनी त्रुटि की है और उनके द्वारा बताए गए कारण, कारण नहीं हैं और अनुशासनात्मक प्राधिकारी की सनक और इच्छा पर आधारित है। पुनरीक्षण प्राधिकारी ने भी गुण-दोष के आधार पर पुनरीक्षण पर विचार न करके और यह मानते हुए कि याचिकाकर्ता ने 24 अप्रैल 2013 को जेल में अपने पति को खो दिया है, पुनरीक्षण कायम रखने योग्य नहीं है, अवैधता को कायम रखा है। ऐसे में याचिकाकर्ता के पति की सेवाओं को समाप्त करने वाले आक्षेपित आदेश और अपीलीय और पुनरीक्षण आदेशों को रद किया जाता है।