Lok Sabha Election CG: छग बनने के बाद सरगुजा, रायगढ़ में कांग्रेस को नहीं मिला जीत का स्वाद

कोरबा सीट वर्ष 2009 में जांजगीर से पृथक होकर अस्तित्व में आई है। तब से लेकर अभी तक तीन चुनाव हुए हैं। अब चौथी बार चुनाव होने जा रहा है। रायगढ़ सीट में आजादी के बाद से लोकसभा चुनाव में आठ बार कांग्रेस ने प्रत्याशी बदला है, लेकिन सफलता नहीं मिली।

By Anang Pal Dixit

Publish Date: Thu, 04 Apr 2024 04:39 AM (IST)

Up to date Date: Thu, 04 Apr 2024 04:39 AM (IST)

Lok Sabha Election CG: छग बनने के बाद सरगुजा, रायगढ़ में कांग्रेस को नहीं मिला जीत का स्वाद
भाजपा का अभेद गढ़ है रायगढ़ सीट

HighLights

  1. भाजपा का अभेद गढ़ है रायगढ़ सीट
  2. कांग्रेस के लिए कोरबा सीट बचाने की बड़ी चुनौती
  3. साख बचाने सरगुजा में जुटी कांग्रेस

अनंगपाल दीक्षित, अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरगुजा, कोरबा और रायगढ़ की तीन लोकसभा सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के लिए इस बार कई बड़ी चुनौतियां दिख रही हैं। सरगुजा सीट पर राज्य बनने के बाद 2003 से भाजपा के प्रत्याशियों को बड़ी जीत मिलती आ रही है। हर बार वोट प्रतिशत भी बढ़ रहा है किंतु इस बार यहां से भाजपा ने जिसे प्रत्याशी बनाया है, वे कुछ माह पहले कांग्रेस के विधायक थे, ऐसे में उनके लिए कांग्रेसी होने का आरोप लग रहा है, और इसे कांग्रेसी ही नहीं लगा रहे, बल्कि भाजपा से जुड़े लोग भी मैदानी स्तर पर मन लगाकर अब तक काम करते नजर नहीं आ रहे। इस चुनौती से निपटने के लिए भाजपा ने जो रणनीति बनाई है वह “मोदी” का नाम है।

कांग्रेस के लिए कोरबा सीट बचाने की बड़ी चुनौती

अंचल के कोरबा संसदीय सीट पर कांग्रेस के लिए सीट बचाने की बड़ी चुनौती है। रायगढ़ सीट भाजपा की पारंपरिक सीट है, यहां हमेशा भाजपा को जीत मिलती आई है। इस बार यहां से भाजपा ने युवा व नए चेहरे पर दांव खेला है। उनके सामने राजघराने की 70 वर्षीया महिला डाक्टर मैदान में हैं। भाजपा के लिए यहां भी अपनी सीट बरकरार रखने की चुनौती है। इन तीनों लोक सभा सीट पर चुनावी रण आरंभ हो गया है। भाजपा ने हर बूथ पर कार्यकर्ताओं को काम करने लगाया है।

मोदी की केंद्रीय योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने और छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी के नाम पर वोट भी मांगा जा रहा है। वहीं, कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता महालक्ष्मी न्याय योजना को लेकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं। कांग्रेस ने पांच न्याय योजना का पोस्टर, पंपलेट भी तैयार कर लिया है, जिसे कार्यकर्ताओं व मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक माहौल चुनावी रंग में रंगने लगा है। आरोप, प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

साख बचाने सरगुजा में जुटी कांग्रेस

सरगुजा सीट के अंतर्गत तीन जिले आते हैं। इनमें सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिला शामिल है। आठ विधानसभा क्षेत्र वाले इस लोकसभा सीट पर भले ही कांग्रेस विधानसभा चुनाव में लगातार मजबूत रही है किंतु बीते विधानसभा चुनाव में सभी आठ सीटें कांग्रेस को गंवानी पड़ी है। इतनी बड़ी हार कांग्रेस को पहले कभी नहीं मिली थी। इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है किंतु लोकसभा चुनाव में हमेशा यहां के मतदाताओं ने भाजपा को चुना है।

राज्य बनने से पहले जरूर कांग्रेस मजबूत थी, किंतु राज्य बनने के बाद लोकसभा चुनाव में इस सीट पर अब तक सफलता नहीं मिली है। 2004 में नंदकुमार साय, 2009 में मुरारी लाल सिंह, 2014 में कमलभान सिंह, 2019 में रेणुका सिंह भाजपा के प्रत्याशी बनाए गए और सभी ने सर्वाधिक मतों से जीत दर्ज की। कांग्रेस को अभी भी जीत की तलाश है।

भाजपा का अभेद गढ़ है रायगढ़ सीट

रायगढ़ सीट में आजादी के बाद से लोकसभा चुनाव में आठ बार कांग्रेस ने प्रत्याशी बदला है, लेकिन सफलता नहीं मिली। नंदकुमार साय ने भाजपा को जीत दिलाकर नींव को मजबूत किया था। बाद में भाजपा के विष्णुदेव साय (वर्तमान मुख्यमंत्री) ने 1999 से 2014 तक लगातार जीत को बनाए रखा। गोमती साय ने 2014 से 2024 तक इस जीत को कायम रखा।

भाजपा के इस अभेद गढ़ को भेदने के लिए कांग्रेस ने राजघराने की डा मेनका सिंह को प्रत्याशी बनाया है। 2018 में कांग्रेस ने संसदीय क्षेत्र के आठ विधानसभा में कब्जा जमाया और जीत के लिए अनुकूल माहौल बनाया था किंतु मोदी लहर में गोमती साय ने जीत हासिल कर ली। अब एक बार फिर दोनों दल चुनावी मैदान में ताकत झोंक चुके हैं।

कोरबा : तीन चुनाव में दो बार जीती कांग्रेस

कोरबा सीट वर्ष 2009 में जांजगीर से पृथक होकर अस्तित्व में आई है। तब से लेकर अभी तक तीन चुनाव हुए हैं। अब चौथी बार चुनाव होने जा रहा है। इस सीट में दो बार कांग्रेस और एक बार भाजपा को अब तक मौका मिला है। इस परपंरा की शुरुआत परिसीमन के बाद पहले चुनाव से ही शुरू हो गई। पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस के डा चरण दास महंत ने जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी करूणा शुक्ला को पराजित किया।

वर्ष 2014 के चुनाव में कांग्रेस ने पुन: डा महंत को मैदान में उतारा और इस बार भाजपा के प्रत्याशी डा बंशीलाल महतो से मुकाबला हुआ और डा महंत को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने डा महंत के स्थान पर उनकी पत्नी ज्योत्सना महंत को मौका दिया।

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    नीरज डिजिटल पत्रकारिता के मजबूत सिपाही हैं एक मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट तौर पर कार्य करने में पारंगत हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और