Bengal Politics: सामने आई वजह! इसलिए बंगाल में कांग्रेस और TMC में नहीं हुआ गठबंधन, इस नेता ने किया था ‘वीटो’
बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस के दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। टीएमसी ने जहां प्रदेश की सभी 42 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, तो वहीं कुछ सीटों पर कांग्रेस ने भी उम्मीदवारों का एलान किया है।
By Bharat Mandhanya
Publish Date: Tue, 02 Apr 2024 11:57 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 02 Apr 2024 11:57 AM (IST)

HighLights
- बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी आमने सामने
- इंडी गठबंधन में साथ है दोनों पार्टियां
- अधीर रंजन चौधरी गठबंधन के पक्ष में नहीं थे
Bengal Politics विशाल श्रेष्ठ, कोलकाता। यह लोकसभा चुनाव काफी रोचक है। विपक्षी गठबंधन इंडी अलायंस जहां राष्ट्रीय स्तर पर एकता दिखा रहा है, तो वहीं राज्यों में यह बंटकर रह गया है। इसकी बानगी पश्चिम बंगाल है। दरअसल, जहां राष्ट्रीय मंच पर कांग्रेस और टीएमसी एक साथ है, तो वहीं बंगाल में ये पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहीं हैं। टीएमसी जहां पश्चिम बंगाल की सभी 42 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है, तो वहीं कांग्रेस ने भी कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
क्यों नहीं हुआ गठबंधन
बंगाल में कांग्रेस के पास एकमात्र विकल्प अधीर रंजन चौधरी ही हैं। वे सोनिया और राहुल गांधी के सबसे और भरोसेमंद सिपहसालारों में से एक है। ऐसे में कोई भी निर्णय आलाकमान उनकी मंजूरी के बगैर नहीं लेता और यही कारण है कि जब बंगाल में टीएमसी के साथ गठबंधन की बात आई तो अधीर रंजन चौधरी ने इसका पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस आलाकमान को भी अधीर के इस फैसले के सामने झुकना पड़ा। ऐसे में अब कांग्रेस बंगाल में खुद के दम पर चुनाव लड़ रही है। वहीं टीएमसी भी गठबंधन नहीं हो पाने के लिए अधीर को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहरा चुकी है।
अधीर रंजन के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
बंगाल विधानसभा में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है, इतना ही नहीं 42 लोकसभा सीटों वाले राज्य में कांग्रेस के सिर्फ दो ही सांसद है। ऐसे में बंगाल की बहरमपुर सीट से पांच बार के सांसद अधीर को न सिर्फ खुद चुनाव जीतना है, बल्कि कांग्रेस के अन्य उम्मीदवारों को भी चुनाव जीतवाने की जिम्मेदारी भी अधीर के कंधों पर रही है। इतना ही नहीं पार्टी के राज्य नेताओं के साथ आलाकमान भी अधीर के भरोसे है।
निभा रहे अहम भूमिका
बंगाल में लोकसभा चुनाव के निर्णयों में अधीर रंजन चौधरी आगे रहे हैं। प्रत्याशियों के चयन में जहां अधीर रंजन अहम भूमिका निभा रहे हैं, तो वहीं वामपंथी दलों के साथ गठबंधन के लिए भी तालमेल बैठा रहे हैं।
राजीव सरकार में थामा था कांग्रेस का दामन
अधीर रंजन चौधरी ने राजीव गांधी की सरकार के दौरान साल 1991 में कांग्रेस की सदस्यता ली थी। वे कांग्रेस से विधायक और सांसद रहे हैं। मनमोहन सरकार में उन्हें केंद्रीय रेल राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया था।


